महाराष्ट्र में सूखे का कहर...आधा राज्य पानी के लिए बेहाल, फसलें बर्बाद

महाराष्ट्र में पानी का संकट बेहद गंभीर हो गया है। राज्य का बड़ा हिस्सा सूखे की चपेट में है और खेतों में खड़ी अनाज, फल व सब्जियों की फसलें बर्बाद हो रही हैं। हालात इतने खराब हैं कि किसान अब फसल के नुकसान की भरपाई से ज्यादा अपने फलों के बगीचों को बचाने की गुहार लगा रहे हैं। आम, अंगूर, अनार और केले की फसलें प्रभावित होने के बाद जमीन का जलस्तर भी तेजी से नीचे जा रहा है।

अंगूर के बागों पर मंडराया बड़ा संकट

अंगूर किसान संगठन के महाराष्ट्र अध्यक्ष कैलास भोसले के मुताबिक, पिछले दो महीनों से बारिश नहीं हुई है और सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध नहीं है। रिजर्वायर में मौजूद पानी के इस्तेमाल पर भी रोक है। उनका कहना है कि सरकार कम से कम टैंकरों के जरिए बागों तक पानी पहुंचाए, ताकि सूखते पौधों को बचाया जा सके। दूर-दराज से पानी लाकर सिंचाई करना छोटे और मध्यम किसानों के लिए बेहद मुश्किल हो गया है।

फलों की पैदावार 30 फीसदी तक सिमटने का अनुमान

केवीके नारायणगांव के अध्यक्ष अनिल मेहेर के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों में किसानों को सामान्य उत्पादन का 30 प्रतिशत से ज्यादा फल मिलने की उम्मीद नहीं है। बची हुई फसल को बचाने के लिए तुरंत शेड नेट लगाने की जरूरत है, ताकि तेज धूप से जमीन और पेड़ों को राहत मिल सके। विशेषज्ञों ने सरकार से शेड नेट के लिए तत्काल और पर्याप्त सब्सिडी देने की मांग की है।

1972 के सूखे से भी गंभीर हालात, सरकारी मदद की आस

मराठवाड़ा के कृषि विशेषज्ञ विजय बोराडे का कहना है कि मौजूदा संकट 1972 के भीषण सूखे से भी गंभीर हो चुका है। आज अनाज की उपलब्धता जरूर है, लेकिन पानी और पशुओं का चारा खत्म होने की स्थिति में है। अब सवाल फलों की पैदावार का नहीं, बल्कि आम, अनार और केले जैसे पेड़ों के अस्तित्व को बचाने का है। किसानों के सामने सूखी जमीन, मवेशियों के लिए चारे-पानी की कमी और बढ़ते नुकसान के बीच सरकारी मदद ही आखिरी सहारा बची है।

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