मकर संक्रांति पर संगम स्नान का पुण्य योग

प्रयागराज का माघ मेला भारतीय धर्म और संस्कृति का सबसे बड़ा मेलों में से एक है। इस मेला में श्रद्धालु गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम पर स्नान कर पुण्य कमाते हैं। मकर संक्रांति का दिन, इस मेला का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है।

 मकर संक्रांति 2026: खास क्यों है?

  • तिथि: 14 जनवरी 2026
  • सूर्य देव का **उत्तरायण प्रवेश होता है, जिसे शास्त्रों में अत्यंत शुभ और पुण्यकारी समय माना गया है।
  • इस वर्ष मकर संक्रांति पर षटतिला एकादशी भी पड़ रही है, जिससे पुण्य और दान का महत्व दोगुना हो जाता है।
  • अनुमान है कि इस दिन करीब 1 करोड़ श्रद्धालु संगम स्नान के लिए आएंगे।

 

 मकर संक्रांति स्नान का शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त:

  • सुबह 4:51 बजे से 5:44 बजे तक
  • इस समय गंगा स्नान विशेष पुण्य देता है और ध्यान के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।

महापुण्यकाल / पुण्यकाल:

  • दोपहर 3:13 बजे से शाम 5:20 बजे तक
  • दान, पूजा और धार्मिक कर्म इस अवधि में अत्यंत फलदायी माने जाते हैं।

 

मकर संक्रांति स्नान का आध्यात्मिक महत्व

मकर संक्रांति पर संगम स्नान करने से:

  • जीवन के पाप और बाधाएं दूर होती हैं
  • मन को शांति और मानसिक ऊर्जा मिलती है
  • दान, तप और साधना का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है

इस दिन स्नान करने वाले श्रद्धालु अपने जीवन में नए आरंभ और आध्यात्मिक पुनर्जन्म का अनुभव करते हैं।

 

 

माघ मेला 2026 के प्रमुख स्नान पर्व

1. पौष पूर्णिमा स्नान – 3 जनवरी 2026

  •    माघ मेले की शुरुआत का दिन
  •    पितरों की तृप्ति का पुण्य मिलता है

2. मकर संक्रांति स्नान – 14 जनवरी 2026

  •    सूर्य का उत्तरायण प्रवेश
  •    सबसे प्रमुख और पुण्यकारी स्नान

3. माघी पूर्णिमा स्नान – 17 जनवरी 2026

  •    इस दिन स्नान करने से पाप नष्ट होते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है

4. मौनी अमावस्या स्नान – 18 जनवरी 2026

  •    माघ मेले का सबसे पवित्र दिन
  •    मौन व्रत और संगम स्नान से आत्मिक शांति मिलती है

5. महाशिवरात्रि स्नान – 15 फरवरी 2026

  •    माघ मेले का समापन
  •    स्नान मोक्षदायी माना गया है
  •  

माघ मेला 2026 में मकर संक्रांति का संगम स्नान श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक अनुभव का सर्वोच्च अवसर है। सही मुहूर्त में स्नान और दान करने से जीवन में शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति का संचार होता है। यही कारण है कि हर साल लाखों श्रद्धालु इस अवसर का लाभ लेने प्रयागराज आते हैं।

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