मलिहाबाद में किसका कितना दम? पहले सपा, फिर बीजेपी का दबदबा, तीन चुनावों का पूरा हिसाब

लखनऊ की सियासत में एक ऐसी विधानसभा सीट, जहां कभी समाजवादी पार्टी ने जीत का परचम लहराया, लेकिन पांच साल बाद ही जनता का फैसला बदला और भारतीय जनता पार्टी ने बाजी मार ली! इसके बाद 2022 में भी बीजेपी ने अपनी जीत का सिलसिला जारी रखा। लेकिन इस बार मुकाबला इतना करीबी रहा कि जीत और हार के बीच का अंतर काफी कम हो गया! जी हां, हम बात कर रहे हैं लखनऊ जिले की मलिहाबाद विधानसभा सीट की। वही मलिहाबाद, जो अपनी पहचान आम की बागवानी और ग्रामीण परिवेश के लिए भी रखता है। यहां की सियासत को समझना है, तो सिर्फ नेताओं के नाम और पार्टियों के झंडे देखना काफी नहीं है। यहां के चुनावी नतीजे, प्रत्याशियों को मिले वोट और जीत के अंतर को भी समझना होगा। 2012 में समाजवादी पार्टी के इंदल कुमार ने महज 2 हजार 215 वोटों से जीत हासिल की। मुकाबला इतना करीबी था कि दूसरे स्थान पर रहे कौशल किशोर भी ज्यादा पीछे नहीं थे। लेकिन 2017 में चुनावी तस्वीर बदल गई। बीजेपी की जय देवी ने जीत दर्ज की और सपा को पीछे छोड़ दिया। फिर 2022 में जय देवी दोबारा मैदान में उतरीं और जीत का सिलसिला बरकरार रखा। अब सवाल है कि आखिर मलिहाबाद में 2012 से 2022 के बीच चुनावी समीकरण कैसे बदले? किस चुनाव में किस पार्टी को कितने वोट मिले? सपा की जीत के बाद बीजेपी ने यहां अपनी जगह कैसे बनाई? आज हम आपको बताएंगे मलिहाबाद विधानसभा सीट का पूरा चुनावी इतिहास। तीन विधानसभा चुनावों के नतीजे, जीत-हार का पूरा हिसाब और उन मुद्दों की पड़ताल, जिनके जरिए इस सीट की जमीनी तस्वीर को समझा जा सकता है।

सबसे पहले बात करते हैं मलिहाबाद विधानसभा सीट की। लखनऊ जिले की यह विधानसभा सीट संख्या 168 है और अनुसूचित जाति यानी एससी वर्ग के लिए आरक्षित है। यह मोहनलालगंज लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। मलिहाबाद की पहचान आम की बागवानी और ग्रामीण इलाकों से भी जुड़ी हुई है। यहां की राजनीति को समझने के लिए खेती-किसानी, किसानों की जरूरतों, ग्रामीण सड़कों, सिंचाई, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं जैसे सवालों पर नजर डालना जरूरी है। अब अगर मलिहाबाद के पिछले तीन विधानसभा चुनावों पर नजर डालें, तो यहां का राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प दिखाई देता है। 2012 में सपा ने जीत दर्ज की, 2017 में बीजेपी ने सीट अपने नाम की और 2022 में बीजेपी ने लगातार दूसरी बार जीत हासिल की।

अब एक-एक करके समझते हैं कि मलिहाबाद में पिछले तीन चुनावों के दौरान क्या हुआ।

साल 2012 के विधानसभा चुनाव में मलिहाबाद की सियासत का मुकाबला बेहद दिलचस्प रहा। समाजवादी पार्टी ने इंदल कुमार को उम्मीदवार बनाया था, जबकि राष्ट्रवादी कम्युनिस्ट पार्टी की तरफ से कौशल किशोर मैदान में थे। वहीं बहुजन समाज पार्टी के डॉ. सिद्धार्थ शंकर भी चुनाव लड़ रहे थे। जब मतगणना पूरी हुई, तो सपा के इंदल कुमार को 62 हजार 782 वोट मिले। दूसरी तरफ कौशल किशोर को 60 हजार 567 वोट हासिल हुए। बसपा के डॉ. सिद्धार्थ शंकर को भी 53 हजार 550 वोट मिले। इस तरह इंदल कुमार ने कौशल किशोर को महज 2 हजार 215 वोटों से हराकर जीत दर्ज की। जरा इस अंतर पर गौर कीजिए, दोनों प्रमुख प्रत्याशियों के बीच मुकाबला इतना करीबी था कि कुछ हजार वोटों का अंतर ही जीत और हार का फैसला कर गया। इस चुनाव में बसपा के प्रत्याशी को भी 53 हजार से ज्यादा वोट मिले। यानी मुकाबले में एक से ज्यादा दलों की मजबूत मौजूदगी दिखाई दी। 2012 के नतीजों ने मलिहाबाद में सपा को विधानसभा तक पहुंचाया, लेकिन जीत का अंतर यह बताता है कि मुकाबला एकतरफा नहीं था। और फिर आया 2017 का विधानसभा चुनाव, जब मलिहाबाद में सियासी तस्वीर बदल गई। जिस सीट पर सपा ने जीत दर्ज की थी, वहां बीजेपी ने अपनी दावेदारी मजबूत की और चुनाव के नतीजों में बड़ा बदलाव देखने को मिला।

अब बात करते हैं 2017 के विधानसभा चुनाव की। इस बार भारतीय जनता पार्टी ने जय देवी को मैदान में उतारा। समाजवादी पार्टी की तरफ से राजबाला चुनाव लड़ रही थीं, जबकि बहुजन समाज पार्टी ने सत्य कुमार गौतम को उम्मीदवार बनाया। चुनाव परिणाम सामने आए तो बीजेपी की जय देवी ने जीत हासिल कर ली। उन्हें 94 हजार 677 वोट मिले। सपा की राजबाला को 72 हजार 9 वोट प्राप्त हुए, जबकि बसपा के सत्य कुमार गौतम को 53 हजार 481 वोट मिले। इस तरह जय देवी ने सपा की राजबाला को 22 हजार 668 वोटों से हराया और मलिहाबाद विधानसभा सीट पर बीजेपी का कब्जा हो गया।
अब 2012 और 2017 के आंकड़ों को साथ रखकर देखिए। 2012 में सपा ने कौशल किशोर को सिर्फ 2 हजार 215 वोटों से हराया था। लेकिन 2017 में बीजेपी की जय देवी ने सपा प्रत्याशी के खिलाफ 22 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। यानी पांच साल के भीतर मलिहाबाद की विजेता पार्टी बदल गई और चुनावी नतीजों में बड़ा अंतर देखने को मिला। इस चुनाव के दौरान जय देवी के पति कौशल किशोर का नाम भी चर्चा में रहा। कौशल किशोर 2014 में मोहनलालगंज लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद चुने गए थे।

साल 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने एक बार फिर जय देवी पर भरोसा जताया। समाजवादी पार्टी ने सुरेंद्र कुमार को उम्मीदवार बनाया, जबकि बहुजन समाज पार्टी की तरफ से जगदीश मैदान में थे। कांग्रेस ने इंदल कुमार को टिकट दिया। चुनाव के नतीजे आए तो बीजेपी की जय देवी ने 1 लाख 6 हजार 372 वोट हासिल किए। वहीं सपा के सुरेंद्र कुमार को 98 हजार 627 वोट मिले। बसपा के जगदीश को 25 हजार 914 वोट प्राप्त हुए, जबकि कांग्रेस के इंदल कुमार को 2 हजार 142 वोट मिले। इस तरह जय देवी ने सुरेंद्र कुमार को 7 हजार 745 वोटों से हराया और लगातार दूसरी बार मलिहाबाद से विधायक बनीं। लेकिन इस चुनाव का सबसे अहम पहलू जीत का अंतर रहा। 2017 में जय देवी ने 22 हजार 668 वोटों से जीत दर्ज की थी, जबकि 2022 में जीत का अंतर घटकर 7 हजार 745 वोट रह गया। दूसरी तरफ सपा के सुरेंद्र कुमार को करीब 99 हजार वोट मिले। इससे इतना जरूर स्पष्ट होता है कि 2022 में बीजेपी और सपा के बीच मुकाबला करीबी रहा। 
फिलहाल चुनावी रिकॉर्ड यही बताता है कि 2017 में जीतने के बाद बीजेपी ने 2022 में भी अपनी सीट बचा ली। लेकिन इस बार मुकाबले का अंतर पहले के मुकाबले काफी कम हो गया।

अब बात उन सवालों की, जो किसी भी विधानसभा क्षेत्र की राजनीति को समझने के लिए जरूरी होते हैं। आखिर मलिहाबाद की जनता अपने इलाके में क्या बदलाव चाहती है? कौन-सी सुविधाएं बेहतर हुई हैं और किन मामलों में अब भी सुधार की जरूरत महसूस होती है? मलिहाबाद की पहचान आम की बागवानी और ग्रामीण परिवेश से जुड़ी है। ऐसे में किसानों की जरूरतें, सिंचाई, फसल का उचित मूल्य, बागवानी से जुड़ी सुविधाएं और बाजार तक पहुंच जैसे मुद्दों की पड़ताल महत्वपूर्ण हो सकती है। इसके साथ ही ग्रामीण सड़कों की स्थिति, सार्वजनिक परिवहन, पेयजल, जलनिकासी और सफाई जैसे बुनियादी सवाल भी जनता से पूछे जाने चाहिए। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर, सरकारी योजनाओं का लाभ और शिकायतों के समाधान की स्थिति भी क्षेत्र की जमीनी तस्वीर समझने में मदद कर सकती है।

अब नजर आने वाले विधानसभा चुनाव पर। 2027 में मलिहाबाद की जनता क्या फैसला करेगी, इसका जवाब अभी किसी के पास नहीं है। लेकिन पिछले तीन चुनावों का इतिहास हमें इस सीट की राजनीतिक तस्वीर जरूर दिखाता है। 2012 में सपा के इंदल कुमार ने करीबी मुकाबले में जीत हासिल की। 2017 में बीजेपी की जय देवी ने सीट जीतकर राजनीतिक बदलाव दर्ज किया। इसके बाद 2022 में जय देवी ने दोबारा जीत हासिल की, लेकिन सपा के सुरेंद्र कुमार के साथ मुकाबले में जीत का अंतर घट गया। आने वाले चुनाव में उम्मीदवार कौन होंगे, राजनीतिक दल किन मुद्दों को उठाएंगे, क्षेत्र में विकास कार्यों की स्थिति क्या होगी और जनता किन सवालों को प्राथमिकता देगी, इन सभी बातों को समझना जरूरी होगा। पिछले चुनावों के नतीजे हमें इतिहास बताते हैं, लेकिन अगले चुनाव का फैसला पहले से तय नहीं करते। 2027 में मलिहाबाद की सियासत किस दिशा में जाएगी, इसका जवाब मतदाताओं के फैसले और उस समय की चुनावी परिस्थितियों से ही मिलेगा।

तो यह है लखनऊ की मलिहाबाद विधानसभा सीट का पूरा चुनावी हिसाब। 2012 में सपा के इंदल कुमार ने करीबी मुकाबले में जीत दर्ज की। 2017 में बीजेपी की जय देवी ने सीट पर कब्जा जमाया और 2022 में भी जीत दोहराकर लगातार दूसरी बार विधायक बनीं। तीन चुनाव, अलग-अलग प्रत्याशी और बदलते नतीजे-मलिहाबाद की सियासत में हर चुनाव ने एक नई तस्वीर पेश की। 2012 में जहां जीत का अंतर सिर्फ 2 हजार 215 वोट था, वहीं 2017 में बीजेपी ने 22 हजार 668 वोटों से जीत हासिल की। 2022 में बीजेपी की जीत का अंतर घटकर 7 हजार 745 वोट रह गया। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आने वाले चुनाव से पहले मलिहाबाद में जनता के मुद्दे क्या होंगे? किसानों और बागवानों की उम्मीदें क्या हैं? सड़क, पानी, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे सवालों पर क्षेत्र की स्थिति क्या है? और इन मुद्दों को लेकर राजनीतिक दल जनता के सामने क्या जवाब लेकर आते हैं? फिलहाल मलिहाबाद का पिछला चुनावी इतिहास यही बताता है कि 2012 में सपा ने जीत दर्ज की, जबकि 2017 और 2022 में बीजेपी ने लगातार दो बार सीट जीती। आगे की कहानी क्या होगी, यह आने वाला चुनाव और जनता का फैसला बताएगा।

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