ममता बनर्जी का नामांकन: भवानीपुर के अखाड़े में 'खेला' शुरू, शाह-शुभेंदु की घेराबंदी

तैयार हो जाइए, क्योंकि आज लोकतंत्र के सबसे बड़े अखाड़े में शह और मात का वो खेल शुरू हो चुका है, जिसकी गूंज दशकों तक सुनाई देगी! जी हां बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भवानीपुर के मैदान में अपना परचा दाखिल कर दिया है, तो दूसरी तरफ अमित शाह के रणनीतिकार और बंगाल के शुभेंदु ने चक्रव्यूह रच दिया है। लेकिन बीते दिन जो हुआ वो भी सियासत में काफी धमाकेदार रहा। जी हां बंगाल की वोटर लिस्ट से 1 करोड़ नामों का गायब होना! ये महज आंकड़ा नहीं है, ये वो सियासी परमाणु बम है जिसने ममता दीदी के अभेद्य किले की नींव हिला दी है। ऐसे में सवाल है कि क्या ये भाजपा की मिशन बंगाल वाली वो गुप्त रणनीति है जो ममता बनर्जी के पैरों तले से जमीन खींचने वाली है? शुभेंदु अधिकारी और अमित शाह की जोड़ी ने भवानीपुर से लेकर नंदीग्राम तक जो बिसात बिछाई है, क्या उसमें दीदी फंस जाएंगी? आइए जानते हैं....

आपको बता दें पश्चिम बंगाल की सियासत का पारा आज अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी पारंपरिक और बेहद हॉट सीट भवानीपुर से नामांकन दाखिल कर दिया है। नामांकन के बाद ममता बनर्जी ने धर्मनिरपेक्ष अंदाज में सबको सलाम, जय जिनेंद्र और सत श्री अकाल कहा। उन्होंने हुंकार भरते हुए कहा कि वे न सिर्फ भवानीपुर बल्कि पूरे बंगाल के हर क्षेत्र के लिए काम करेंगी और चौथी बार तृणमूल की सरकार बनाएंगी। वहीं इस बार मुकाबला कांटों का है क्योंकि भाजपा ने यहाँ से नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी को मैदान में उतारा है। शुभेंदु पहले ही नामांकन कर चुके हैं और उनके साथ खुद गृह मंत्री अमित शाह मौजूद थे। भवानीपुर के साथ-साथ नंदीग्राम की पुरानी जंग भी इस बार चर्चा में है।

दूसरी तरफ भाजपा के भीतर से आ रही खबरें बंगाल चुनाव को एक नया मोड़ दे रही हैं। भाजपा सूत्रों का दावा है कि ममता सरकार के खिलाफ जबरदस्त परिवर्तन की भावना है, लेकिन असली एक्स-फैक्टर है वोटर लिस्ट में हुआ ऐतिहासिक बदलाव।
SIR प्रक्रिया के दौरान लगभग 1 करोड़ नामों को वोटर लिस्ट से हटाया गया है। भाजपा का मानना है कि इससे टीएमसी का स्थापित मतदान पैटर्न ध्वस्त हो जाएगा। आकंड़ों के अनुसार, महज 58 सीटों पर 1.92 लाख वोटों का स्विंग भाजपा को बहुमत के पार ले जा सकता है। आंकड़ों का दावा है कि टीएमसी की जीत का मार्जिन मुस्लिम बहुल इलाकों में बहुत ज्यादा है, जिससे उसके 55.8 लाख वोट खराब हो रहे हैं। इसके मुकाबले भाजपा का वोट वितरण पूरे राज्य में समान है, जो उसे क्लोज फाइट वाली सीटों पर बढ़त दिला सकता है। जहां 7 अप्रैल को चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल की फाइनल लिस्ट जारी की, जिसने राजनीतिक दलों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। आयोग ने राज्य के कुल मतदाताओं का लगभग 11.85% हिस्सा हटा दिया है। सबसे ज्यादा नाम मुर्शिदाबाद, नॉर्थ 24 परगना, मालदा और नादिया जैसे संवेदनशील इलाकों से कटे हैं। वहीं नामों के हटने से नाराज टीएमसी के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज चुनाव आयोग से मिलकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। 

देखा जाए तो सवाल यही हैं कि बंगाल से लेकर केरल तक और असम की वादियों से लेकर पुडुचेरी के समंदर तक, सत्ता की चाबी किसके पास जाएगी? क्या ममता बनर्जी चौथी बार मुख्यमंत्री बनकर इतिहास रचेंगी, या भाजपा का 'मिशन बंगाल' इस बार सफल होगा? 1 करोड़ वोटों का कटना और दिग्गजों का ये शक्ति प्रदर्शन इशारा कर रहा है कि इस बार चुनाव का ऊंट किसी भी करवट बैठ सकता है। 4 मई को जब नतीजे आएंगे, तो देश की राजनीति की एक नई तस्वीर साफ होगी।

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