Mango Farming Tips: मटर साइज स्टेज पर कैसे करें सही देखभाल
उत्तर भारत के आम उत्पादक इलाकों में इस समय फसल एक बेहद अहम दौर से गुजर रही है। पेड़ों पर लगे आम के फल अब “मटर के दाने” जितने हो चुके हैं और तेजी से बढ़ रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यही वह संवेदनशील समय है, जब थोड़ी सी सावधानी और सही देखभाल से किसान अपनी आय में 20-30% तक बढ़ोतरी कर सकते हैं, जबकि लापरवाही नुकसान का कारण बन सकती है।
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, मटर के आकार से लेकर गुठली बनने तक का समय आम के उत्पादन को तय करने वाला चरण होता है। इस दौरान फल झड़ना, कीट और रोगों का हमला तथा पोषक तत्वों की कमी जैसी समस्याएं सबसे ज्यादा देखने को मिलती हैं।
कीट और रोग से बचाव जरूरी
इस समय आम के बागों में मधुआ (हॉपर), पाउडरी मिल्ड्यू और फल मक्खी का खतरा बढ़ जाता है। इससे बचाव के लिए पीले स्टिकी ट्रैप लगाना, नीम आधारित दवाओं का उपयोग करना और जरूरत पड़ने पर सीमित मात्रा में कीटनाशकों का छिड़काव करना फायदेमंद रहता है।
फल गिरने की समस्या कैसे रोकें
शुरुआती चरण में कुछ हद तक फल गिरना सामान्य है, लेकिन अगर यह ज्यादा हो तो नुकसान बढ़ सकता है। इसे रोकने के लिए NAA (प्लेनोफिक्स), बोरॉन और पोटेशियम नाइट्रेट का संतुलित छिड़काव किया जा सकता है। कैल्शियम और बोरॉन का संयुक्त उपयोग करने से 15-20% तक अधिक फल बचाए जा सकते हैं।
सिंचाई और नमी का संतुलन
इस समय पानी का सही प्रबंधन बहुत जरूरी है। मिट्टी में नमी कम होने पर फल झड़ सकते हैं, वहीं ज्यादा पानी से जड़ों में सड़न हो सकती है। इसलिए 7-10 दिन के अंतराल पर हल्की सिंचाई, ड्रिप इरिगेशन और मल्चिंग अपनाना बेहतर रहता है।
पोषण प्रबंधन से मिलेगा फायदा
फल का आकार और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए संतुलित खाद देना जरूरी है। बड़े पेड़ों में डीएपी, यूरिया, पोटाश और गोबर की खाद का सही अनुपात में उपयोग करना चाहिए। साथ ही जिंक, बोरॉन और आयरन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव भी लाभकारी होता है।
बदलते मौसम का असर
जलवायु परिवर्तन के कारण कीट और रोगों का असर बढ़ रहा है और फल गिरने की समस्या भी ज्यादा हो रही है। ऐसे में किसानों को मौसम आधारित सलाह पर ध्यान देना चाहिए और कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से जुड़े रहना चाहिए।
आम की खेती में यह समय “टर्निंग पॉइंट” जैसा होता है। अगर किसान इस दौरान समेकित कीट प्रबंधन (IPM) और समेकित पोषण प्रबंधन (INM) अपनाते हैं, तो वे लागत कम करके उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बढ़ा सकते हैं। सही देखभाल से न केवल फसल बेहतर होगी, बल्कि आय में भी अच्छा इजाफा होगा।


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