परंपरागत खेती छोड़ आधुनिक खेती की ओर किसान
कौशांबी जनपद में अब किसान पारंपरिक खेती को छोड़कर नई और तकनीकी खेती की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। कम समय, कम लागत और अधिक मुनाफे की वजह से किसान विदेशी फलों और हाई-टेक बागवानी को अपना रहे हैं।
केसर आम की बागवानी की शुरुआत
शहजादपुर गांव के किसान कृष्ण देव त्रिपाठी पहले पारंपरिक खेती करते थे, लेकिन कम मुनाफे के कारण उन्होंने नई तकनीक अपनाई। उन्होंने तीन बीघा जमीन में करीब 900 केसर प्रजाति के आम के पौधे लगाए हैं। उनका कहना है कि यह खेती अब उनके लिए लाभकारी साबित हो रही है।
बागवानी की तकनीक और पौधों की रोपाई
केसर आम की खेती में पौधों को लगभग तीन-तीन फीट की दूरी पर लगाया जाता है। शुरुआत में पौधे छोटे होते हैं, लेकिन धीरे-धीरे यह 7 से 8 फीट तक बढ़ जाते हैं। खास बात यह है कि पौधे ढाई फीट की ऊंचाई से ही फल देना शुरू कर देते हैं।
ड्रिप सिंचाई और देखभाल की तकनीक
इस बागवानी में ड्रिप सिंचाई तकनीक का उपयोग किया जाता है, जिससे पानी की बचत होती है और पौधों को पर्याप्त पोषण मिलता है। नियमित छंटाई से पौधों की वृद्धि तेज होती है और उत्पादन भी अधिक मिलता है।
बाजार में अच्छा दाम और मुनाफा
केसर आम की फसल लगभग 5 साल में पूरी तरह तैयार हो जाती है। एक पौधे से करीब 20 से 25 किलो आम का उत्पादन होता है, जो बाजार में 150 से 200 रुपये प्रति किलो तक बिकता है। इससे किसानों को अच्छा मुनाफा मिल रहा है।
महाराष्ट्र से लाकर शुरू की गई खेती
किसान कृष्ण देव त्रिपाठी ने बताया कि केसर आम के पौधे महाराष्ट्र से लाए गए हैं। एक पौधे की कीमत करीब 150 रुपये है। हालांकि पौधा दूसरे साल से फल देने लगता है, लेकिन बेहतर उत्पादन के लिए 2 से 3 साल बाद ही फल लेना उचित माना जाता है।
निष्कर्ष
कौशांबी में केसर आम की बागवानी किसानों के लिए एक नई उम्मीद बनकर उभर रही है। यह आधुनिक तकनीक खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बना रही है, जिससे किसानों की आय में बढ़ोतरी हो रही है।


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