माता पार्वती से हर पत्नी को मिलती हैं रिश्तों की पांच अनमोल सीख – प्रेम, धैर्य और समर्पण की मिसाल

सावन का पवित्र  महीना न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह रिश्तों की गहराई को समझने और उन्हें मजबूत बनता है । महादेव की पूजा के इस विशेष अवसर पर माता पार्वती के जीवन से प्रेरणा लेना हर महिला के लिए बेहद लाभकारी हो सकता है। देवी पार्वती प्रेम , समर्पण , धैर्य और त्याग की देवी है इसलिए उन्हें एक आदर्श पत्नी के रूप पूजा जाता है |

माता पार्वती: एक प्रेरणादायक जीवन

देवी पार्वती ने भगवन शिव को पाने के लिए कठोर तपस्या की थी । यह बताता है कि सच्चा रिश्ता केवल बाहरी सुंदरता पर नहीं, बल्कि आंतरिक गुणों, समर्पण और आस्था पर टिकता है। शिव-पार्वती का संबंध आध्यात्मिकता के साथ-साथ एक मजबूत वैवाहिक जीवन का प्रतीक भी है।

देवी पार्वती सिखाती है हर स्त्री को ये 5 सीख 

निःस्वार्थ प्रेम और समर्पण
माता पार्वती का भगवान शिव के प्रति प्रेम अटूट था। उन्होंने उन्हें पाने के लिए कई जन्म लिए और वर्षों तपस्या की। इससे हमें ये सीख मिलती है कि किसी भी रिश्ते में निःस्वार्थ प्रेम और समर्पण सबसे आवश्यक होते हैं।

हर परिस्थिति में साथ निभाना
देवी पार्वती ने भगवान शिव का हर हाल में साथ दिया – चाहे वे श्मशान में रहें या ध्यान में लीन हों। एक पत्नी के रूप में यह बताता है कि रिश्ता परिस्थिति के अनुसार नहीं, बल्कि समर्पण के भाव से निभाया जाता है।

धैर्य की परीक्षा में सफल
भगवान शिव अक्सर तपस्या में लीन रहते थे, फिर भी माता पार्वती ने कभी भी धैर्य नहीं खोया। यह हर स्त्री को सिखाता है कि धैर्य रिश्तों को गहराई और मजबूती देता है।

सम्मान का भाव
देवी पार्वती ने कभी भगवान शिव का तिरस्कार नहीं किया। सती के रूप में, उन्होंने अपने पति के अपमान पर आत्मदाह करना बेहतर समझा। यह दर्शाता है कि पत्नी को हमेशा अपने पति का सम्मान करना चाहिए।

स्वीकार्यता और समझदारी
भगवान शिव सर्पधारी, भस्म लिप्त और श्मशानवासी हैं, पर माता पार्वती ने उन्हें उसी रूप में अपनाया। इससे सीख मिलती है कि जीवनसाथी को जैसा वह है, वैसे ही स्वीकार करना चाहिए, न कि उसे बदलने की कोशिश करनी चाहिए।


आज के समय में जहां रिश्तो के धागे इतनीं आसानी से टूट जाते है वही माता पार्वती और भगवान शिव का प्रेम प्रेरणा का स्त्रोत बन जाता है | उनका प्रेम, धैर्य, और समर्पण बताता है कि यदि पत्नी इन गुणों को अपनाए, तो विवाह सिर्फ एक सामाजिक बंधन नहीं, बल्कि एक गहरा आत्मिक संबंध बन सकता है।

सावन में माता पार्वती की पूजा करते समय उनके इन जीवन मूल्यों को अपनाना, नारी सशक्तिकरण और सुखद वैवाहिक जीवन की ओर एक सशक्त कदम हो सकता है।

 

 

 

 

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