लखनऊ में बसपा की 2 घंटे चली महाबैठक, 'पांचवीं बार सत्ता में आने' का बुलंद किया नारा
लखनऊ के पॉश इलाके माल एवेन्यू से उठी सियासी चिंगारी ने पूरे उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है! बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपी की चार बार की मुख्यमंत्री रहीं आयरन लेडी मायावती ने साल 2027 के विधानसभा चुनाव का ऐसा चक्रव्यूह रचा है, जिसने विरोधियों की नींद उड़ा दी है। जी हां रविवार को लखनऊ स्थित बसपा मुख्यालय में करीब 2 घंटे तक चली एक हाई-वोल्टेज, मैराथन बैठक में मायावती ने वो हुंकार भरी, जिसकी गूंज सीधे सपा और भाजपा के खेमों तक जा पहुँची है। वहीं नारा बुलंद हो चुका है कि "हाथी पर बटन दबाना है, पांचवी बार सत्ता में आना है!" यह सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि यूपी की सत्ता पर दोबारा काबिज होने के लिए बसपा का वो ब्रह्मास्त्र है, जिसके दम पर मायावती 2007 के इतिहास को 2027 में दोहराने की कसम खा चुकी हैं। इस महाबैठक में उत्तर प्रदेश के कोने-कोने से आए जिलाध्यक्ष, मंडल कोऑर्डिनेटर, महानगर अध्यक्ष और जिला प्रभारियों को जीत का वो गुरुमंत्र मिला है, जो आने वाले दिनों में यूपी की राजनीति की दशा और दिशा दोनों बदलने वाला है।
आपको बता दें इस ऐतिहासिक बैठक के दौरान लखनऊ के दफ्तर में एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने पूरी मीडिया और राजनीतिक पंडितों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। मंच पर जैसे ही बैठक की शुरुआत हुई, मायावती के भतीजे और पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद ने आगे बढ़कर अपनी बुआ यानी मायावती के पैर छुए और उनका आशीर्वाद लिया।
जाहिर है मार्च 2025 में मायावती ने आकाश आनंद को अचानक उत्तराधिकारी के पद से हटाकर सबको चौंका दिया था, लेकिन अब उनकी धमाकेदार वापसी हो चुकी है। हालांकि, मायावती ने अभी तक यह पूरी तरह साफ नहीं किया है कि वह आकाश के भविष्य को लेकर क्या बड़ा फैसला करने वाली हैं, लेकिन बैठक में उनकी मौजूदगी और सम्मान ने यह साफ कर दिया है कि 2027 की जंग में आकाश आनंद बसपा का एक बड़ा चेहरा होने जा रहे हैं।
वहीं उत्तर प्रदेश की सियासत में कहा जाता है कि बिना दलितों के लखनऊ का सिंहासन नहीं मिल सकता। यूपी की कुल आबादी में दलित समुदाय की हिस्सेदारी लगभग 21 प्रतिशत है, जो पूरे देश में किसी भी राज्य के मुकाबले सबसे ज्यादा है। पिछले कुछ चुनावों में बसपा का प्रदर्शन भले ही कमजोर रहा हो और 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन ने गैर-जाटव दलितों के वोट बैंक में सेंधमारी की हो, लेकिन मायावती अब अपना खोया हुआ किला वापस पाने के लिए जी-जान से जुट गई हैं। इस बैठक में मायावती का ब्राह्मण प्रेम भी जमकर छलका। उन्होंने याद दिलाया कि बसपा सरकार के दौरान ही ब्राह्मणों को सबसे ज्यादा सम्मान मिला। पार्टी ने अतीत में ब्राह्मणों को सबसे ज्यादा टिकट दिए थे। सर्व समाज को सम्मान और भागीदारी देने का काम केवल बसपा ने ही किया है।
वहीं लोगों का कहना है कि अगर मायावती अपनी इस 'सोशल इंजीनियरिंग के पुराने फॉर्मूले को दोबारा जिंदा करने में कामयाब रहीं, तो इसका सीधा और सबसे बड़ा नुकसान अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी को होगा। सपा इस वक्त यादव, मुस्लिम और दलित-पिछड़ों के दम पर कूद रही है, लेकिन अगर दलित मतदाता वापस हाथी पर सवार हो गए, तो सपा का वोट बैंक भरभरा कर ढह जाएगा और कई सीटों पर हार-जीत का गणित बदल जाएगा। इसके अलावा, त्रिकोणीय मुकाबले का सीधा फायदा भाजपा को भी मिल सकता है। वहीं बसपा की बैठक की बात करें तो रविवार सुबह 11 बजे से शुरू हुई इस बैठक में जिलावार प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा की गई। हालांकि मायावती ने रिपोर्ट पर संतोष जताया, लेकिन साफ कह दिया कि धुरंधर और जुगाड़ू विरोधियों की हर चाल को मात देने के लिए 2007 की तरह डटना होगा। मायावती ने कड़े निर्देश दिए कि...
संगठन को केवल शहरों तक नहीं, बल्कि गांव-गांव, पोलिंग बूथ और सेक्टर स्तर तक मजबूत करना होगा।
पार्टी को मजबूत करने के लिए जनाधार बढ़ाने के साथ-साथ आर्थिक सहयोग पर भी विशेष फोकस रहेगा।
आगामी चुनाव के लिए केवल मजबूत, टिकाऊ और जन-उपयोगी उम्मीदवारों को ही टिकट दिया जाएगा।
आपको बता दें जो पदाधिकारी इस महत्वपूर्ण बैठक में शामिल नहीं हुए, वे सीधे मायावती के रडार पर हैं। सूत्रों के मुताबिक, काम न करने वाले और बैठक से गायब रहने वाले नेताओं पर बसपा बहुत जल्द बड़ी कार्रवाई कर सकती है। देखा जाए तो लखनऊ की इस मैराथन बैठक के बाद बसपा के कार्यकर्ताओं में नया खून दौड़ गया है। पदाधिकारियों ने साफ कर दिया है कि अब वे घर बैठने वाले नहीं हैं, बल्कि गांव-गांव जाकर लोगों को यह समझाएंगे कि उनका वोट ही उनका सबसे बड़ा अधिकार और हथियार है।
मायावती ने साफ संदेश दे दिया है कि अपने वोट की सुरक्षा अपनी इज्जत-आबरू, जान-माल और मजहब की तरह करनी होगी। 2027 का महासंग्राम भले ही अभी दूर दिखाई दे रहा हो, लेकिन मायावती ने हाथी की चाल तेज करके यह साफ कर दिया है कि वो उत्तर प्रदेश के दंगल को एकतरफा नहीं होने देंगी। अब देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या मायावती का यह मिशन 2027 अखिलेश यादव के समीकरणों को बिगाड़ पाएगा और क्या आयरन लेडी पांचवीं बार यूपी के सिंहासन पर बैठकर नया इतिहास रच पाएंगी? सियासत की इस बिसात पर मोहरे सज चुके हैं, और बसपा की इस हुंकार ने साफ कर दिया है कि यूपी का अगला चुनाव बेहद रोमांचक होने वाला है!

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