आकाश आनंद की BSP से छुट्टी! मायावती के फैसले से मचा हड़कंप

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले एक ऐसा भूचाल आ गया है, जिसने बहुजन समाज पार्टी के पूरे सियासी समीकरण को हिलाकर रख दिया है! कभी बहुजन आंदोलन के भावी उत्तराधिकारी और 'यूथ आइकन' माने जाने वाले आकाश आनंद को उनकी बुआ और बसपा सुप्रीमो मायावती ने पार्टी से पूरी तरह मुक्त कर दिया है। जी हां 3 सितंबर को राष्ट्रीय संयोजक के पद से हटाए जाने के बाद अब मायावती ने साफ लहजे में कह दिया है कि "अगर आकाश पार्टी से स्वतंत्र रहना चाहते हैं, तो वो पूरी तरह आजाद हैं!" यानी अब आकाश आनंद का बसपा से रिश्ता पूरी तरह खत्म हो गया है। ससुर अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास के ड्रामे से लेकर आकाश के एक 'रीपोस्ट' न करने की गलती ने बीएसपी के अंदर ऐसा सियासी ड्रामा खड़ा कर दिया है, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। आइए जानते हैं मायावती के इस सख्त फैसले और बसपा के अंदरूनी कलह की पूरी इनसाइड स्टोरी!

दरअसल, इस पूरे सियासी ड्रामे की शुरुआत आकाश आनंद के ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ की गतिविधियों से हुई। अशोक सिद्धार्थ को पार्टी-विरोधी गतिविधियों के आरोप में 2 अगस्त को ही बसपा से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। इसके बाद से ही मायावती और उनके परिवार के बीच तनातनी चल रही थी। बुधवार को मायावती ने शर्त रखी थी कि अगर अशोक सिद्धार्थ राजनीति से संन्यास ले लें, तभी आकाश आनंद के भविष्य पर विचार किया जा सकता है। इसके बाद आज गुरुवार 10 सितंबर को अशोक सिद्धार्थ ने भारी-भरकम भावुक पोस्ट लिखकर राजनीति और सामाजिक जीवन से संन्यास का ऐलान कर दिया। उन्होंने लिखा कि "मायावती के लिए जान देना भी फख्र की बात होगी।" लेकिन मायावती ने इसे 'देर आए दुरुस्त आए' बताते हुए कहा कि अगर सिद्धार्थ को दामाद की चिंता होती, तो यह फैसला बहुत पहले ले लेते। आपको बता दें मायावती ने सबसे बड़ा मुद्दा आकाश आनंद के सोशल मीडिया व्यवहार को बनाया। 

उन्होंने कहा कि आकाश पहले हमेशा उनके हर एक्स पोस्ट को रीपोस्ट करते थे, लेकिन जब मायावती ने अशोक सिद्धार्थ को लेकर पोस्ट की, तो आकाश ने उसे रीपोस्ट नहीं किया। मायावती ने दोटूक सवाल उठाया कि आकाश का यह कदम साबित करता है कि वे बहुजन आंदोलन से ज्यादा पारिवारिक रिश्तों को तरजीह दे रहे हैं। जो व्यक्ति 'डबल माइंड' के साथ काम करेगा, वो पार्टी का भला कभी नहीं कर सकता। यानी मायावती का निशाना सिर्फ आकाश आनंद पर नहीं था...बल्कि उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ की भूमिका को लेकर भी मायावती ने अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की।

इसके बाद मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह मुक्त कर दिया। मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबी पोस्ट के जरिए अपने फैसले की जानकारी दी।

मायावती ने कहा कि 3 सितंबर 2026 को जिस तरह आकाश आनंद को पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक जैसे बेहद अहम पद की सभी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से मुक्त किया गया था, उसी तरह अब उन्हें पार्टी में भी पूरी तरह स्वतंत्र कर दिया गया है।

आपको बता दें कि अशोक सिद्धार्थ को इससे पहले 2 अगस्त को ही बसपा से बाहर किया जा चुका था। उन पर बार-बार अनुशासनहीनता, पार्टी विरोधी रुख अपनाने और पार्टी की जिम्मेदारियों को ठीक तरीके से नहीं निभाने के आरोप लगाए गए थे। इसके बाद आकाश आनंद को भी 3 सितंबर को राष्ट्रीय संयोजक पद की सभी अहम जिम्मेदारियों से हटा दिया गया। और अब 10 सितंबर को मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी से भी पूरी तरह मुक्त कर दिया। यानी कुछ ही समय के अंदर बसपा में परिवार से जुड़े दो बड़े चेहरों को लेकर मायावती ने बड़ा फैसला लिया है। वहीं आकाश आनंद को पार्टी से बाहर किए जाने के बाद उनके छोटे भाई और बसपा नेता ईशान आनंद ने अपनी बुआ के फैसले का समर्थन करते हुए सोशल मीडिया पर बड़ा बयान दिया। ईशान आनंद ने एक्स पर लिखा कि...

बहुजन आंदोलन किसी व्यक्ति या परिवार से नहीं, बल्कि त्याग, संघर्ष और विचारधारा से आगे बढ़ता है। निजी और पारिवारिक स्वार्थ से ऊपर उठकर संगठन और मिशन के हित को सर्वोच्च रखना ही बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर और मान्यवर कांशीराम जी के सपनों को साकार करने का रास्ता है।

ईशान आनंद ने इसके साथ 2027 में बहुमत की सरकार बनाने के लक्ष्य को सर्वोपरि बताया। यानी परिवार के भीतर से आई यह प्रतिक्रिया भी कहीं न कहीं मायावती के उस संदेश को मजबूत करती नजर आ रही है जिसमें उन्होंने पार्टी और बहुजन आंदोलन को व्यक्तिगत रिश्तों से ऊपर रखने की बात कही है। अब मायावती ने अपना फोकस सीधे 2027 के विधानसभा चुनाव पर कर दिया है। बसपा सुप्रीमो ने पार्टी कार्यकर्ताओं से विरोधियों के तमाम राजनीतिक हथकंडों का मजबूती से मुकाबला करने की अपील की है। मायावती ने कार्यकर्ताओं को 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' के सिद्धांत पर आगे बढ़ने और उत्तर प्रदेश में 2027 में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ पूरी ताकत से जुटने को कहा है। यानी एक तरफ परिवार और संगठन के बीच खींचतान खुलकर सामने आ गई है... तो दूसरी तरफ मायावती ने साफ कर दिया है कि अब उनकी नजर सीधे 2027 की चुनावी लड़ाई पर है।

कुल मिलाकर देखा जाए तो उत्तर प्रदेश की राजनीति में मायावती का यह फैसला यह साबित करता है कि जब बात बहुजन आंदोलन और पार्टी के कमान की आती है, तो 'बहन जी' के लिए पारिवारिक रिश्ते कोई मायने नहीं रखते। एक तरफ जहां अशोक सिद्धार्थ का संन्यास और आकाश आनंद की पार्टी से छुट्टी बसपा के युवा कैडर के लिए बड़ा झटका है, तो वहीं दूसरी तरफ मायावती ने यह कड़ा संदेश दे दिया है कि पार्टी में अनुशासनहीनता और दोहरी निष्ठा के लिए कोई जगह नहीं है। अब देखना यह होगा कि अपने उत्तराधिकारी को ही बाहर का रास्ता दिखाने के बाद मायावती 2027 के रण में बसपा को दोबारा किस तरह मजबूत खड़ा कर पाती हैं! 

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