कांग्रेस और सपा के दोहरे चरित्र पर भड़कीं बसपा सुप्रीमो, खोल दी पोल
संसद के भीतर महिला आरक्षण पर जो संग्राम चल रहा था, उसे मायावती ने एक नया मोड़ दे दिया है। मायावती ने सोशल मीडिया पर आकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के दोहरे चरित्र की धज्जियाँ उड़ा दी हैं। जी हां उन्होंने साफ लहजे में कहा कि ये दोनों पार्टियां सिर्फ वोट के लिए रंग बदलना जानती हैं। जब अधिकार देने की बारी आती है, तो ये कुंडली मारकर बैठ जाती हैं और जब चुनाव आते हैं, तो पिछड़ों-दलितों की हमदर्द बन जाती हैं।
मायावती ने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि आज जो पार्टी SC, ST और OBC के लिए बड़ी-बड़ी बातें कर रही है, वही कांग्रेस है जिसने दशकों तक राज किया लेकिन कभी इन वर्गों का कोटा पूरा नहीं होने दिया। उन्होंने याद दिलाया कि OBC समाज को 27 प्रतिशत आरक्षण देने वाली मंडल कमीशन की रिपोर्ट को कांग्रेस ने ठंडे बस्ते में डाल रखा था। यह BSP के संघर्षों का ही नतीजा था कि पूर्व प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह की सरकार को इसे लागू करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
वहीं समाजवादी पार्टी के मुस्लिम कार्ड पर चोट करते हुए मायावती ने 1994 का वो किस्सा याद दिलाया, जिसे सुनकर सपा खेमे में खलबली मच गई है। उन्होंने बताया कि पिछड़े मुस्लिमों को OBC का लाभ देने के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग ने जुलाई 1994 में रिपोर्ट दी थी, लेकिन उस वक्त की सपा सरकार ने उसे रद्दी की टोकरी में डाल दिया। बाद में जब 3 जून 1995 को मायावती मुख्यमंत्री बनीं, तो उन्होंने तुरंत इसे लागू कर पिछड़ों को उनका हक दिलाया।
इतना ही नहीं महिला आरक्षण के लागू होने में देरी और जनगणना-परिसीमन के पेच पर मायावती ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि बीजेपी जो कर रही है, अगर आज कांग्रेस सत्ता में होती तो वो भी बिल्कुल यही करती। उन्होंने 2011 की जनगणना के आधार पर ही जल्द से जल्द आरक्षण लागू करने की मांग का समर्थन किया। मायावती ने साफ कहा कि एससी, एसटी, ओबीसी और मुस्लिम समाज के हित में कोई भी बड़ी पार्टी गंभीर नहीं है। मायावती ने अपने समाज को एक कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि फिलहाल सरकार जो कुछ भी दे रही है, उसे प्रसाद समझकर स्वीकार कर लें, क्योंकि भविष्य में जब BSP मजबूत होगी, तब अपने हितों की पूरी रक्षा की जाएगी। उन्होंने दलितों और पिछड़ों से अपील की कि इन छलावा करने वाली पार्टियों के झांसे में न आएं और खुद को इतना मजबूत बनाएं कि किसी के सामने हाथ न फैलाना पड़े।
जाहिर है महिला आरक्षण पर मायावती ने विपक्ष की एकता की पोल खोलकर रख दी है। मायावती ने यह साफ कर दिया है कि भले ही वह संसद की बहस में सीधे तौर पर नहीं हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश और देश की दलित-पिछड़ा राजनीति की धुरी आज भी उन्हीं के इर्द-गिर्द घूमती है। ऐसे में अब देखना यह होगा कि मायावती के इस गिरगिट वाले वार का अखिलेश यादव और कांग्रेस क्या जवाब देते हैं? क्या 2029 से पहले होने वाला यह आरक्षण बिल वास्तव में महिलाओं की तकदीर बदलेगा या फिर राजनीतिक दलों के लिए यह सिर्फ एक वोट बैंक का जरिया बनकर रह जाएगा?

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