चिरमिरी में श्रीराम कथा का तीसरा दिन रहा भक्तिमय, जगद्गुरु रामभद्राचार्य के प्रवचनों से गूंजा कथा पंडाल

चिरमिरी - गोदरीपारा स्थित लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में आयोजित भव्य श्रीराम कथा महोत्सव के तीसरे दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा पंडाल में हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति से पूरा वातावरण राममय हो गया। जय श्रीराम के उद्घोष, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों से श्रद्धालु भावविभोर नजर आए।

कथा व्यास पद्मविभूषित जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने अपने ओजस्वी एवं भावपूर्ण प्रवचनों में भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन, धर्म पालन और मर्यादा के महत्व का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि रामकथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मानव जीवन को सही दिशा देने वाली प्रेरणा है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपने जीवन में प्रेम, सेवा, त्याग और संस्कारों को अपनाने का आह्वान किया।

माता कौशल्या और श्रीराम के बाल रूप का भावपूर्ण प्रसंग

जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने भगवान श्रीराम के जन्म और बाल्यकाल से जुड़े प्रसंगों का अत्यंत भावुक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जब भगवान श्रीराम माता कौशल्या के समक्ष धनुष-बाण धारण किए किशोर अवस्था में प्रकट हुए, तब माता कौशल्या ने कहा कि यदि वे इसी रूप में रहेंगे तो लोग उन्हें उनकी माता नहीं मानेंगे। इस पर श्रीराम ने कहा कि वे रावण वध के उद्देश्य से अवतरित हुए हैं। किंतु माता कौशल्या ने इच्छा व्यक्त की कि वह उन्हें एक बालक की तरह गोद में खिलाकर बड़ा होते देखना चाहती हैं। इसके बाद श्रीराम बाल रूप धारण कर सामान्य बालक की तरह आंगन में किलकारियां भरने लगे और अयोध्या में बधाइयों का तांता लग गया।

उन्होंने माता कौशल्या के अपहरण से जुड़ा रोचक प्रसंग भी सुनाया। कथा के अनुसार रावण ने भगवान महादेव की पूजा करने जा रही कौशल्या का अपहरण कर उन्हें एक बक्से में बंद कर समुद्र में बहा दिया था। बाद में वह बक्सा सरयू नदी के माध्यम से अयोध्या पहुंचा, जहां अयोध्यावासियों ने उसे राजा दशरथ को सौंपा। बक्सा खोलने पर उसमें से कौशल्या निकलीं। जगद्गुरु ने बताया कि कौशल्या दंडकारण्य के राजा भानुप्रताप और माता संध्या की पुत्री थीं। राजा दशरथ ने उन्हें राजकीय सम्मान के साथ उनके परिवार तक पहुंचाया और आगे चलकर दोनों का विवाह हुआ।

श्रवण धर्म सबसे श्रेष्ठ धर्म

कथा के दौरान जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि “श्रवण सर्वधर्म मान्य तपोधाना” अर्थात श्रवण धर्म सबसे श्रेष्ठ धर्म है। उन्होंने छत्तीसगढ़ को भगवान श्रीराम का ननिहाल बताते हुए कहा कि पूरे प्रदेश को राममय बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भांचा को विशेष सम्मान दिया जाता है और यहां मामा द्वारा भांचा के चरण स्पर्श करने की परंपरा इस भूमि की महान संस्कृति को दर्शाती है।

नारी शक्ति और सनातन संस्कृति पर विशेष उद्बोधन

जगद्गुरु ने अपने प्रवचन में नारी शक्ति का विशेष महत्व बताते हुए कहा कि भगवान श्रीराम ने नारी को “नौ प्रकार के ब्रह्म की महतारी” बताया है। उन्होंने भगवान श्रीराम द्वारा माता कौशल्या को मां के रूप में चुनने के पीछे के आध्यात्मिक महत्व का भी वर्णन किया। उन्होंने कहा कि सृष्टि की प्रथम महिला शतरूपा अपने सातवें रूप में छत्तीसगढ़ में प्रकट हुई थीं।

श्रीराम के बाल चरित्र और ताड़का वध प्रसंग का वर्णन

तीसरे दिन की कथा में भगवान श्रीराम के बाल चरित्र, गुरु वशिष्ठ एवं विश्वामित्र के सानिध्य तथा ताड़का वध प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया गया। जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि भगवान श्रीराम ने बचपन से ही धर्म और सत्य के मार्ग पर चलकर समाज को आदर्श जीवन का संदेश दिया। गुरु की आज्ञा का पालन, समाज की रक्षा और धर्म के लिए संघर्ष आज भी प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

उन्होंने बताया कि श्रीराम का बचपन जितना सरल था, उतना ही अद्भुत भी था। बाल्यकाल में ही उन्होंने अपने साहस, ईमानदारी और सद्गुणों से सभी को प्रभावित किया। कथा के माध्यम से उन्होंने यह संदेश दिया कि भय और अन्याय का सामना साहस और धर्म के मार्ग पर चलकर ही किया जा सकता है।

भक्ति में डूबे श्रद्धालु, आरती-प्रसाद में उमड़ी भीड़

कार्यक्रम स्थल पर दिनभर भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का दौर चलता रहा। आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, बैठक एवं प्रसाद वितरण की विशेष व्यवस्था की गई थी। कथा के समापन पर महाआरती एवं प्रसाद वितरण किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, कांति जायसवाल, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, भाजपा प्रदेश संगठनमंत्री पवन साय, भाजपा  जिला अध्यक्ष चंपा देवी पावले, राम लखन पैकरा, वीरेन्द्र सिंह राणा, सुदर्शन अग्रवाल, प्रकाश तिवारी, संतोष कुमार सिंह सहित क्षेत्र के अनेक जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं विभिन्न धार्मिक संगठनों के सदस्य उपस्थित रहे।

रिपोर्टर - मुस्ताक कुरैशी 

 

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