PM मोदी का Video हटाया...अब Meta पर बड़ा संकट!

बिग-टेक दिग्गज कंपनी मेटा और केंद्र सरकार के बीच अब तक की सबसे बड़ी और आर-पार की जंग छिड़ चुकी है! 140 करोड़ भारतीयों के प्रतिनिधि और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो फेसबुक से हटाने की हिमाकत मेटा को बेहद भारी पड़ने वाली है! इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी की संसदीय समिति ने सीधे मेटा के सर्वेसर्वा मार्क जकरबर्ग को 3 दिन का अल्टीमेटम थमा दिया है कि या तो बिना शर्त माफी मांगो और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करो, वरना सीधे FIR दर्ज होगी और जेल की हवा खानी पड़ेगी! 

इसी बीच भारत सरकार और मेटा की ग्लोबल टीम के बीच दिल्ली में एक महा-बैठक होने जा रही है. लेकिन सवाल यह है कि क्या मेटा का कानूनी कवच 'सेफ हार्बर' अब खत्म होने वाला है? दरअसल, पूरा विवाद 23 जुलाई से शुरू होता है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के युवाओं के नाम अपना पहला सेल्फी वीडियो जारी किया था. कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में हो रहे छात्र प्रदर्शनों और पेपर लीक के संवेदनशील मुद्दे पर पीएम ने युवाओं को सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया था. लेकिन 23 जुलाई की रात 12:30 बजे अचानक यह वीडियो फेसबुक से गायब हो जाता है! सुबह 5:00 बजे तक यानि पूरे साढ़े चार घंटे यह वीडियो प्लेटफॉर्म से हटा रहा. 

जब विवाद बढ़ा, तो मेटा ने इसे वापस रिस्टोर किया और सफाई दी कि यह एक एआई टूल की तकनीकी गड़बड़ी थी. लेकिन भारत सरकार ने मेटा के इस ढुलमुल जवाब को सिरे से खारिज कर दिया और बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली दूरसंचार और आईटी की संसदीय समिति ने इस मामले में बेहद कड़ा रुख अपनाया है. समिति ने साफ शब्दों में कहा है कि मार्क जकरबर्ग को पीएम मोदी का वीडियो हटाए जाने पर 3 दिनों के भीतर लिखित और बिना शर्त माफी मांगनी होगी. जिन अधिकारियों या सिस्टम की वजह से यह वीडियो हटा, उन पर सख्त कार्रवाई की रिपोर्ट देनी होगी. अगर मेटा ने शर्तें नहीं मानीं, तो IT एक्ट के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा खत्म कर दी जाएगी. इसका सीधा मतलब यह है कि मेटा अब सिर्फ एक प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि पब्लिशर माना जाएगा और इसके अधिकारियों पर सीधे भारत में आपराधिक केस दर्ज किए जा सकेंगे! 

इतना ही नहीं इंस्टाग्राम पर पेड एड्स के जरिए बाल यौन शोषण सामग्री के प्रचार-प्रसार को लेकर सरकार बेहद खफा है. समिति ने निर्देश दिया है कि बच्चों के यौन शोषण और महिलाओं से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री को 3 दिन के भीतर सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से हटाया जाए. डीपफेक और फर्जी एआई वीडियो के जरिए देश में भ्रम फैलाने की कोशिशों पर नकेल कसी जाए. 

आपको बता दें सरकारी दबाव और कानूनी शिकंजे के बाद मेटा अब पूरी तरह बैकफुट पर नजर आ रहा है. सूत्रों के मुताबिक मेटा ने पीएम मोदी के वीडियो के हटने पर गहरा खेद व्यक्त किया है और वह औपचारिक लिखित माफी मांगने को तैयार है. मेटा ने सरकार को आश्वासन दिया है कि आगे से किसी भी VIP या सेलिब्रिटी की पोस्ट को बिना किसी वरिष्ठ इंसानी अधिकारी की मंजूरी के एआई टूल द्वारा नहीं हटाया जाएगा. 

कुल मिलाकर भारत सरकार ने यह साफ कर दिया है कि 140 करोड़ भारतीयों के लोकतंत्र और देश की सुरक्षा के साथ कोई भी विदेशी कंपनी खिलवाड़ नहीं कर सकती. अगर एआई के नाम पर या अपनी नीतियों के नाम पर बिग-टेक कंपनियां मनमानी करेंगी, तो उनका 'सेफ हार्बर' कवच छीनकर उन्हें सीधे भारतीय अदालतों के चक्कर काटने पर मजबूर कर दिया जाएगा!

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