मिल्कीपुर उपचुनाव में पासी vs पासी का होगा मुकाबला

उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले की मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव हो रहा है। इस उपचुनाव का महत्व इसलिए है क्योंकि यह विधानसभा सीट खाली होने के कारण चुनावी प्रक्रिया में है। यह सीट मिल्कीपुर से सपा विधायक रहे अवधेश प्रसाद के ही अयोध्या से सांसद चुने जाने के बाद यह सीट खाली हुई है. इस उपचुनाव में मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (BJP) और समाजवादी पार्टी (SP) के बीच देखा जा रहा है। खास बात यह है कि यहां पर दो उम्मीदवार दोनों ही पासी समुदाय से हो सकते हैं, जो स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के हिसाब से अहम है। मिल्कीपुर क्षेत्र में पासी समुदाय का एक बड़ा प्रभाव है, और ऐसे में इस उपचुनाव में सामाजिक और जातीय समीकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यह उपचुनाव राज्य की राजनीति के लिए भी अहम है, क्योंकि यह बीजेपी और समाजवादी पार्टी दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण मुकाबला साबित हो सकता है।

बता दें अयोध्या की मिल्कीपुर सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए बीजेपी ने चंद्रभान पासवान को मैदान में उतारा है. समाजवादी पार्टी पहले ही अयोध्या के सांसद अवधेश प्रसाद के बेटे अजीत प्रसाद को यहां से प्रत्याशी घोषित कर चुकी है. अवधेश प्रसाद की तरह चंद्रभान पासवान पासी समाज से आते हैं. चंद्रभान पासवान भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक नेता हैं। वह बिहार राज्य से संबंधित एक प्रमुख नेता रहे हैं और पार्टी के टिकट पर चुनावों में हिस्सा ले चुके हैं। चंद्रभान पासवान का संबंध पासवान समुदाय से है, जो बिहार और उत्तर भारत में एक महत्वपूर्ण ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) समुदाय के रूप में पहचान रखते हैं। उनकी राजनीतिक यात्रा और संगठन में सक्रियता बीजेपी के विभिन्न अभियानों और कार्यों से जुड़ी हुई रही है, हालांकि उनकी पहचान राज्य के चुनावी मैदान में एक प्रमुख बीजेपी नेता के रूप में बनी रही है।

इस तरह के चुनावों में जातीय और सामाजिक समीकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, और यही कारण है कि "पासी vs पासी" का संघर्ष चर्चा का विषय बना हुआ है।

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