इस फसल की खेती से किसान कमाऐंगे डबल मुनाफा...

सफेद मूसली की खेती किसानों के लिए एक बेहतरीन कैश क्रॉप के रूप में उभर रही है। आयुर्वेदिक दवाओं और हेल्थ प्रोडक्ट्स में इसकी बढ़ती मांग के कारण यह पारंपरिक फसलों की तुलना में कम समय में अधिक मुनाफा देने वाली फसल मानी जा रही है। इसकी खेती में लागत कम आती है, देखभाल आसान होती है और फार्मा व आयुर्वेदिक कंपनियां सीधे किसानों से खरीदारी करती हैं, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिलते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार सही तकनीक अपनाकर किसान इससे लाखों रुपये तक की कमाई कर सकते हैं।
 
खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी और तैयारी
 
मुरादाबाद के कृषि वैज्ञानिक डॉ. दीपक मेहंदीरत्ता के अनुसार सफेद मूसली एक कंद वाली फसल है, जिसकी खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। खेत में पानी का जमाव नहीं होना चाहिए और जल निकासी की अच्छी व्यवस्था जरूरी है। एक एकड़ खेती के लिए लगभग 18 से 20 कुंटल कंदों की आवश्यकता होती है। बुवाई से पहले कंदों का कार्बेन्डाजिम दवा से उपचार करना जरूरी होता है ताकि फफूंदी का खतरा कम हो सके। किसानों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि कंद टूटे नहीं, क्योंकि टूटे कंदों में अंकुरण सही तरीके से नहीं होता।
 
कम समय में तैयार होकर देती है बेहतर उत्पादन
 
विशेषज्ञों के मुताबिक सफेद मूसली की खेती मेड़ या क्यारियों दोनों तरीकों से की जा सकती है। बुवाई के बाद पौधे धीरे-धीरे विकसित होते हैं और सितंबर तक इसके पत्ते सूखने लगते हैं, जबकि जमीन के नीचे कंद बढ़ते रहते हैं। इस फसल की कटाई आमतौर पर फरवरी महीने में की जाती है। कटाई के बाद किसान बाजार की मांग और सुविधा के अनुसार कंदों की बिक्री कर सकते हैं।
 
बाजार में लगातार बढ़ रही मांग
 
सफेद मूसली की मांग आयुर्वेदिक और फार्मा कंपनियों में लगातार बनी हुई है, क्योंकि इसका उपयोग कई औषधीय उत्पादों में किया जाता है। यही कारण है कि किसान अब इसे लाभकारी कैश क्रॉप के रूप में तेजी से अपना रहे हैं। कम लागत, कम समय और अधिक मुनाफे के कारण सफेद मूसली की खेती ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की आय बढ़ाने का एक मजबूत विकल्प बनती जा रही है।

Leave a Reply



comments

Loading.....
  • No Previous Comments found.