‘सेक्रेटरी के आंकड़े नहीं, बताइए आपने क्या किया?’ PM मोदी का मंत्रियों से सीधा सवाल
दिल्ली के सियासी गलियारों में इस वक्त जबरदस्त हलचल मची हुई है! वजह है...प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वो अचानक लिया गया फैसला, जिसने कई केंद्रीय मंत्रियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। जी हां मोदी कैबिनेट में जल्द ही बड़े फेरबदल की अटकलों के बीच, पीएम मोदी ने देर रात तक चली 3 घंटे से ज्यादा लंबी बैठक में करीब 20 राज्य और स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्रियों की क्लास लगा दी। इस क्लास की सबसे बड़ी और खास बात जानते हैं क्या थी? कमरे में न तो कोई सीनियर कैबिनेट मंत्री मौजूद था और न ही कोई बड़ा IAS अफसर या सेक्रेटरी! यानी कोई बीच का पर्दा नहीं, सीधे पीएम और उनके मंत्री। जैसे ही कुछ मंत्रियों ने अफसरों की रटी-रटाई फाइलें और आंकड़े पेश करने की कोशिश की, पीएम ने सीधे टोक दिया कि "आंकड़े तो सेक्रेटरी भी दे देते हैं, मुझे यह बताइए कि आपने खुद क्या किया!" आइए जानते हैं पीएमओ के अंदर हुई इस बैठक की एक-एक इनसाइड स्टोरी...
आपको बता दें यह बैठक आम बैठकों से बिल्कुल जुदा थी। अक्सर जब पीएम मोदी समीक्षा बैठकें लेते हैं, तो मंत्रालयों के सचिव और आला अधिकारी साथ बैठे होते हैं। लेकिन इस बार पीएम मोदी ने नौकरशाहों को बाहर रखा और सीधे कृषि, शिक्षा, ग्रामीण विकास, सामाजिक न्याय, युवा और आदिवासी कल्याण जैसे अहम विभागों को संभाल रहे राज्यमंत्रियों से आमने-सामने बात की। वहीं जैसे ही मंत्रियों ने सचिवों के तैयार किए गए आंकड़ों के पन्ने पलटने शुरू किए, पीएम मोदी ने साफ लहजे में कह दिया कि सेक्रेटरी के दिए आंकड़े पढ़कर सुनाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने पूछा कि मंत्रियों की अपनी खुद की सोच क्या है? उन्होंने मंत्रालयों में अपने स्तर पर क्या नया किया और उनकी योजनाओं से जमीन पर कितने आम लोगों की जिंदगी बदली है? इतना ही नहीं बैठक के दौरान पीएम मोदी ने मंत्रियों के सामने 20 से ज्यादा तीखे सवाल दागे। पीएम का पूरा ध्यान इस बात पर था कि सरकार की योजनाएं कागजों से निकलकर सीधे जनता तक समय पर पहुंच रही हैं या नहीं। पीएम ने मंत्रियों से सीधे सवाल पूछे कि....
विकसित भारत 2047 के लिए आपके पास अपने मंत्रालय का क्या ठोस रोडमैप और विजन है?
अगले 5 सालों में आप क्या नया और बड़ा करने जा रहे हैं?
गरीब कल्याण, दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों और युवाओं के लिए आपने कौन-सी विशेष योजनाएं तैयार की हैं?
सोशल मीडिया पर आपका रिपोर्ट कार्ड क्या है?
छात्रों के आंदोलनों और मुद्दों पर आपने सोशल मीडिया में क्या और कैसे जवाब दिए?
आपके सोशल मीडिया पर कितने फॉलोअर्स हैं और आप सीधे जनता से कैसे संवाद कर रहे हैं?
वहीं सूत्रों के मुताबिक, बैठक में मंत्रियों को उनका सोशल मीडिया रिपोर्ट कार्ड भी थमाया गया। इसमें किसी भी मंत्री को रैंकिंग नहीं दी गई, जिसका सीधा संदेश यही था कि हर किसी को अपना प्रदर्शन सुधारने की जरूरत है। आपको बता दें अब इस बैठक के सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं। क्योंकि काफी समय से मोदी कैबिनेट में फेरबदल की अटकलें चल रही हैं। बीजेपी के कई मंत्रियों को संगठन में जिम्मेदारी मिलने और सहयोगी दलों को साधने के लिए माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल में जल्द नए चेहरों की एंट्री हो सकती है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या पीएम मोदी मंत्रियों का सिर्फ कामकाज नहीं...बल्कि अगली पारी के लिए उनका रिपोर्ट कार्ड भी तैयार कर रहे हैं? क्या अच्छा प्रदर्शन करने वालों को आगे मौका मिलेगा? क्या सुस्त मंत्रियों पर गाज गिर सकती है? हालांकि, इस बैठक का कोई आधिकारिक राजनीतिक औपचारिक ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन पीएम मोदी ने बिना कैबिनेट मंत्रियों की मौजूदगी के सीधे राज्यमंत्रियों से फीडबैक लेकर यह साफ कर दिया है कि केवल पद पर बने रहने से काम नहीं चलेगा। जो मंत्री परफॉर्म करेगा, वही टिकेगा। आने वाले हफ्तों में बाकी बचे मंत्रियों के अलग-अलग बैच के साथ भी ऐसी ही समीक्षा बैठकें होने की पूरी उम्मीद है।
देखा जाए तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस 'नो-नौकरशाही' बैठक ने पूरे सियासी तंत्र में एक कड़ा और साफ संदेश भेज दिया है कि कामकाज में ढिलाई, कागजी आंकड़ेबाजी और अफसरों की बैसाखी अब बिल्कुल नहीं चलेगी! 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को साधने के लिए हर मंत्री को अपना खुद का रिपोर्ट कार्ड बेहतर करना ही होगा। एक तरफ मंत्रिमंडल में बड़े फेरबदल की तलवार लटक रही है, तो दूसरी तरफ पीएम मोदी का यह सीधी जवाबदेही तय करने वाला अंदाज बता रहा है कि आने वाले दिनों में सरकार का पूरा फोकस ऑन-ग्राउंड परफॉर्मेंस और टाइम-बाउंड डिलीवरी पर रहने वाला है। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि इस क्लास के बाद कौन-से मंत्री अपनी रैंकिंग सुधार पाते हैं और किनकी छुट्टी होती है!
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