मोदी-योगी रणनीति, केशव का अखिलेश पर तंज, राहुल-तेजस्वी की जोड़ी...बिहार विधानसभा चुनाव का माहौल चरम पर
बिहार विधानसभा चुनाव का माहौल इस समय पूरे चरम पर है। पहले चरण की वोटिंग 6 नवंबर को होनी है, जबकि प्रचार अभियान 4 नवंबर की शाम तक चलेगा। इसको लेकर सभी राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। एनडीए और महागठबंधन दोनों ही गठबंधन अपने-अपने दांव चल चुके हैं।
मोदी-योगी पर भाजपा की रणनीति
भाजपा की चुनावी रणनीति एक बार फिर उत्तर प्रदेश से जुड़ती दिख रही है। बिहार में भाजपा का सबसे बड़ा चेहरा प्रधानमंत्री और वाराणसी से सांसद नरेंद्र मोदी हैं, जो पार्टी को बढ़त दिलाने के लिए लगातार सभाएं कर रहे हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी बड़े पैमाने पर प्रचार अभियान में लगाया गया है।
बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी और डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा भी चुनावी मैदान में सक्रिय हैं, लेकिन पार्टी की प्रचार रेखा में मोदी और योगी प्रमुख चेहरों के रूप में उभरे हैं। इसके साथ ही यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य भी संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। भाजपा की यूपी-केंद्रित रणनीति के बाद विपक्ष ने भी अपनी तैयारियों को धार देना शुरू कर दिया है।
अखिलेश और मायावती की एंट्री
अब समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बिहार चुनाव में एंट्री कर ली है। उन्होंने दरभंगा की जनसभा में भाजपा पर सीधा हमला बोला और महागठबंधन उम्मीदवारों के लिए समर्थन मांगा। अखिलेश ने कहा कि जनता के जोश से साफ है कि इस बार बिहार से भाजपा की विदाई तय है।
मीडिया से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का "इस्तेमाल" कर रही है और वक्त आने पर उन्हें हाशिए पर धकेल देगी। वहीं बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती भी बिहार में प्रचार अभियान की शुरुआत करने वाली हैं। विपक्षी दलों का लक्ष्य एनडीए को रोकते हुए महागठबंधन को जीत दिलाना है।
राहुल-तेजस्वी की जोड़ी पर महागठबंधन की उम्मीद
राजद, कांग्रेस और वाम दलों के गठबंधन में इस बार तेजस्वी यादव और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी प्रमुख चेहरों के रूप में सामने हैं। राहुल गांधी, जो लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं, लगातार तेजस्वी के साथ मिलकर प्रचार कर रहे हैं। महागठबंधन की कोशिश है कि मोदी और नीतीश की जोड़ी का मुकाबला राहुल-तेजस्वी की जोड़ी से किया जाए। बिहार का यह चुनाव विपक्षी एकता के लिए "लिटमस टेस्ट" माना जा रहा है, इसलिए सभी दल एकजुट होकर मैदान में उतरे हैं।
केशव प्रसाद मौर्य का अखिलेश पर वार
इसी बीच उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव पर व्यंग्य करते हुए कविता के रूप में तंज कसा। उन्होंने एक्स पर लिखा-
“यूपी की पार्टी, बिहार में प्रचार।
न उम्मीदवार, न जमीन, फिर भी अहंकार का यकीन।
जंगलराज वालों से ‘रिश्तेदारी’, ऐसी है इनकी यारी।
सीट जीरो, बनने चले हीरो! बिना चुनाव के स्टार प्रचारक”
उन्होंने अखिलेश पर तंज कसते हुए कहा कि यह बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना जैसी स्थिति है। मौर्य ने आगे कहा कि यूपी की साइकिल अब बिहार में मोटरसाइकिल बनने चली है, लेकिन पंचर साइकिल और बुझी लालटेन लेकर ये खाली हाथ लौटेंगे। राजद पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि सपा अध्यक्ष परिवार डेवलपमेंट एजेंसी के दफ्तर पहुंचे हैं, जहां टिकट से ज्यादा तिकड़म का खेल चलता है, लेकिन इस बार यह एजेंसी पूरी तरह फेल हो जाएगी।
संक्षेप में, बिहार का चुनावी रण सिर्फ राज्य की राजनीति नहीं, बल्कि राष्ट्रीय रणनीति का भी केंद्र बन चुका है, जहां एनडीए अपनी सत्ता बचाने में जुटा है और महागठबंधन विपक्षी एकता की परीक्षा दे रहा है।

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