शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर पहली बार राज्य स्तरीय बौद्ध धम्म महोत्सव

मोहलामानपुर - बौद्ध विरासत संरक्षण संघ,जिला बालोद के तत्वावधान में शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर पहली बार राज्य स्तरीय बौद्ध धम्म महोत्सव का आयोजन धम्मभूमि गौरैय्या (चौरेल) जिला बालोद की पावन भूमि में संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में धम्मोपदेश देने के लिए धम्मालैंड, दी रांयल मोना स्टिक स्कूल, बिरबिरा (सिरपुर) जिला महासमुन्द (छ.ग.) के फाउंडर प्रेसिडेंट पूज्य भंते श्रद्धेय डा. शील रत्न बोधि जी अपने भिक्खु संघ के साथ उपस्थित हुए। ग्राम चौरेल पुरातात्विक धरोहर के रूप में जिला व आसपास के क्षेत्र में प्रसिद्ध है। पुरातात्विक दृष्टि से गौरैया का अपना एक अलग ही महत्व है। तांदुला नदी के संगम स्थल पर यह ऐतिहासिक धरोहर विद्यमान है। कालांतर में चौरस राजाओं का राज्य वावनगढ़ के सानिध्य में बौद्ध विरासत फलती-फूलती रही। वीरान स्थल होने के कारण यहां बौद्ध भिक्षुओं का डेरा था, जिन्होंने तथागत बुद्ध की प्रतिमा स्थापित की थी। समीप में एक बावली है जिसकी सफाई के दौरान अनेको स्तंभ, विखंडित मूर्तियां के अवशेष प्राप्त हुए जो दर्शनीय हैं। यहां खुदाई से प्राप्त छोटे बुद्ध प्रतिमा के दर्शन अनायास ही हो जाते हैं। यहां हमारे पूर्वजों ने एक बुद्ध विहार का निर्माण करके खुदाई से प्राप्त बुद्ध प्रतिमाओं को स्थापित किया था। परिसर में सभी धर्मावलंबियों के देवी देवताओं के मंदिर स्थापित हैं।ग्राम चौरेल वासियों ने धम्म चक्र अंकित प्राचीन स्तंभ को एक चौंक में स्थापित कर बुद्ध देव चौंक की स्थापना भी की है।

कार्यक्रम के प्रथम चरण में पूज्य भंते शीलरत्न बोधि जी एवं भिक्खू संघ की अगुवाई में रैली के माध्यम से नगर भ्रमण करते हुए बुद्धदेव चौंक जाकर वंदना की। रैली आयोजित स्थल पर वापस आने के बाद भिक्खु संघ को मंचस्थ किया गया तथा पूज्य भंते जी के चरणों में पुष्प अर्पित करते हुए धमोपदेश की याचना की। पूज्य बनते जी ने सर्वप्रथम त्रिशरण पंचशील ग्रहण करवाया तत्पश्चात धम्मदेशना के माध्यम से दुख मुक्ति का मार्ग चार आर्य सत्य, आर्य अष्टांगिक मार्ग का विस्तृत वर्णन करते हुए उसके महत्व को बताएं। साथ ही दान पारमिता के रूप में चिवरदान के महत्व को समझाया। अंत में सभी प्राणियों के सुख व कल्याण के लिए मंगल मैत्री कराई जिससे गौरैया धाम का परिसर धम्ममय हो गया।। धम्म देशना के पश्चात चिवरदान दिया गया। कार्यक्रम के द्वितीय चरण में मुख्य अतिथि गुंडरदेही विधानसभा क्षेत्र के यशस्वी विधायक आदरणीय कुंवर सिंह निषाद जी थे। विशिष्ट अतिथियों में भारतीय बौद्ध महासभा के ट्रस्टी आदरणीय एस.आर. कांडे जी, भारतीय बौद्ध महासभा की उपाध्यक्ष पालनहार मेश्राम एवं प्रज्ञा कांडे, कानूनी सलाहकार आदरणीय संजय बेंद्रे जी, भारतीय बौद्ध महासभा के जिला अध्यक्षों में दिलीप मेश्राम, वर्षा बागडे, दीपक वैदे, पूर्व जिला अध्यक्ष तुलसीराम खोबरागड़े वामन वानखेड़े, आदरणीया पूजा यादव जी सरपंच ग्राम चौरेल, अपर कलेक्टर आदरणीय सुरेंद्र प्रसाद वैद्य जी, नगर पंचायत चौकी के पूर्व उपाध्यक्ष रितेश मेश्राम जी तथा बालोद नगर के शिशु रोग विशेषज्ञ आदरणीय ए.व्ही. महेश्वर जी आदि उपस्थित थे। मंचस्थ समस्त अतिथियों का फूल मालाओं एवं गुलदस्ता भेंट कर स्वागत सत्कार किया गया। राष्ट्रीय ट्रस्टी कांडे जी ने पूर्व तहसील समिति बालोद के छगनलाल महेश्वर, रामेश्वर दहीवेले, नत्थूराम महेश्वरी, झाड़ू राम सुखदेव, देवलाल बोरकर आदि अनेकों कर्मठ एवं जुझारू पदाधिकारियों को नमन करते हुए उनके कार्यों की प्रशंसा की। मंचस्थ समस्त अतिथियों को अपने-अपने उद्बोधन देकर आयोजित कार्यक्रम की सहारना की तथा समिति को धन्यवाद दिया। मुख्य अतिथि ने अपने उद्बोधन में कहा कि बाबासाहेब अंबेडकर जी ने हमें समता, स्वतंत्रता, बंधुता और न्याय से परिपूर्ण एक ऐसा संविधान दिया जिसकी बदौलत आज मैं विधायक बन पाया हूं, मैं हमेशा बाबा साहेब अम्बेडकर का ऋणी रहूंगा और उसके बताए हुए मार्ग का अनुसरण करता रहूंगा। उन्होंने अपने विद्यार्थी जीवन की एक महत्वपूर्ण घटना का जिक्र करते हुए उपस्थित जनों को जानकारी दी कि वर्षों पूर्व अर्जुंदा में भीम ज्योति आई थी उस भीम ज्योति की अगुवाई मैंने की थी तथा पूरे अर्जुंदा नगर में बौद्ध समुदाय के साथ नगर भ्रमण किया था। उन्होंने कहा कि मैं भी बाबा साहेब का एक सिपाही हूं, मुझे जब भी बौद्ध समुदाय याद करेंगे मैं सेवा में उपस्थित रहूंगा। उद्बोधन के पश्चात समस्त अतिथियों को मोमेंटो देकर उनका सम्मान किया गया। साथ ही पूर्व तहसील समिति के कर्मठ कार्यकर्ताओं को जो आज हमारे बीच नहीं है, उनको विनम्र श्रद्धांजलि देते हुए उनके नाम से उनके वारिशों को मोमेंटो, पुष्पहार एवं गुलदस्ता भेंट कर स्वागत सत्कार करते हुए सम्मानित किया गया। साथ ही बालोद जिला के समस्त परीक्षेत्रीय पदाधिकारी तथा अन्य कर्मठ कार्यकर्ताओं को भी मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया, जिन्होंने निस्वार्थ भावनाओं के साथ इस कार्यक्रम को सफलता प्रदान करने में अपनी अहम भूमिका निभाई। इस कार्यक्रम में अम्बेडकर वादी पुनेश्वर देवांगन जी एवं घनश्याम रात्रे जी का भी तथागत बुद्ध के उपदेश नामक पुस्तक भेंट करके उनका स्वागत किया गया। इस कार्यक्रम में आयुष्मान नागेंद्र कमड़े जी ने सफल संचालन किया। स्वागत भाषण संघ के अध्यक्ष आदरणीय प्रवीण लोंहारे जी ने दिया। धन्यवाद ज्ञापन हरमीत लेनपांडे जी तथा कार्यक्रम के समापन की घोषणा संघ के सचिव गुंजन रामटेक ने किया। इस कार्यक्रम में बालोद जिला के बौद्ध अनुयायियों के साथ ही जिला कांकेर, मोहला मानपुर अंबागढ़ चौकी, धमतरी, रायपुर, दुर्ग, राजनंदगांव तथा अन्य दूरस्थ स्थान से हजारों की संख्या में बौद्ध उपासक उपाशिकाएं आकर अपनी उपस्थिति दी एवं कार्यक्रम की सफलता में अपनी सहभागिता प्रदान की। संघ ने समस्त उपस्थित उपासक उपासिकाओं को धन्यवाद दिया और अपेक्षा की कि आने वाले वर्षों में इसी प्रकार से आपका सहयोग मिलता रहेगा।

संवाददाता - पुनेश्वर देवांगन 

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