सत्ता संभालते ही कहाँ गायब हो गए ईरान के नए लीडर मोजतबा खामेनेई?
ईरान की सत्ता के गलियारों में इस वक्त एक ऐसी खामोशी छाई है, जो किसी बड़े तूफान का संकेत दे रही है। दुनिया भर की नजरें इस वक्त ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई पर टिकी हैं, लेकिन विडंबना यह है कि पद संभालने के तीन दिन बाद भी वह कहीं दिखाई नहीं दिए हैं। आइए, इस पूरे घटनाक्रम के हर पहलू को विस्तार से समझते हैं।
1. रहस्यमयी खामोशी और गायब होते मोजतबा
56 साल के मोजतबा खामेनेई सोमवार को आधिकारिक तौर पर ईरान के सर्वोच्च नेता चुने गए। अपने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई की कट्टर नीतियों के उत्तराधिकारी माने जाने वाले मोजतबा हमेशा से एक 'सीक्रेट मैन' रहे हैं। लेकिन अब, जब उन्हें देश का नेतृत्व करना था, उनकी गैर-मौजूदगी ने अटकलों के बाजार को गर्म कर दिया है। न तो उनका कोई वीडियो संदेश आया है और न ही उनके ऑफिस से कोई लिखित बयान जारी हुआ है।
2. क्या इज़रायली-अमेरिकी हमले में लगी है चोट?
इज़रायल की खुफिया एजेंसियों का मानना है कि मोजतबा खामेनेई की यह गुमशुदगी किसी रणनीति का हिस्सा नहीं, बल्कि उनकी मजबूरी है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के खिलाफ हुए हालिया संयुक्त हवाई हमले में मोजतबा बुरी तरह घायल हो गए थे। इस खबर को तब और हवा मिली जब ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के बेटे, यूसुफ पेजेश्कियान ने टेलीग्राम पर एक पोस्ट डाली। उन्होंने लिखा कि उन्होंने मोजतबा के घायल होने की खबरें सुनीं और अपने संपर्कों से पूछताछ की। हालांकि उन्होंने दावा किया कि "ऊपर वाले का शुक्र है, वह ठीक हैं," लेकिन उन्होंने इस बारे में कोई पुख्ता सबूत या डिटेल साझा नहीं की।
3. 'रमजान का जांबाज': सरकारी टीवी का बड़ा इशारा
ईरान के सरकारी मीडिया का व्यवहार भी बहुत कुछ बयां कर रहा है। सरकारी टीवी एंकर्स अब मोजतबा खामेनेई को "रमजान का जांबाज" (The Veteran of Ramadan) कहकर संबोधित कर रहे हैं। फारसी भाषा और ईरानी सैन्य संस्कृति में 'जांबाज' शब्द का इस्तेमाल विशेष रूप से उन लोगों के लिए किया जाता है जो युद्ध में घायल हुए हों या जिन्होंने अपनी शारीरिक क्षति झेली हो। चूंकि ईरान इस मौजूदा टकराव को 'रमजान वॉर' कह रहा है, इसलिए उन्हें 'जांबाज' कहना इस बात की लगभग पुष्टि करता है कि वह हमलों के दौरान जख्मी हुए हैं। टीवी पर उनके नए फुटेज के बजाय केवल पुराने वीडियो ही दिखाए जा रहे हैं।
4. IRGC का दबाव और मोजतबा की चुनौतियां
इज़रायल का यह भी दावा है कि मोजतबा को नया सुप्रीम लीडर बनाने के पीछे IRGC (ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स) का भारी दबाव था। IRGC को एक ऐसे नेता की जरूरत थी जो अपने पिता की तरह कट्टरपंथी हो और पश्चिम के खिलाफ झुकने को तैयार न हो। मोजतबा के लिए यह सत्ता का सफर निजी दुखों से भी भरा है। 28 फरवरी को हुए इज़राइली एयरस्ट्राइक में उन्होंने अपने पिता अली खामेनेई और अपनी पत्नी, दोनों को खो दिया था। इसी हमले के साथ इस भीषण जंग की शुरुआत हुई थी।
5. सस्पेंस बरकरार: आगे क्या?
आमतौर पर ईरान के सर्वोच्च नेता पद संभालने के तुरंत बाद राष्ट्र के नाम संदेश देते हैं और टीवी पर सक्रिय रहते हैं, जैसा कि अली खामेनेई किया करते थे। लेकिन मोजतबा की चुप्पी और उनके ऑफिस की खामोशी दुनिया को यह सोचने पर मजबूर कर रही है कि क्या ईरान का नया नेतृत्व एक बड़े संकट के बीच में है? बिना किसी वीडियो एड्रेस या पब्लिक अपीयरेंस के, ईरान की जनता और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के मन में एक ही सवाल है कि मोजतबा खामेनेई असल में किस हाल में हैं?
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