अनंत सिंह गिरफ्तारी: मोकामा बन गई चुनावी हॉट-स्पॉट

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मोकामा विधानसभा सीट से जे॰डी॰यू॰ के प्रत्याशी अनंत सिंह को शनिवार देर रात पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उन पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिनमें पूर्व आरजेडी नेता और जन सुराज समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या का मामला शामिल है। इस घटना के बाद चुनाव आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई की और कई अधिकारियों का तबादला कर दिया।

मामला 30 अक्टूबर का है, जब मोकामा के तारतार गांव में जन सुराज पार्टी और जे॰डी॰यू॰ समर्थकों के बीच चुनाव प्रचार के दौरान हिंसक झड़प हुई। इस झड़प में दुलारचंद यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई और कई अन्य लोग घायल भी हुए। घटना का वीडियो भी सामने आया है। पटना पुलिस ने बीती रात अनंत सिंह को उनके बाढ़ स्थित आवास से गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और अन्य सबूतों के आधार पर गिरफ्तारी की गई है। उनके दो सहयोगियों को भी गिरफ्तार किया गया है।

अनंत सिंह ने अपने बयान में कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान कुछ वाहन रोकने के कारण विवाद हुआ। उन्होंने बताया कि सड़क पर ईंट-पत्थर रखकर हिंसा की तैयारी की गई थी और उनका आरोप है कि इस पूरे खेल में सूरजभान सिंह का हाथ था।

सूरजभान सिंह, जिन्हें “दादा” के नाम से जाना जाता है, मोकामा के एक प्रमुख बाहुबली नेता हैं। वे भूमिहार समुदाय से हैं और लंबे समय से राजनीति और अपराध से जुड़े हैं। उनकी पत्नी वीणा देवी आरजेडी से मोकामा सीट पर चुनाव लड़ रही हैं, जबकि सूरजभान स्वयं चुनावी राजनीति में पीछे रहकर सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

जन सुराज पार्टी के मोकामा प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी ने कहा कि पुलिस की कार्रवाई देर से हुई, जबकि FIR पहले ही दर्ज हो चुकी थी। उन्होंने इसे कानून व्यवस्था पर चिंता का विषय बताया। वहीं, तेजस्वी यादव ने इस घटना की निंदा करते हुए नीतीश सरकार पर कानून-व्यवस्था बिगड़ने का आरोप लगाया।

अनंत सिंह भूमिहार समुदाय से आते हैं और क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ है। एक लाख वोटों से जीत का दावा करने वाले उनके लिए यह गिरफ्तारी चुनौती पेश कर सकती है। हालांकि, उनकी पत्नी नीलम देवी अब मुख्य भूमिका निभा सकती हैं। वहीं, गिरफ्तारी से सहानुभूति वोट भी एकजुट हो सकते हैं। अनुमान है कि यह चुनाव जातिगत रंग ले सकता है, जहां भूमिहार वोट अनंत सिंह के पक्ष में और यादव वोट पीयूष प्रियदर्शी के पक्ष में जुट सकते हैं।

यह बिहार का पहला चुनावी हिंसा से जुड़ा हत्याकांड मामला है, जो एनडीए (जेडीयू-बीजेपी) पर दबाव बढ़ा सकता है। विपक्ष इस घटना को कानून-व्यवस्था का मुद्दा बनाने की कोशिश करेगा। हालांकि, अनंत सिंह की लोकप्रियता मुख्य रूप से स्थानीय है, इसलिए पूरे बिहार पर इसका असर सीमित रहने की संभावना है। एनडीए के लिए मोकामा एक चुनौतीपूर्ण सीट बन गई है।

कुल मिलाकर, अनंत सिंह की गिरफ्तारी ने मोकामा सीट को “हॉट सीट” बना दिया है। जहां बीजेपी लगातार जंगल राज का हवाला देते हुए विपक्ष को घेर रही है, वहीं एनडीए के लिए यह चुनौती बनी हुई है कि स्थानीय और जातिगत समीकरणों में संतुलन कैसे बनाए। चुनाव आयोग की कार्रवाई और गिरफ्तारियों के बाद मामला आगामी दिनों में और चर्चा का विषय बनेगा।

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