जब तख्त के लिए कटवा दिया भाई ने भाई का सिर....
मुगल सल्तनत का तख्त… और उसके लिए एक भाई ने अपने ही भाई की जान ले ली।
1657 में शाहजहाँ के बीमार पड़ते ही उनके चारों बेटों—दारा शिकोह, औरंगज़ेब, शाह शुजा और मुराद बख्श—के बीच सत्ता की जंग शुरू हो गई।
शाहजहाँ के सबसे बड़े और प्रिय पुत्र दारा शिकोह को उत्तराधिकारी माना जा रहा था। लेकिन औरंगज़ेब ने सैन्य ताकत और रणनीति के दम पर 1658 में सामूगढ़ की लड़ाई में दारा को हरा दिया। इसके बाद शाहजहाँ को आगरा किले में नजरबंद कर औरंगज़ेब ने सत्ता संभाल ली।
दारा ने हार के बाद भी संघर्ष जारी रखा, लेकिन आखिरकार उन्हें पकड़ लिया गया।
1659 में दारा शिकोह को मृत्युदंड दिया गया और उनका सिर कलम कर दिया गया। उनका सिर औरंगज़ेब के सामने पेश किया गया।
दारा केवल एक राजकुमार नहीं थे। वे सूफी विचारों से प्रभावित विद्वान थे और हिंदू-मुस्लिम आध्यात्मिक परंपराओं के बीच समानता तलाशते थे। उन्होंने उपनिषदों का फारसी में अनुवाद भी करवाया।
तख्त और सत्ता की इस खूनी लड़ाई में औरंगज़ेब जीत गया, लेकिन दारा शिकोह की विचारधारा इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गई।
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