उल्हासनगर से कल्याण-डोंबिवली तक महायुति में घमासान! BJP और शिंदे सेना आमने-सामने

मुंबई : उल्हासनगर महानगरपालिका में स्वीकृत नगरसेवकों के चयन को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बीच शुरू हुआ विवाद अब कल्याण-डोंबिवली तक पहुंच गया है। शिवसेना के कल्याण जिला प्रमुख गोपाल लांडगे ने BJP पर निशाना साधते हुए सांसद श्रीकांत शिंदे का समर्थन किया। इसके बाद BJP नेताओं ने भी पलटवार किया। दोनों सहयोगी दलों के बीच बढ़ते आरोप-प्रत्यारोप से महायुति में स्थानीय स्तर पर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।

गोपाल लांडगे ने BJP पर साधा निशाना

उल्हासनगर महानगरपालिका में स्वीकृत नगरसेवक पद के लिए BJP के उम्मीदवारों की पात्रता को लेकर विवाद शुरू हुआ। गोपाल लांडगे ने कहा कि BJP अपने उम्मीदवारों को पात्र नहीं बना सकी, लेकिन इसके लिए शिवसेना को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।

लांडगे ने कहा कि सांसद श्रीकांत शिंदे ने हमेशा गठबंधन धर्म का पालन किया है। इसके बावजूद BJP नेताओं की ओर से उनके खिलाफ बयान देना गलत और अन्यायपूर्ण है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि श्रीकांत शिंदे ने विकास कार्यों के लिए निधि उपलब्ध कराते समय कभी पक्षपात नहीं किया और सभी जनप्रतिनिधियों को सहयोग दिया।

उल्हासनगर की महापौर अश्विनी निकम के पति और शिवसेना नेता कमलेश निकम ने BJP प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण की आलोचना की थी। गोपाल लांडगे ने कमलेश निकम के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि उनके दावों के समर्थन में सबूत मौजूद हैं।

BJP नेताओं का पलटवार

गोपाल लांडगे के बयान के बाद BJP नेताओं ने भी कड़ा रुख अपनाया। कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका के सभागृह नेता वरुण पाटील ने कहा कि शिवसेना पदाधिकारियों को BJP नेताओं पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है।

वहीं, BJP के कल्याण-डोंबिवली गुटनेता शशिकांत कांबले ने कहा कि गोपाल लांडगे जैसे अनुभवी नेता से इस तरह के छोटे मुद्दों में शामिल होने की उम्मीद नहीं थी। उन्होंने रवींद्र चव्हाण की राजनीतिक हैसियत का भी उल्लेख किया।

इस बयानबाजी के बाद दोनों दलों के बीच राजनीतिक तनाव और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।

आखिर क्या है पूरा विवाद?

उल्हासनगर महानगरपालिका में स्वीकृत नगरसेवक पदों के चयन को लेकर BJP ने आरोप लगाया है कि उसके कोटे की सीट पर शिवसेना के उम्मीदवार को चुना गया। इस फैसले के खिलाफ BJP ने मुंबई हाईकोर्ट का रुख किया है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हाईकोर्ट ने स्वीकृत नगरसेवक चयन प्रक्रिया पर रोक लगाई है और मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को निर्धारित की गई है। अब इस सुनवाई में क्या फैसला होता है, इस पर दोनों दलों की नजरें टिकी हैं।

क्या महायुति में बढ़ेंगी दूरियां?

राज्य में BJP और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना भले ही महायुति सरकार में सहयोगी हों, लेकिन स्थानीय स्तर पर दोनों दलों के बीच मतभेद सामने आते रहे हैं। उल्हासनगर के स्वीकृत नगरसेवक विवाद ने इन मतभेदों को एक बार फिर उजागर कर दिया है।

अब यह विवाद केवल उल्हासनगर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कल्याण-डोंबिवली की राजनीति में भी इसका असर दिखाई देने लगा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या दोनों दलों के वरिष्ठ नेता इस विवाद को शांत कर पाएंगे या महायुति के भीतर राजनीतिक खींचतान और बढ़ेगी?

रिपोर्टर : साबीर शेख

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