महिला कर्मचारियों को रात-बेरात फोन कर मानसिक प्रताड़ना देने का आरोप! अधीक्षक उत्तम शिंदे के खिलाफ जांच की मांग

मुंबई : महाराष्ट्र राज्य आबकारी विभाग के अधीक्षक उत्तम शिंदे के कथित कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए गए हैं। महिला कर्मचारियों को रात-बेरात फोन कर मानसिक रूप से परेशान किए जाने के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है। स्वतंत्र खोजी पत्रकार एवं सूचना का अधिकार (आरटीआई) कार्यकर्ता सुधीर शरद गुजर ने इस संबंध में राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर को ज्ञापन सौंपा है।

ज्ञापन में महिला कर्मचारियों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और कार्यालय में सम्मानजनक कार्य वातावरण सुनिश्चित करने के लिए मामले को गंभीरता से लेने का अनुरोध किया गया है।

रात-बेरात फोन करने का आरोप, स्वतंत्र जांच की मांग

ज्ञापन के अनुसार, संबंधित महिला कर्मचारियों को देर रात और असामान्य समय पर फोन किए जाने की शिकायतें हैं। इन फोन कॉल के पीछे के कारणों, सरकारी कामकाज से उनके संबंध, संपर्क की आवृत्ति और बातचीत के स्वरूप की स्वतंत्र रूप से जांच करने की मांग की गई है।

इसके अलावा, कथित घटनाओं का महिला कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य, कामकाज और कार्यालय के वातावरण पर कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है या नहीं, इसकी भी जांच किए जाने का अनुरोध किया गया है।

राष्ट्रीय महिला आयोग से विशेष जांच दल बनाने की मांग

शिकायतकर्ता सुधीर गुजर ने ज्ञापन में कहा है कि मामले की जांच निष्पक्ष और किसी भी तरह के दबाव से मुक्त होनी चाहिए। इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय महिला आयोग से अपने अधिकार क्षेत्र के अनुसार मामले की प्रारंभिक जांच कर महाराष्ट्र सरकार को स्वतंत्र विशेष जांच दल गठित करने की सिफारिश करने की मांग की गई है।

प्रस्तावित जांच दल में महिला प्रतिनिधि, सक्षम वरिष्ठ अधिकारी और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित कानून के विशेषज्ञों को शामिल करने का सुझाव दिया गया है। मामले की प्रकृति के अनुसार इसे सक्षम सतर्कता एजेंसी या संबंधित शिकायत निवारण समिति के पास भेजने का अनुरोध भी किया गया है।

फोन रिकॉर्ड और सरकारी दस्तावेजों की जांच की मांग

ज्ञापन में संबंधित फोन कॉल के उपलब्ध रिकॉर्ड, कानूनी रूप से प्राप्त संदेशों, कार्यालयीन पत्राचार, पूर्व शिकायतों और संबंधित प्रशासनिक आदेशों की जांच करने की मांग की गई है।

साथ ही, शिकायत करने वाली महिला कर्मचारियों को किसी दबाव, धमकी या बदले की कार्रवाई के डर के बिना अपनी बात रखने का अवसर दिया जाए। उनकी पहचान और व्यक्तिगत जानकारी गोपनीय रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने का भी अनुरोध किया गया है।

आरोप साबित होने पर कार्रवाई की मांग

राष्ट्रीय महिला आयोग से ज्ञापन को आधिकारिक रूप से दर्ज करने, आरोपों की प्रारंभिक जांच कराने और संबंधित महिला कर्मचारियों के बयान गोपनीय वातावरण में दर्ज करने की मांग की गई है।

ज्ञापन में कहा गया है कि उपलब्ध साक्ष्यों की कानूनी रूप से जांच की जाए और यदि आरोप साबित होते हैं, तो लागू कानूनों तथा सेवा नियमों के अनुसार उचित अनुशासनात्मक या अन्य कानूनी कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही, ज्ञापन पर की गई कार्रवाई की जानकारी लिखित रूप में देने का अनुरोध भी किया गया है।

ज्ञापन की प्रतियां महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और राज्य आबकारी विभाग के सक्षम वरिष्ठ अधिकारियों को भी जानकारी के लिए भेजे जाने का उल्लेख है।

निष्पक्ष जांच से सामने आएगी सच्चाई?

सुधीर शरद गुजर के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य किसी को बिना सबूत दोषी ठहराना नहीं, बल्कि आरोपों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाना और महिला कर्मचारियों को सुरक्षित एवं सम्मानजनक कार्य वातावरण उपलब्ध कराना है। महत्वपूर्ण: अधीक्षक उत्तम शिंदे के खिलाफ लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होने या राष्ट्रीय महिला आयोग अथवा संबंधित अधिकारियों द्वारा ज्ञापन पर की गई कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए मामले में निष्पक्ष जांच और सभी संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा।


रिपोर्टर : साबीर शेख

Leave a Reply



comments

Loading.....
  • No Previous Comments found.