अंबरनाथ में पानी की कटौती के बीच कार धोने पर लाखों लीटर पानी बर्बाद! घरों में किल्लत, वॉशिंग सेंटरों पर भीड़

मुंबई : अंबरनाथ, बदलापुर और काटई हाईवे के कुछ वाहन धुलाई केंद्रों पर पानी की बर्बादी का आरोप; एमआईडीसी की जलवाहिनियों से पानी चोरी की आशंका, कार्रवाई पर उठे सवाल

ठाणे जिले में पानी की कमी से निपटने के लिए 16 अक्टूबर से पानी की कटौती लागू की गई है। एक ओर आम नागरिकों को पानी का इस्तेमाल सावधानी से करने की जरूरत पड़ रही है, वहीं दूसरी ओर अंबरनाथ, बदलापुर और काटई हाईवे क्षेत्र के कुछ वाहन धुलाई केंद्रों पर बड़ी मात्रा में पानी खर्च किए जाने का मामला सामने आया है। दशहरे के अवसर पर इन केंद्रों पर दोपहिया, चारपहिया, ट्रक और टेम्पो धुलवाने के लिए बड़ी संख्या में वाहन पहुंचे। आरोप है कि इस दौरान लाखों लीटर पानी बर्बाद हुआ। अब सवाल उठ रहा है कि यदि पानी की कमी है, तो पानी की कथित चोरी और बर्बादी रोकने के लिए संबंधित विभाग कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा है?

घरों में पानी की किल्लत, वॉशिंग सेंटरों पर वाहनों की कतारें

इस वर्ष बारिश की स्थिति और भविष्य में पानी की उपलब्धता को लेकर अनिश्चितता के मद्देनजर ठाणे जिले में जल प्रबंधन के लिए पानी की कटौती लागू की गई है। जिले के कई शहरों में बारवी बांध से पानी की आपूर्ति होती है। इसके अलावा उल्हास नदी, आंध्र बांध, चिखलोली बांध और अन्य जलस्रोत भी विभिन्न क्षेत्रों की जरूरतें पूरी करते हैं।

पानी की उपलब्धता को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए नागरिकों से पानी का संयमित इस्तेमाल करने की अपील की जा रही है। अंबरनाथ और बदलापुर जैसे शहरों में सप्ताह में एक दिन पानी की कटौती की जा रही है, जबकि कुछ क्षेत्रों में कम दबाव से पानी मिलने की शिकायतें भी सामने आती रहती हैं।

इसके बावजूद दशहरे से पहले और त्योहार के दिन कई वाहन धुलाई केंद्रों पर वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। इन केंद्रों पर लगातार वाहनों की धुलाई होती रही। ऐसे में पानी की खपत और संभावित बर्बादी को लेकर नागरिकों में नाराजगी है।

एमआईडीसी की जलवाहिनियों से पानी चोरी का संदेह

स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि अंबरनाथ, बदलापुर और काटई हाईवे के कुछ वाहन धुलाई केंद्र एमआईडीसी की बड़ी जलवाहिनियों के आसपास संचालित हो रहे हैं। आशंका जताई जा रही है कि कुछ जगहों पर जलवाहिनियों में छेद करके पानी लिया जाता है। हालांकि, इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि और संबंधित केंद्रों की जांच की जानकारी सामने आना बाकी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले भी ऐसे केंद्रों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठती रही है, लेकिन इसके बावजूद कुछ क्षेत्रों में वाहन धुलाई केंद्रों की संख्या बढ़ती दिखाई दे रही है। ऐसे में संबंधित अधिकारियों की निगरानी और कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

एमआईडीसी और प्रशासन से कार्रवाई की मांग

पानी की कटौती का सीधा असर आम नागरिकों की दैनिक जरूरतों पर पड़ता है। ऐसे में यदि कहीं अवैध तरीके से पानी लिया जा रहा है या उसका अनावश्यक इस्तेमाल हो रहा है, तो संबंधित विभाग को इसकी जांच करनी चाहिए। जलवाहिनियों का निरीक्षण कर पानी चोरी की पुष्टि होने पर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की जा रही है।

नागरिकों का सवाल है कि जब घरों में पानी बचाकर इस्तेमाल करने की नौबत आ रही है, तो वाहन धुलाई केंद्रों पर पानी के कथित दुरुपयोग को रोकने के लिए ठोस कदम कब उठाए जाएंगे?

अब देखना होगा कि एमआईडीसी और संबंधित स्थानीय प्रशासन इस मामले में जांच कर क्या कार्रवाई करते हैं।

 

रिपोर्टर :  साबिर शेख

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