एक बीघा में मशरूम की खेती से लाखों की कमाई, जानिए मुनाफे का पूरा हिसाब
अगर आप कम जमीन में ज्यादा कमाई का विकल्प तलाश रहे हैं, तो मशरूम फार्मिंग आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकती है। पारंपरिक गेहूं-धान की खेती के बजाय कई किसान अब ऐसी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं, जिनमें कम जगह और सीमित निवेश में अच्छी आमदनी हो सके। मशरूम की खासियत यह है कि इसकी खेती के लिए बड़े खेत की जरूरत नहीं होती। एक बीघा जमीन में शेड तैयार कर इसकी खेती शुरू की जा सकती है। होटल, रेस्टोरेंट और घरेलू बाजार में मशरूम की मांग सालभर बनी रहती है।
एक बीघा में कैसे तैयार होगा मशरूम फार्म
एक बीघा जमीन पर मशरूम की खेती के लिए सेमी-कंट्रोल्ड शेड तैयार किया जा सकता है। इसके लिए बैम्बू या पॉलीहाउस स्ट्रक्चर के साथ मल्टी-लेयर रैक लगाए जाते हैं। खेती के लिए भूसा या पुआल से तैयार कंपोस्ट, मशरूम स्पॉन और केसिंग सॉइल की जरूरत होती है। करीब 2500 से 3000 बैग में बटन या ऑयस्टर मशरूम का उत्पादन किया जा सकता है।
शुरुआत में कितनी आएगी लागत
एक बीघा में शेड और बेसिक ढांचा तैयार करने में करीब 1.5 से 2 लाख रुपये तक का शुरुआती खर्च आ सकता है। इसके बाद कंपोस्ट, स्पॉन, मजदूरी, बिजली, पानी और नमी बनाए रखने वाले उपकरणों पर हर सीजन करीब 1.2 से 1.5 लाख रुपये खर्च हो सकते हैं। कुछ योजनाओं के तहत मशरूम उत्पादन के लिए सरकारी सब्सिडी का लाभ भी मिल सकता है, जिससे शुरुआती निवेश का बोझ कम हो सकता है।
कितने किलो मशरूम का हो सकता है उत्पादन
उचित तापमान और नमी बनाए रखने पर एक बीघा के कवर्ड एरिया से करीब 2.5 से 3 महीने के उत्पादन चक्र में 4000 से 5000 किलो तक फ्रेश मशरूम का उत्पादन संभव बताया जाता है। हालांकि वास्तविक उत्पादन मौसम, मशरूम की किस्म, तकनीक और प्रबंधन पर निर्भर करता है।
बाजार में कितना मिल सकता है भाव
मशरूम का बाजार भाव उसकी किस्म, गुणवत्ता, मौसम और बिक्री के तरीके के अनुसार बदलता रहता है। उदाहरण के तौर पर यदि औसत थोक भाव 130 रुपये प्रति किलो माना जाए और उत्पादन 4500 किलो हो, तो करीब 5.85 लाख रुपये का सकल कारोबार हो सकता है। वहीं होटल, रेस्टोरेंट या सीधे ग्राहकों को पैकिंग के साथ बिक्री करने पर बेहतर भाव मिलने की संभावना रहती है।
खर्च निकालने के बाद कितना मुनाफा
यदि करीब 6 लाख रुपये के सकल कारोबार में से लगभग 1.5 लाख रुपये का संचालन खर्च घटाया जाए, तो करीब 4 से 4.5 लाख रुपये तक का सकल मार्जिन बन सकता है। हालांकि इसमें शेड की शुरुआती लागत, बाजार भाव में उतार-चढ़ाव, खराब उत्पादन, परिवहन और अन्य खर्चों को भी ध्यान में रखना जरूरी है। इसलिए वास्तविक मुनाफा किसान की उत्पादन क्षमता और बाजार पर निर्भर करेगा।
खेती शुरू करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
मशरूम फार्मिंग में तापमान, नमी, स्वच्छता और उत्पादन तकनीक का विशेष महत्व है। इसलिए खेती शुरू करने से पहले विशेषज्ञों या कृषि विभाग से प्रशिक्षण लेना बेहतर रहेगा। साथ ही स्थानीय बाजार में मशरूम की मांग, मौजूदा कीमत, परिवहन और बिक्री की व्यवस्था की जानकारी लेकर ही निवेश करना चाहिए।
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