नालंदा सड़क पर 20 साल की विवाहिता के साथ दरिंदगी

आज हम एक ऐसी खबर लेकर आए हैं जिसे सुनकर आपकी रूह कांप जाएगी और मानवता पर से भरोसा उठ जाएगा। जी हां सुशासन के दावों के बीच बिहार के नालंदा से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है और सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या बेटियां अब अपने ही गांव की सड़कों पर सुरक्षित नहीं हैं? क्या दबंगों का खौफ कानून से बड़ा हो गया है? दरअसल, नालंदा के नूरसराय में एक 20 साल की विवाहिता के साथ जो हुआ, उसने मणिपुर की उस काली रात की याद दिला दी है जिसने पूरी दुनिया को रुलाया था। सरेआम सड़क पर दरिंदगी, सरेआम कपड़े फाड़े गए, और शर्म की बात तो देखिए कि तमाशबीन बनी भीड़ विरोध करने के बजाय उसका वीडियो बनाती रही। आइए जानते हैं इस खौफनाक घटना के पीछे की पूरी कहानी। 

बिहार के नालंदा जिले का अजयपुर गांव आज शर्म से झुका हुआ है। यहां एक ऐसी वारदात को अंजाम दिया गया जिसने कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ा दी हैं। 26 मार्च की वो शाम, जो एक आम शाम हो सकती थी, लेकिन एक मासूम महिला के लिए कभी न भूलने वाला रात बन गई। जानकारी के मुताबिक, 20 साल की एक विवाहिता, जो फिलहाल अपने मायके में रह रही थी, शाम करीब 6 से 7 बजे के बीच घर के पास की एक किराना दुकान से सामान लेने निकली थी। उसे क्या पता था कि गांव के ही तीन हैवान घात लगाकर उसका इंतजार कर रहे हैं। जैसे ही वह सुनसान रास्ते पर पहुँची, गांव के दबंग अशोक यादव, मतलू महतो उर्फ नवनीत और रविकांत कुमार ने उसे दबोच लिया। आरोपियों ने महिला को जबरन पकड़कर सड़क पर घसीटना शुरू कर दिया। महिला अपनी जान और इज्जत बचाने के लिए गिड़गिड़ाती रही, चिल्लाती रही, लेकिन दरिंदों के सिर पर खून सवार था। उन्होंने सरेआम महिला के कपड़े फाड़ डाले और उसे अर्धनग्न कर दिया। हद तो तब हो गई जब वहां मौजूद लोग मदद के लिए आगे आने के बजाय इस खौफनाक मंजर को मूकदर्शक बनकर देखते रहे। आरोपियों ने सिर्फ शारीरिक प्रताड़ना ही नहीं दी, बल्कि जबरन उसकी मांग में सिंदूर भरने की भी कोशिश की।

इन हैवानों का मन इतने से भी नहीं भरा। अपनी घिनौनी करतूत को उन्होंने मोबाइल में कैद किया और पीड़िता को समाज में पूरी तरह से तोड़ने के लिए उस वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वीडियो में आरोपी भद्दी गालियां देते और महिला की गरिमा को तार-तार करते साफ देखे जा सकते हैं। इस कृत्य ने साफ कर दिया कि अपराधियों के मन में पुलिस और कानून का रत्ती भर भी डर नहीं है। वहीं घटना के अगले दिन, यानी 27 मार्च को पीड़िता ने हिम्मत जुटाई और नूरसराय थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मामला दर्ज किया। साथ ही डीएसपी संजय कुमार जायसवाल के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम बनाई गई। पुलिस ने त्वरित छापेमारी कर दो मुख्य आरोपियों, अशोक यादव और मतलू महतो, को सलाखों के पीछे भेज दिया है। तीसरा मुख्य आरोपी रविकांत कुमार अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर है, जिसकी तलाश में कई ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। वहीं इस घटना ने वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार को आड़े हाथों लेते हुए इसे 'सामूहिक दुष्कर्म की कोशिश' करार दिया और कहा कि बिहार में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है।

जाहिर है नालंदा की इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अपराधी कितने बेखौफ हैं। एक तरफ हम डिजिटल इंडिया और प्रगति की बातें करते हैं, तो वहीं दूसरी तरफ एक महिला को सरेआम सड़क पर अपमानित किया जाता है और उसका वीडियो बनाकर मनोरंजन की तरह वायरल कर दिया जाता है। पुलिस ने दो को पकड़ा है, लेकिन क्या इतना काफी है? क्या फरार रविकांत को पाताल से भी ढूंढ निकाला जाएगा? और सबसे बड़ा सवाल उन तमाशबीनों से है कि अगर आज आप चुप हैं, तो कल शिकार आपके घर की बेटी भी हो सकती है। नालंदा की इस बेटी को सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, बल्कि ऐसा न्याय चाहिए जो मिसाल बने, ताकि फिर कोई अशोक या रविकांत किसी की अस्मत को हाथ लगाने की हिम्मत न कर सके। हम इस मामले पर लगातार नजर बनाए रखेंगे, क्योंकि यह सिर्फ एक महिला की नहीं, बल्कि हम सबकी गरिमा का सवाल है! 

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