चल समारोह का नालछा नगर में कई जगह पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया
नालछा - संत रविदास जी की जन्म जयंती के अवसर पर नालछा नगर में एक विशाल चल समारोह निकाला गया। यह चल समारोह अंबेडकर कॉलोनी से शुरू होकर बस स्टैंड, आजाद मार्ग, मांडू रोड से होते हुए कड़ा तक पहुंचा। वहां आरती के बाद भंडारे का आयोजन किया गया। मांडू के निकट काकड़ा खो एक ऐसा दिव्य कुंड है जिसमे वर्ष भर जल रहता है। कहते है इस क्षेत्र जब संत रविदास आए थे तब जल की अत्यधिक समस्या थी, उसे दूर करने के लिए राजपरिवार ने उनसे प्रार्थना की और संत शिरोमणि रविदास जी ने वहां गंगा का एक कुंड में अवतरण कर दिया। संत रविदास जी का जीवन और दर्शन संत रविदास जी भक्ति आंदोलन के प्रमुख संतों में से एक थे। उनका जन्म लगभग 1398 ईस्वी में वाराणसी में हुआ था। उन्होंने भगवान की भक्ति को सर्वश्रेष्ठ बताया और निष्काम प्रेम तथा सेवा पर बल दिया। उनकी वाणी भक्ति की सच्ची भावना, समाज के व्यापक हित की कामना तथा मानव प्रेम से ओत-प्रोत होती थी। संत रविदास जी के दोहे और उनका महत्व"मन चंगा तो कठौती में गंगा" अर्थ: यदि मन पवित्र और निर्मल है, तो किसी भी स्थान पर किया गया कार्य पवित्र ही होगा। बाहरी आडंबरों की बजाय आंतरिक शुद्धता अधिक महत्वपूर्ण है। "अब कैसे छूटै राम नाम रट लागा। मैं तो राम रतन धन पायो।"अर्थ: जब एक बार भक्त को राम नाम की लगन लग जाती है, तो वह सांसारिक मोह-माया से मुक्त होकर केवल ईश्वर के प्रेम में लीन हो जाता है।
रिपोर्टर - अशोक मिरद्वाल
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