भोजशाला में माँ सरस्वती जन्मोत्सव निर्विघ्न सम्पन्न कराने की माँग

मांडव : समिति ने बताया कि भोजशाला, जिसे राजा भोज ने माँ सरस्वती की आराधना हेतु निर्मित कराया था, सन 1034 से निरंतर माँ सरस्वती साधना का प्रमुख केंद्र रहा है। 1904 में अंग्रेज शासन ने इसे संरक्षित धरोहर घोषित किया था तथा 1952 में भारत सरकार के पुरातत्व विभाग ने भी इसे संरक्षित स्मारक का दर्जा दिया।

7 अप्रैल 2003 को केंद्रीय पुरातत्व विभाग द्वारा जारी आदेशानुसार प्रत्येक मंगलवार और बसंत पंचमी पर दिनभर हिन्दू समाज को पूजा-अर्चना का अधिकार प्रदान किया गया है। इसके बावजूद कई बार बसंत पंचमी शुक्रवार को आने पर विवाद की स्थिति निर्मित हुई और पूजा-अर्चना में विघ्न डाले गए।

ज्ञापन में कहा गया कि आगामी बसंत पंचमी पर हिन्दू समाज माँ सरस्वती जन्मोत्सव पूरी श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाने के लिए कटिबद्ध है। समिति ने प्रशासन से स्पष्ट माँग की है कि 23 जनवरी 2026 को भोजशाला परिसर में मुस्लिम समुदाय का प्रवेश पूर्णतः प्रतिबंधित किया जाए, जिससे माँ सरस्वती जन्मोत्सव निर्विघ्न सम्पन्न हो सके।

समिति ने चेतावनी दी कि यदि पूजा-अर्चना में किसी प्रकार का अवरोध उत्पन्न होता है तो उसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी शासन एवं प्रशासन की होगी।

ज्ञापन का वाचन समिति के संरक्षक हेमंत दोराया ने किया। इस अवसर पर समिति के संरक्षक अशोक जैन, गोपाल शर्मा, अध्यक्ष सुरेश जलोदिया, महामंत्री सुमित चौधरी, तथा पदाधिकारी राजेश शुक्ला, बंटी राठौड़, निखिल जोशी, बडू बाबर एवं लोकेश देवड़ा उपस्थित रहे।

रिपोर्टर : अशोक मिरदवाल  

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