इमलीपुरा में निकला राष्ट्रजागरण का संचलन
नालछा : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर इमलीपुरा मंडल में भव्य पथ संचलन का आयोजन किया गया। संचलन का शुभारंभ इमलीपुरा पंचायत भवन से हुआ, जो विभिन्न मार्गों से होते हुए दिया घाटी पर संपन्न हुआ।
जनजातीय क्षेत्र में आयोजित इस संचलन में बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों ने अनुशासित पंक्तियों में भाग लेकर राष्ट्रभक्ति और संगठन के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।
मुख्य वक्ता के रूप में पूर्व सैनिक कैलाश जी निनामा, मध्य भारत प्रांत जनजाति सुरक्षा मंच के प्रांत संरक्षक, उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्य आज समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच चुका है। डॉ. हेडगेवार जी ने संघ की स्थापना इस उद्देश्य से की थी कि बिखरे हुए हिन्दू समाज में संगठन और बंधुत्व की भावना स्थापित हो सके।
उन्होंने कहा कि “संघ शुद्ध चैतन्य का प्रतीक है — भिन्न शरीर हो सकते हैं, लेकिन मन एक रहना चाहिए।” डॉ. हेडगेवार का सपना था कि राष्ट्र की एकता और अखंडता हिन्दुत्व के कंधों पर सुशोभित हो।
कैलाश जी ने आगे कहा कि संघ का कार्य परमार्थ का कार्य है। निस्वार्थ भाव से समाज सेवा करने वाले कार्यकर्ताओं को प्रेम, विश्वास और मान-सम्मान के साथ आगे बढ़ना चाहिए। संघ वटवृक्ष की भांति है — जिसकी शाखाओं के माध्यम से समाज के सभी वर्गों को एक छांव में एकत्रित कर भविष्य की चुनौतियों का सामना करने की शक्ति दी जाती है।
उन्होंने कहा कि संघ की यात्रा 1925 से निरंतर प्रगति पर है —
1925 से 1947 तक संघ की बाल्यावस्था रही, जिसमें संगठन की नींव रखी गई।
1947 से 1975 तक यह व्यस्क हुआ और समाज में एकात्मता का भाव जगाया।
1975 से 2000 तक राष्ट्र जागरण और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में उल्लेखनीय कार्य हुए।
2000 से 2025 (शताब्दी वर्ष) तक संघ ने अनेक चुनौतियों के बीच अपनी शाखाओं के माध्यम से समाज को नई दिशा दी।
उन्होंने कहा कि आज हिन्दू समाज को विभाजित करने के प्रयास हो रहे हैं, परन्तु संघ अपनी “चरैवेति चरैवेति” की परंपरा के साथ अडिग है। संघ इसलिए टिका है क्योंकि उसका आधार मजबूत है — उसकी जड़ें वटवृक्ष की तरह भूमि में गहराई तक समाई हैं।
कैलाश जी निनामा ने स्वयंसेवकों को संदेश दिया —
> “हम संगठन के लिए हैं, संगठन हमारे लिए नहीं। हर स्वयंसेवक को यह भाव अपने हृदय में रखना चाहिए। जब यह निस्वार्थ समरसता हृदय में आएगी, तब ही कौशल, दृढ़ता और तन्मयता जैसे गुण प्रकट होंगे।”
अंत में उन्होंने कहा कि संघ समाज में पाँच प्रमुख परिवर्तनों — सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, नागरिक अनुशासन, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता — के माध्यम से सशक्त भारत के निर्माण की दिशा में कार्य कर रहा है।
कार्यक्रम में मंच पर मंडल कार्यवाह रोहित मंच की अध्यक्षता रामलाल जी पटेल एवं अभय सिंह जी गिरवाल ने की।
रिपोर्टर : अशोक मिरदवाल
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