मेलबर्न में मोदी का बड़ा धमाका! भारत को मिला ऑस्ट्रेलिया का यूरेनियम

भारत और ऑस्ट्रेलिया के रिश्तों में एक ऐसा नया अध्याय जुड़ गया है जिसने पूरी दुनिया की राजनीति और बिजनेस वर्ल्ड में तहलका मचा दिया है! मेलबर्न की धरती पर जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलियाई पीएम एंथनी अल्बनीज गले मिले, तो सिर्फ दो नेता नहीं बल्कि दुनिया की दो बड़ी ताकतें एक मजबूत साझेदारी के नए दौर में दाखिल हो गईं। दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, अंतरिक्ष, साइबर सिक्योरिटी और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे बड़े मोर्चों पर तो समझौते हुए ही, लेकिन जिस एक डील ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरीं, वो है यूरेनियम डील पर लगी फाइनल मुहर। जी हां इस ऐतिहासिक मुलाकात के बाद पीएम मोदी ने अपने अंदाज में दोनों देशों के रिश्तों को क्रिकेट की भाषा में समझाते हुए कहा कि 'भारत और ऑस्ट्रेलिया का रिश्ता क्रिकेट जैसा है। हमारी मुलाकातें क्रिकेट की तरह बार-बार होती हैं, एजेंडे में वनडे जैसा पूरा फोकस होता है, फैसले टी-20 की रफ्तार से फटाफट होते हैं और हमारी यह पार्टनरशिप टेस्ट मैच की तरह लंबी और बेहद मजबूत है।' आइए जानते हैं इस महा-दौरे और ऐतिहासिक समझौतों की वो पूरी इनसाइड स्टोरी, जिसने भारत के क्लीन एनर्जी मिशन को एक नई सुपरपावर दे दी है।

दरअसल, इस दौरे का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट रहा साल 2015 के भारत-ऑस्ट्रेलिया परमाणु सहयोग समझौते के तहत भारत को यूरेनियम निर्यात करने की व्यवस्था पर दोनों प्रधानमंत्रियों के फाइनल साइन। ऑस्ट्रेलिया दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है जिसके पास यूरेनियम का सबसे विशाल भंडार है, और भारत अब दुनिया का पांचवां ऐसा देश बन गया है जो ऑस्ट्रेलिया से सीधे यूरेनियम खरीदेगा। लेकिन यहां समझने वाली बात यह है कि भारत को इस यूरेनियम की जरूरत परमाणु बम बनाने के लिए नहीं, बल्कि देश के कोने-कोने में चौबीसों घंटे बिजली चमकाने और प्रदूषण मुक्त ऊर्जा बनाने के लिए है।
दरअसल, भारत ने साल 2070 तक 'नेट जीरो' उत्सर्जन का एक बहुत बड़ा और महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। नेट जीरो का सीधा सा मतलब है कि देश वातावरण में जितनी कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ेगा, उतने ही पेड़-पौधे लगाकर उसे सोख भी लेगा। इस लक्ष्य को पाने के लिए कोयले से बनने वाली बिजली पर निर्भरता को कम करना बेहद जरूरी है। भारत में घरेलू यूरेनियम का भंडार काफी सीमित है, जो हमारे सभी परमाणु रिएक्टरों की भूख शांत नहीं कर पाता। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया से मिलने वाला यूरेनियम भारत के न्यूक्लियर पावर प्लांट्स के लिए संजीवनी का काम करेगा। आपको बता दें परमाणु रिएक्टर में यूरेनियम के परमाणुओं का विखंडन किया जाता है, जिससे भयंकर गर्मी पैदा होती है। इस गर्मी से पानी को खौलाकर भाप में बदला जाता है और फिर उस भाप के भारी प्रेशर से बड़े-बड़े टर्बाइन चलाकर बिजली पैदा की जाती है, जो पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त होती है।

वहीं सिर्फ न्यूक्लियर एनर्जी ही नहीं, दोनों देशों के बीच बिजनेस के मोर्चे पर भी जमकर लक्ष्मी बरस रही है। दोनों देशों के बीच एक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पहले से लागू है, जिसे 2 अप्रैल 2022 को साइन किया गया था और यह 29 दिसंबर 2022 से पूरी तरह एक्शन में है। इस समझौते का जादू ऐसा चला है कि दोनों देशों के बाजारों के दरवाजे एक-दूसरे के लिए पूरी तरह खुल गए हैं। ऑस्ट्रेलिया ने भारत से जाने वाले ज्यादातर सामानों पर आयात शुल्क को या तो बिल्कुल खत्म कर दिया है या बेहद कम कर दिया है, जिसके जवाब में भारत ने भी चरणबद्ध तरीके से ऑस्ट्रेलियाई सामानों पर ड्यूटी कम की है। इसका नतीजा यह हुआ कि फाइनेंशियल ईयर 2020-21 में जो द्विपक्षीय व्यापार महज 4 अरब अमेरिकी डॉलर के आसपास था, वो वित्त वर्ष 2024-25 में रॉकेट की रफ्तार से बढ़कर 8.5 अरब अमेरिकी डॉलर के पार पहुंच गया है!

वहीं दूसरी तरफ इस बेहद सफल और हाई-प्रोफाइल दौरे के बीच एक ऐसी खबर भी सामने आई जिसने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए। जी हां ऑस्ट्रेलिया दौरे पर पहुंचे पीएम मोदी को सोशल मीडिया के जरिए जान से मारने की धमकी मिली थी, जिसकी जांच अब ऑस्ट्रेलियन पुलिस बहुत गंभीरता से कर रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह पूरी साजिश फेसबुक पर रची गई थी। दरअसल, मेलबर्न में होने वाले 'मेलबर्न मीट्स मोदी' कार्यक्रम के प्रमोशन के लिए फेसबुक पर एक पोस्ट डाली गई थी। उसी पोस्ट के नीचे कमेंट बॉक्स में अबू मुस्तफा नाम के एक संदिग्ध फेसबुक अकाउंट से बेहद खौफनाक बात लिखी गई। उस कमेंट में लिखा था- 'स्टेडियम की छत कार्यक्रम के दौरान बंद रहनी चाहिए, नहीं तो वह ऑस्ट्रेलिया अपनी मौत के लिए आएगा।' इस धमकीभरे कमेंट के सामने आते ही हड़कंप मच गया और तुरंत इसकी जानकारी ऑस्ट्रेलियाई सुरक्षा एजेंसियों को दी गई, जिन्होंने पूरे दौरे के दौरान पीएम मोदी की सुरक्षा को अभेद्य किले में तब्दील कर दिया। 

वहीं इंडोनेशिया की तीन दिवसीय यात्रा खत्म करके जब पीएम मोदी विक्टोरिया के गवर्नमेंट हाउस पहुंचे, तो ऑस्ट्रेलियाई पीएम ने खुद उनका भव्य स्वागत किया और उन्हें शानदार 'गार्ड ऑफ ऑनर' दिया गया। इसके बाद हुए तीसरे भारत-ऑस्ट्रेलिया एनुअल शिखर सम्मेलन में दोनों देशों ने आतंकवाद के खिलाफ आर-पार की जंग का एलान कर दिया। संयुक्त बयान में दोनों प्रधानमंत्रियों ने कश्मीर के पहलगाम और ऑस्ट्रेलिया के बॉन्डी बीच पर हुए भयानक आतंकवादी हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की। दोनों देशों ने साफ कहा कि आतंकवाद पूरी मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा है। सिर्फ आतंकी ही नहीं, बल्कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले हिंसक चरमपंथ, ऑनलाइन कट्टरपंथ, आतंकियों की फंडिंग करने वाले आकाओं के खिलाफ वैश्विक स्तर पर मिलकर कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए दोनों देश खुफिया जानकारी और नई टेक्नोलॉजी को आपस में साझा करेंगे।

कुल मिलाकर, मेलबर्न से उठी दोस्ती की यह गूंज अब बीजिंग से लेकर वाशिंगटन तक सुनाई दे रही है और यूरेनियम की इस चमक से भारत के विकास की रफ्तार अब और भी ज्यादा हाई-वोल्टेज होने वाली है!

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