रातों-रात नोटिफिकेशन जारी, प्रियंका-मोदी में तीखी बहस
दिल्ली की सत्ता के गलियारों में गुरुवार को उस वक्त हड़कंप मच गया जब केंद्रीय कानून मंत्रालय ने अचानक एक नोटिफिकेशन जारी किया। जिस नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023 पर चर्चा चल रही थी, उसे सरकार ने रातों-रात आधिकारिक तौर पर लागू कर दिया है। अब यह कानून कागजों पर पूरी तरह प्रभावी है। लेकिन असली रोमांच तो संसद के भीतर देखने को मिला। जहां आज शाम 4 बजे महिला आरक्षण से जुड़े संशोधनों पर निर्णायक वोटिंग हुई। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने साफ कर दिया है कि प्रधानमंत्री मोदी की अपील के बाद अब किसी भ्रम की गुंजाइश नहीं है। वहीं, गृह मंत्री अमित शाह ने आंकड़ों के जरिए दक्षिण भारत के राज्यों की उन आशंकाओं को शांत करने की कोशिश की है, जो परिसीमन के नाम पर अपनी ताकत कम होने का डर जता रहे हैं।
दरअसल, सवाल उठ रहे हैं कि जब संसद में बिल पर बहस चल रही है, तो नोटिफिकेशन क्यों? दरअसल, इसके पीछे एक बड़ा कानूनी पेच है। किसी भी कानून में बदलाव या संशोधन करने के लिए जरूरी है कि वह पहले आधिकारिक रूप से कानून बनकर लागू हो। सरकार 2029 में ही महिलाओं को आरक्षण देना चाहती है, और इसके लिए पुराने प्रावधानों में बदलाव जरूरी था। इसीलिए पहले कानून को लागू किया गया ताकि अब इसमें संशोधन कर 2011 की जनगणना को आधार बनाया जा सके। वहीं सदन में कांग्रेस की ओर से मोर्चा संभालते हुए प्रियंका गांधी ने सरकार की नीयत पर सीधे सवाल दागे। उन्होंने दो टूक कहा कि 2023 के बिल में नई जनगणना की बात थी, लेकिन अब सरकार 2011 के पुराने आंकड़ों और परिसीमन के जरिए लाना चाह रही है। प्रियंका ने तंज कसते हुए कहा कि महिलाओं को सामान हक देने की शुरुआत भी नेहरू नाम के व्यक्ति ने की थी। लेकिन वो जवाहर लाल नेहरू नहीं मोतीलाल नेहरू थे।
दरअसल, विपक्ष का आरोप है कि 2029 का लक्ष्य तो ठीक है, लेकिन इसकी आड़ में सीटों का जो बंटवारा होगा, उसमें राजनीति की बू आ रही है। वहीं दूसरी तरफ प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष को आईना दिखाते हुए कहा कि जिसने भी महिलाओं के अधिकारों का विरोध किया है, जनता ने उसका हाल बुरा किया है। पीएम ने दो टूक शब्दों में कहा कि देश की नारी शक्ति सिर्फ निर्णय नहीं, बल्कि हमारी नीयत को देख रही है। उन्होंने लोकसभा में कहा, "अगर आप इसका विरोध करेंगे तो स्वाभाविक है कि इसका मुझे राजनीतिक लाभ होगा लेकिन साथ चलेंगे तो किसी को भी नहीं होगा।
आपको बता दें विपक्षी दलों का सबसे बड़ा विरोध परिसीमन को लेकर है। उनका कहना है कि वे महिला आरक्षण के पक्ष में तो हैं, लेकिन इसे परिसीमन से अलग किया जाए। विपक्ष को डर है कि नई जनगणना और परिसीमन के बाद उत्तर भारत की सीटें बढ़ जाएंगी और दक्षिण के राज्य राजनीतिक रूप से कमजोर हो जाएंगे। टीएमसी, डीएमके और सपा जैसी पार्टियों ने इस पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। वहीं महिला आरक्षण के इस शोर-शराबे के बीच आज राज्यसभा से एक सुखद खबर भी आई। जेडीयू नेता हरिवंश नारायण सिंह को लगातार तीसरी बार राज्यसभा का उपसभापति चुन लिया गया है। पीएम मोदी ने उनकी कार्यशैली की सराहना करते हुए इसे अनुभव का सम्मान बताया। वहीं, विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी उन्हें बधाई दी, हालांकि तंज के साथ यह भी कहा कि आप इस पद के पूरी तरह हकदार हैं।
कुल मिलाकर देखा जाए तो तस्वीर अब साफ होती दिख रही है। सरकार का रोडमैप बिल्कुल क्लियर है कि पहले कानून लागू करो, फिर उसमें संशोधन करो और 2029 के चुनाव में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण के साथ मैदान में उतार दो।
अब आने वाले समय में पता चलेगा कि देश की आधी आबादी को उनका हक कितनी जल्दी मिलेगा। क्या विपक्ष सरकार के संशोधनों पर साथ आएगा या फिर परिसीमन का मुद्दा इस ऐतिहासिक कदम की राह में रोड़ा बनेगा? संसद में आज जो हुआ वह आने वाले दशकों तक भारत की लोकतांत्रिक दिशा तय करेगा।

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