'नारी शक्ति वंदन सम्मेलन', पीएम मोदी ने किया मीरा कुमार का वंदन

दिल्ली के विज्ञान भवन से आज एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने भारतीय लोकतंत्र की मर्यादा और भविष्य दोनों को नई परिभाषा दे दी है। जी हां मौका था 'नारी शक्ति वंदन सम्मेलन' का, जहाँ देश की दिग्गज महिलाओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बड़ा एलान कर दिया। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा रही उस खास लम्हे की, जब पीएम मोदी ने प्रोटोकॉल और दलगत राजनीति से ऊपर उठकर विपक्षी नेता और देश की पहली महिला लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार का नाम लिया। यह केवल एक संबोधन नहीं, बल्कि उस 'नारी शक्ति' को सलाम था जिसने भारत की लोकतांत्रिक जड़ों को सींचा है।

दरअसल, सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी ने जब अपने संबोधन में पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार का नाम लिया, तो पूरा विज्ञान भवन तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा। मीरा कुमार, जो दिग्गज नेता बाबू जगजीवन राम की सुपुत्री हैं और राज्यसभा सांसद सुधा मूर्ति के बगल में बैठी थीं, उन्हें विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। 

आपको बता दें मीरा कुमार 2009 में भारत की पहली महिला लोकसभा अध्यक्ष बनी थीं। पीएम मोदी द्वारा उनका विशेष उल्लेख करना यह दिखाता है कि 'नारी शक्ति वंदन' का यह मिशन राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रनीति का हिस्सा बन चुका है। पीएम मोदी ने अपने भाषण में सबसे बड़ा धमाका 16 अप्रैल की तारीख को लेकर किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को लागू करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए जा रहे हैं। जिसके लिए 16, 17 और 18 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है। इसका मकसद दशकों से लंबित महिलाओं के एक-तिहाई यानि 33% आरक्षण को अमली जामा पहनाने की प्रक्रिया शुरू करना है। 

पीएम मोदी ने चतुराई से विपक्ष को उनके पुराने स्टैंड की याद भी दिलाई। उन्होंने कहा कि 2023 में जब यह अधिनियम पास हुआ था, तब सभी दलों ने एक सुर में इसे 2029 तक लागू करने पर जोर दिया था। अब सरकार उसी दिशा में निर्णायक कदम उठाने जा रही है ताकि महिलाओं को 'सपनों के पंख' मिल सकें। प्रधानमंत्री ने आंकड़ों के जरिए भारत की बदलती तस्वीर पेश की:

देश में 14 लाख से ज्यादा महिलाएं स्थानीय निकायों में नेतृत्व कर रही हैं।
करीब 21 राज्यों में पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी 50% तक पहुँच चुकी है।
जनधन योजना के तहत 32 करोड़ से ज्यादा महिलाओं के बैंक खाते खुले।

जाहिर है विज्ञान भवन से उठी यह गूँज आज कश्मीर से कन्याकुमारी तक सुनाई दे रही है। पीएम मोदी ने आज मीरा कुमार का नाम लेकर न केवल विपक्ष को चौंकाया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि देश की आधी आबादी के लिए वे किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। 16 अप्रैल को जब संसद की विशेष बैठक शुरू होगी, तब पूरी दुनिया की निगाहें भारत की तरफ होंगी।
क्या यह विधेयक 2029 से पहले ही लागू होकर देश की राजनीति का चेहरा बदल देगा? क्या भारतीय लोकतंत्र की निर्णय प्रक्रिया में अब महिलाओं का बराबर का वंदन होगा? लेकिन इन सबके बीच एक बात तो साफ है कि नारी शक्ति अब केवल वोट बैंक नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की कमांडर बनने जा रही है। 

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