MLA चैतर वसावा ने पुलिस के गलत इस्तेमाल पर असेंबली में आवाज़ उठाई

नर्मदा - डेडियापाड़ा MLA चैतर वसावा ने आज असेंबली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी बात रखते हुए कहा कि जब होम मिनिस्टर और डिप्टी चीफ मिनिस्टर पुलिस, जेल और लॉ डिपार्टमेंट की मांगों को लेकर होम डिपार्टमेंट आए, तो मुझे अपनी बात रखने का मौका मिला। होम डिपार्टमेंट गुजरात के साढ़े छह करोड़ लोगों की सिक्योरिटी के लिए ज़िम्मेदार है और वे इसकी कसम भी खाते हैं। आज होम डिपार्टमेंट में दो तरह के ऑफिसर हैं। एक वो ऑफिसर जो अपनी जान जोखिम में डालकर भी गुजरात के लोगों को सेफ रखने का काम करते हैं और हम ऐसे ऑफिसर को सलाम करते हैं। लेकिन दूसरे तरह के ऑफिसर पॉलिसी, रूल और लॉ के साथ-साथ कॉन्स्टिट्यूशन को भी नहीं मानते, वे “ऊपर से इंस्ट्रक्शन” जैसे जवाब देते हैं। मैंने अपना एग्जांपल भी दिया और जब हम ATV मीटिंग में हुई घटना के बारे में सवाल पूछते हैं कि “इन्वेस्टिगेशन कहां तक ​​पहुंची है?” तो हमें एक ही जवाब मिलता है कि “इन्वेस्टिगेशन चल रही है।” दूसरी तरफ, मुझे MLA होने के बावजूद LCB, SOG और नर्मदा जिले के DYSP ने बिना किसी वारंट के दोपहर 2:00 बजे गिरफ्तार कर लिया और कहा कि “हमें किसी वारंट की ज़रूरत नहीं है, हमारे पास पावर है और हमें ऊपर से निर्देश हैं” और बाद में मेरे खिलाफ केस बनाकर FIR कर दी गई।

इसके अलावा, MLA चैतर वसावा ने कहा कि अगर किसी MLA को दोपहर 2 बजे गिरफ्तार किया जाता है और शाम 07:00 बजे शिकायत दर्ज की जाती है, तो आम लोगों का क्या होगा? गुजरात में पुलिस दो तरह से काम करती है। अगर आप पार्टी में रहते हैं, तो कोई कानून या नियम आप पर लागू नहीं होगा और अगर आप विपक्ष में रहते हैं, अगर आप शांति से धरना, आंदोलन करने की बात भी करते हैं, तो पुलिस आपको पगड़ी पहनाकर ले जाएगी और आप पर 144 समेत जुर्म दर्ज किए जाएंगे, और उन पर झूठे केस किए जाएंगे, चाहे वे विपक्ष के MLA हों या कोई और। सत्ता में बैठे लोग पुलिस का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं, यह गुजरात के लोगों के लिए चिंता की बात है। हमने सदन में पुलिस के बर्ताव के बारे में बात की है। हमारे देश के क्रांतिकारियों जैसे महात्मा गांधी, सरदार पटेल ने जेल जाकर हमारे देश को आज़ादी दिलाई है। भगवान बिरसा मुंडा ने भी 25 साल की उम्र में अपनी जान दे दी थी। इसलिए हम लोग भी जेल जाने से नहीं डरते, लेकिन हमें डराने के लिए झूठी FIR दर्ज करके हमें झूठे जेलों में डाल दिया जाता है और झूठी कसम दिलाकर हमें अपने ही इलाके में जाने से रोका जाता है, जो लोकतंत्र का उल्लंघन है। खाकी की आड़ में विपक्ष की सरकार की आलोचना को दबाने की जो कोशिशें की जा रही हैं, वे चिंता की बात हैं।

रिपोर्टर - साबिर मेमन 

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