NASA की योजना: चंद्रमा पर न्यूक्लियर रिएक्टर कैसे काम करेगा
NASA और अमेरिकी ऊर्जा विभाग (DOE) चंद्रमा पर न्यूक्लियर रिएक्टर स्थापित करने की योजना बना रहे हैं। यह कदम Artemis चंद्र मिशन और भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए स्थायी और भरोसेमंद बिजली सुनिश्चित करने के उद्देश्य से है।
चंद्रमा पर न्यूक्लियर रिएक्टर क्यों जरूरी है?
चंद्रमा पर एक दिन और रात लगभग दो सप्ताह लंबी होती है। इस वजह से सोलर पैनल हमेशा पर्याप्त बिजली नहीं दे पाते। न्यूक्लियर रिएक्टर इस चुनौती का समाधान होगा क्योंकि यह सूरज की रोशनी पर निर्भर नहीं करता और लगातार बिजली प्रदान कर सकता है।
यह बिजली न केवल वैज्ञानिक अनुसंधान और रोबोटिक मिशनों के लिए जरूरी है, बल्कि चंद्रमा पर भविष्य की बस्तियों और जीवन समर्थन प्रणालियों के संचालन के लिए भी आवश्यक है।
न्यूक्लियर रिएक्टर कैसे काम करेगा?
चंद्रमा पर स्थापित रिएक्टर नाभिकीय विखंडन (fission) के माध्यम से ऊर्जा उत्पन्न करेगा।
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जब यूरेनियम-235 या प्लूटोनियम-239 के नाभिक टूटते हैं, तो गर्मी (heat) उत्पन्न होती है।
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यह गर्मी टर्बाइन को चलाती है और टर्बाइन बिजली का उत्पादन करती है।
NASA का डिज़ाइन ऐसा है कि रिएक्टर हल्का और सुरक्षित होगा। इसे रोबोट या अंतरिक्ष यात्री आसानी से स्थापित कर सकते हैं। साथ ही, यह रिएक्टर कम से कम दस साल तक लगातार बिजली उत्पादन कर सकेगा।
रिएक्टर की क्षमता और लाभ
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प्रारंभिक डिज़ाइन लगभग 40 किलोवॉट बिजली दे सकता है, जो लगभग 30 घरों के बराबर है।
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भविष्य में इसे 100 किलोवॉट या उससे अधिक तक बढ़ाया जा सकता है।
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यह रिएक्टर मौसम, सूरज की रोशनी या रात पर निर्भर नहीं होगा।
इस प्रकार, यह चंद्रमा पर सतत और भरोसेमंद ऊर्जा का स्रोत बनेगा।
समय सीमा और भविष्य की योजनाएँ
NASA का लक्ष्य है कि 2030 तक न्यूक्लियर रिएक्टर चंद्रमा पर स्थापित किया जाए। यह प्रोजेक्ट Artemis कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य चंद्रमा पर दीर्घकालिक उपस्थिति और भविष्य में मंगल मिशनों की तैयारी करना है।
सारांश
| विषय | जानकारी |
|---|---|
| क्या | चंद्रमा पर न्यूक्लियर रिएक्टर स्थापित करना |
| क्यों | निरंतर और भरोसेमंद बिजली चाहिए |
| कैसे | नाभिकीय विखंडन से ऊर्जा → टर्बाइन → बिजली |
| लाभ | लगातार ऊर्जा, सूरज या मौसम पर निर्भर नहीं |
| लक्ष्य समय | 2030 तक |
चंद्रमा पर न्यूक्लियर रिएक्टर की स्थापना अंतरिक्ष अन्वेषण के भविष्य में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह केवल वैज्ञानिक अनुसंधान और मिशनों के लिए बिजली प्रदान नहीं करेगा, बल्कि भविष्य की अंतरिक्ष बस्तियों और लंबी अवधि के मिशनों को भी संभव बनाएगा। NASA और अमेरिकी ऊर्जा विभाग की यह योजना चंद्रमा पर निरंतर ऊर्जा की चुनौती को हल करने के लिए एक मजबूत और टिकाऊ समाधान प्रस्तुत करती है।


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