एक गरीब लड़की की श्रद्धा और देवी माँ की कृपा की प्रेरणादायक कथा
एक गाँव में प्रिया नाम की एक गरीब लेकिन बहुत श्रद्धालु लड़की रहती थी। नवरात्रि का समय था और पूरे गाँव में देवी दुर्गा की पूजा की तैयारियाँ चल रही थीं। हर घर में गरबा, पूजा और भंडारे की धूम थी, लेकिन प्रिया के घर में इतने साधन नहीं थे कि वह बड़े स्तर पर पूजा कर सके।
फिर भी प्रिया ने हार नहीं मानी। उसने अपने छोटे से घर को साफ किया, एक मिट्टी का दीपक जलाया और देवी दुर्गा की एक छोटी सी प्रतिमा के सामने श्रद्धा से प्रार्थना करने लगी। उसके पास चढ़ाने के लिए महंगे फूल या प्रसाद नहीं थे, इसलिए उसने अपने हाथों से बनाए हुए चने और गुड़ का भोग लगाया।
रात के समय गाँव के कुछ लोग प्रिया के घर के पास से गुजरे तो उन्होंने देखा कि उसके घर में एक अद्भुत प्रकाश फैल था, और वातावरण बहुत शांत व पवित्र लग रहा था जिअसे माँ दुर्गा स्वयं वहाँ विराज रही हों। तब गाँव वासियों को समझ आया कि सच्ची भक्ति धन या दिखावे पर निर्भर नहीं करती।
अगले दिन गाँव के लोगों ने प्रिया की सादगी और श्रद्धा की सराहना की और उससे सीख लेकर अपनी पूजा में भी भक्ति और सादगी को महत्व देना शुरू किया।
शिक्षा :-
सच्ची भक्ति का संबंध दिखावे या धन से नहीं, बल्कि सच्चे मन और श्रद्धा से होता है। नवरात्रि हमें यही सिखाती है कि हम अपने अंदर की बुराइयों को दूर करके सच्चे मन से अच्छे कर्म करें।

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