Navratri 2026: डायबिटीज के मरीज व्रत रखने से पहले जान लें ये जरूरी बातें, छोटी सी लापरवाही पड़ सकती है भारी

नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के साथ बड़ी संख्या में लोग उपवास भी रखते हैं। लेकिन अगर आप डायबिटीज यानी मधुमेह से पीड़ित हैं, तो व्रत के दौरान अपनी सेहत को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतना जरूरी है। लंबे समय तक खाली पेट रहना, खाने के समय में बदलाव और दवाइयों का सही तरीके से प्रबंधन न होने पर ब्लड शुगर का स्तर बिगड़ सकता है। ऐसे में धार्मिक आस्था के साथ स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है।
 
व्रत के खाने को हल्के में न लें
 
व्रत में अक्सर लोग साबूदाना खिचड़ी, आलू, कुट्टू की पूड़ी, सिंघाड़े के आटे से बनी चीजें और मीठे फल खाते हैं। हालांकि, व्रत में खाए जाने वाले इन खाद्य पदार्थों में से कई में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक हो सकती है। ज्यादा मात्रा में सेवन करने से ब्लड शुगर बढ़ने की आशंका रहती है।
 
इसलिए व्रत के दौरान खाने की मात्रा और उसके पोषण पर ध्यान दें। अपनी डाइट में डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के अनुसार प्रोटीन और फाइबर वाले खाद्य पदार्थ शामिल करें। केवल व्रत का खाना होने की वजह से किसी चीज को बिना मात्रा का ध्यान रखे खाना सही नहीं है।
 
लंबे समय तक भूखे रहने से हो सकती है परेशानी
 
डायबिटीज के कुछ मरीजों में लंबे समय तक भोजन न करने से ब्लड शुगर खतरनाक स्तर तक गिर सकता है। खासकर इंसुलिन या ऐसी दवाइयां लेने वाले लोगों को हाइपोग्लाइसीमिया का जोखिम अधिक हो सकता है, जिससे चक्कर आने, हाथ कांपने, पसीना निकलने और दिल की धड़कन तेज होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
 
व्रत शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें। टाइप-1 डायबिटीज, अनियंत्रित ब्लड शुगर, बार-बार शुगर कम होने की समस्या या डायबिटीज से जुड़ी अन्य जटिलताओं वाले लोगों के लिए उपवास विशेष रूप से जोखिम भरा हो सकता है।
 
व्रत के दौरान ब्लड शुगर की जांच जरूरी
 
उपवास के समय ब्लड शुगर की नियमित निगरानी करना महत्वपूर्ण है। कितनी बार जांच करनी है, यह आपकी दवाइयों, डायबिटीज के प्रकार और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करता है। यदि आप इंसुलिन या शुगर कम करने वाली दवाएं लेते हैं, तो निगरानी को लेकर विशेष सावधानी बरतें।
 
यदि अचानक कमजोरी, कंपकंपी, पसीना, चक्कर, तेज भूख या भ्रम जैसे लक्षण महसूस हों, तो इन्हें नजरअंदाज न करें। ऐसे संकेत ब्लड शुगर कम होने की ओर इशारा कर सकते हैं। वहीं, बहुत ज्यादा प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना और असामान्य थकान बढ़े हुए ब्लड शुगर के लक्षण हो सकते हैं।
 
शुगर कम होने पर क्या करें?
 
यदि ब्लड शुगर 70 mg/dL से नीचे पहुंच जाए, तो इसे कम शुगर यानी हाइपोग्लाइसीमिया माना जाता है। ऐसी स्थिति में व्रत जारी रखने के बजाय तुरंत उचित उपचार करना जरूरी है। आमतौर पर होश में मौजूद व्यक्ति को 15 ग्राम तेजी से असर करने वाला कार्बोहाइड्रेट दिया जाता है और 15 मिनट बाद दोबारा शुगर जांची जाती है। यदि स्तर अब भी कम हो, तो उपचार दोहराने की जरूरत पड़ सकती है।
 
यदि मरीज बेहोश हो जाए या निगलने में परेशानी हो, तो मुंह से कुछ भी न दें और तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।
 
दवाइयों में खुद से बदलाव न करें
 
व्रत के दौरान खाने का समय बदलने से डायबिटीज की दवाओं और इंसुलिन की जरूरत भी प्रभावित हो सकती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि दवा की खुराक अपने मन से कम कर दी जाए या दवा लेना बंद कर दिया जाए।
 
उपवास शुरू करने से पहले डॉक्टर से अपनी दवाइयों के समय, खुराक, भोजन और ब्लड शुगर की निगरानी को लेकर स्पष्ट योजना बनाएं। इससे संभावित परेशानियों को कम करने में मदद मिल सकती है।
 
व्रत खोलते समय भी रखें ध्यान
 
लंबे समय तक भूखे रहने के बाद एक ही बार में बहुत ज्यादा खाना खाने से बचें। व्रत खोलते समय संतुलित मात्रा में भोजन करें और अधिक कार्बोहाइड्रेट वाली चीजों को एक साथ बड़ी मात्रा में खाने से परहेज करें। पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है, बशर्ते डॉक्टर ने किसी विशेष कारण से तरल पदार्थ सीमित करने की सलाह न दी हो।
 
अगर ब्लड शुगर बहुत बढ़ जाए या गिर जाए, लगातार उल्टी हो, अत्यधिक कमजोरी महसूस हो अथवा चक्कर आने जैसी समस्या हो, तो व्रत जारी न रखें और जरूरत के अनुसार तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

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