अगर नवरात्रि व्रत टूट जाए तो घबराएं नहीं, अपनाएं ये उपाय
नवरात्रि हिंदू धर्म में एक अत्यंत पवित्र पर्व माना जाता है, जिसमें नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है और श्रद्धालु उपवास रखते हैं। परंतु कभी-कभी अनजाने में व्रत टूट सकता है-जैसे कुछ खा लेना, समय पर पूजा न करना, या नियमों का उल्लंघन हो जाना। ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए? आइए जानें।
व्रत टूटने के सामान्य कारण:
भूलवश कुछ ऐसा खा लेना जो व्रत में निषिद्ध हो।
समय पर पूजा या आरती न कर पाना।
व्रत के दौरान क्रोध, निंदा या अपशब्द बोलना।
व्रत में अनजाने में अन्न या प्याज-लहसुन का सेवन।
अगर व्रत टूट जाए तो क्या करें?
1. मन से क्षमा मांगें (प्रायश्चित करें):
मां दुर्गा से सच्चे मन से क्षमा मांगें। ईश्वर करुणामयी होते हैं और भक्त की भावना को प्रधानता देते हैं।
“ॐ क्षमस्व भगवति दुर्गे” मंत्र का जाप करें।
2. अगले दिन व्रत या उपवास करें:
यदि संभव हो, तो अगले दिन एक समय फलाहार करके प्रायश्चित व्रत रखें।
इससे आपकी श्रद्धा और निष्ठा प्रकट होती है।
3. मां दुर्गा का विशेष पूजन करें:
घर में कलश स्थापित कर दुर्गा सप्तशती या देवी कवच का पाठ करें।
मां को लाल फूल, हलवा-पूरी और नारियल अर्पित करें।
4. दान-पुण्य करें:
किसी जरूरतमंद को अन्न, वस्त्र, या दक्षिणा का दान करें।
कन्या पूजन करना भी बहुत फलदायी माना गया है।
5. व्रत की पुनरारंभ भावना रखें:
शेष व्रत को श्रद्धा और नियमपूर्वक पूरा करें।
भगवान भावना के भूखे होते हैं, गलती हो जाने पर सुधार की भावना सबसे बड़ी होती है।
शास्त्रों में क्या कहा गया है?
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, यदि व्रत भूल से टूट जाए तो ईश्वर से क्षमा मांगकर व्रत को यथासंभव जारी रखना चाहिए। “भावना प्रधानम्”..अर्थात नियमों से बड़ी होती है हमारी भावना।
नवरात्रि में इन बातों का रखें विशेष ध्यान:
व्रत से जुड़ी नियमों की जानकारी पहले ही ले लें।
भूलवश व्रत टूटे तो घबराएं नहीं, मां दुर्गा क्षमाशील हैं।
नम्रता, सेवा और भक्ति का मार्ग न छोड़ें।
व्रत का उद्देश्य सिर्फ उपवास करना नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म से पवित्र रहना है। यदि नवरात्रि का व्रत भूल से टूट भी जाए, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। श्रद्धा और भक्ति से किया गया प्रायश्चित मां दुर्गा को अवश्य प्रिय होता है।


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