हरियाणा में मामूली चूक, लेकिन बाकी राज्यों में NDA का दबदबा

हाल ही में हुए राज्यसभा चुनावों में NDA ने बिहार और ओडिशा में शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन हरियाणा में बेहद करीबी मुकाबले में एक सीट गंवा दी। कुल 11 सीटों पर हुए चुनाव में NDA ने 9 सीटें जीत लीं, जबकि यह आंकड़ा 10 तक पहुंच सकता था।

बिहार की पांचों सीटों पर NDA उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। इनमें नीतीश कुमार, नितिन नवीन और उपेंद्र कुशवाहा जैसे बड़े नाम शामिल रहे। वहीं ओडिशा में चार में से तीन सीटें NDA के खाते में गईं, जहां मनमोहन सामल और सुजीत कुमार जैसे नेताओं ने जीत हासिल की।

हरियाणा: जहां खेल पलट गया

हरियाणा में मुकाबला बेहद दिलचस्प और तनावपूर्ण रहा। दो सीटों के लिए हुए चुनाव में एक सीट बीजेपी और दूसरी कांग्रेस को मिली। बीजेपी के संजय भाटिया की जीत लगभग तय थी, लेकिन दूसरी सीट पर कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध ने बेहद मामूली अंतर से बाज़ी मार ली।

बीजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल केवल 0.3% वोट वैल्यू से हार गए। कुल 83 वैध वोटों में जीत का आंकड़ा करीब 2767 था, जिसमें कांग्रेस उम्मीदवार को 2800 वोट वैल्यू मिली, जबकि नांदल 2733 पर रह गए।

हार-जीत के पीछे के कारण

इस करीबी हार के पीछे कई वजहें रहीं। INLD विधायकों का मतदान से दूर रहना, कुछ वोटों का अमान्य होना और क्रॉस-वोटिंग ने नतीजों को प्रभावित किया। अगर INLD ने निर्दलीय उम्मीदवार का समर्थन किया होता, तो परिणाम बदल सकता था।

कांग्रेस के लिए यह जीत खास रही, क्योंकि पिछले चुनावों की हार के बाद उसने वापसी की। इस जीत का श्रेय भूपेंद्र सिंह हुड्डा को दिया जा रहा है।

 

कुल मिलाकर NDA ने चुनावों में मजबूत पकड़ दिखाई, लेकिन हरियाणा में बेहद छोटी चूक ने एक अतिरिक्त सीट उससे छीन ली। यह नतीजा दिखाता है कि राजनीति में हर एक वोट कितना अहम होता है—और कभी-कभी 0.3% भी खेल बदल देता है।

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