मोदी का पेपर लीक माफियाओं पर बड़ा ऐलान! संसद में विपक्ष का हंगामा
देश की राजधानी दिल्ली में इस वक्त सियासी भूचाल आ चुका है! मॉनसून सत्र का आगाज़ होते ही संसद के अंदर और बाहर ऐसा बवंडर उठा कि पूरी केंद्र सरकार हिल गई. NEET पेपर लीक का मामला और जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुआ पुलिसिया एक्शन अब देश का सबसे गर्म मुद्दा बन चुका है. संसद भवन के भीतर जहां विपक्ष के लगातार और प्रचंड हंगामे के चलते लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही पूरी तरह पटरी से उतर गई, वहीं संसद परिसर के बाहर जंतर-मंतर पर छात्रों की चीखें और लाठियों की गूंज सुनाई दी. इसी बीच एनडीए की 'मंगल मिलन' बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक के माफियाओं को लेकर ऐसा कड़ा रुख अपनाया, जिसने पूरी सियासत में तहलका मचा दिया है! संसद से लेकर सड़कों के संग्राम तक और पक्ष-विपक्ष की इस ज़बरदस्त भिड़ंत की सनसनीखेज डिटेल आइए आपको बताते हैं!
मॉनसून सत्र के पहले दिन से ही संसद में काम-काज पूरी तरह से ठप पड़ गया है. लोकसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे जैसे ही शुरू हुई, विपक्षी सांसदों ने 'छात्रों के साथ न्याय करो' और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के नारे लगाते हुए संसद में धावा बोल दिया. स्पीकर ओम बिरला ने बार-बार सांसदों से अपनी सीटों पर लौटने की अपील की, लेकिन गुस्सा शांत नहीं हुआ. नौबत यह आई कि पहले दिन लोकसभा को एक-दो बार नहीं, बल्कि पूरे 6 बार स्थगित करना पड़ा और आखिरकार दोपहर तीन बजे कार्यवाही पूरे दिन के लिए समाप्त कर दी गई. यही हाल मानसून सत्र के आज दूसरे दिन भी देखने को मिला, जहां संसद शुरू होते ही विपक्ष फिर से हमलावर हो गया और कार्यवाही का रिपीट टेलीकास्ट देखने को मिला. विपक्षी शोर-शराबे के कारण दूसरे दिन भी संसद को तुरंत स्थगित करना पड़ा. उधर राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने मोर्चा संभालते हुए सीधे सरकार को कटघरे में खड़ा किया. उन्होंने भरे सदन में गरजते हुए कहा कि लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है और जंतर-मंतर पर अपनी जायज मांगों के लिए प्रदर्शन कर रहे मासूम छात्रों पर पुलिस बेरहमी से लाठियां बरसा रही है. राज्यसभा में भी अयोध्या के राम मंदिर में कथित दान घोटाले और छात्रों के उत्पीड़न पर ऐसा हंगामा हुआ कि उपसभापति हरिवंश की तमाम अपीलों के बावजूद सदन को 5 बार स्थगित करने के बाद पूरे दिन के लिए बंद करना पड़ा.
वहीं दूसरी तरफ संसद में मचे इस भयंकर गदर और नारेबाजी के बीच ही केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 34 से बढ़ाकर 38 करने वाला अहम विधेयक सदन के पटल पर पेश कर दिया. हालांकि, भारी शोर-शराबे की वजह से 'वंदे मातरम्' के अपमान को दंडनीय अपराध बनाने वाला प्रस्तावित विधेयक राज्यसभा में पेश नहीं हो सका. इस बीच संसद भवन के बाहर का माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया था. हजारों प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर बढ़ने की कोशिश की, जिन्हें पुलिस ने लोहे की बैरिकेडिंग लगाकर रोका. जब भीड़ बेकाबू होने लगी तो सुरक्षा बलों को लाठीचार्ज करना पड़ा और हवा में आंसू गैस के गोले छोड़े गए. एहतियात के तौर पर संसद के कई प्रवेश द्वारों को बंद तक करना पड़ा. वहीं संसद के बाहर बने इस जंग जैसे माहौल पर भाजपा सांसद कंगना रनौत का बड़ा बयान सामने आया. कंगना ने अपना डर बयां करते हुए कहा कि प्रदर्शन के दौरान संसद के भीतर मौजूद तमाम सांसद बुरी तरह सहमे और चिंतित थे. कंगना ने दिल्ली पुलिस की पीठ थपथपाते हुए कहा कि पुलिसकर्मियों ने ढाल बनकर संसद और सांसदों की सुरक्षा की, संयम दिखाया और स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में रखा.
आपको बता दें सड़क के संग्राम में समाजवादी पार्टी पूरी ताकत के साथ छात्रों की ढाल बनकर खड़ी हो गई. जहां संसद के अंदर सपा प्रमुख अखिलेश यादव सरकार पर लगातार तीखे बाण चला रहे थे, वहीं उनकी पत्नी और सपा सांसद डिंपल यादव पूरी ब्रिगेड के साथ जंतर-मंतर पर सड़कों पर उतर गईं. डिंपल यादव के साथ सपा सांसद इकरा हसन, प्रिया सरोज, रुचि वीरा और धर्मेंद्र यादव जैसे दिग्गजों ने छात्रों के साथ कंधा से कंधा मिलाकर प्रदर्शन किया. जंतर-मंतर पर डिंपल यादव के तेवर काफी आक्रामक दिखाई दिए. वो पुलिस बैरिकेड्स पर तैनात अधिकारियों से सीधे भिड़ गईं और उनकी तीखी बहस हुई. घायल छात्र-छात्राओं की मदद करते हुए डिंपल ने इस दिन को भारतीय लोकतंत्र का काला दिन करार दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने बर्बरता की सारी हदें पार कर दीं, बेटियों के साथ अभद्रता की गई और उनके कपड़े तक फाड़ दिए गए. वहीं, इस पूरे प्रोटेस्ट के दौरान कांग्रेस पार्टी का रवैया काफी सुस्त और लचर नजर आया. जब राहुल गांधी से जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन और लाठीचार्ज को लेकर सवाल पूछा गया, तो वे बिना कुछ बोले चुपचाप आगे निकल गए, जिससे मीडिया और राजनीतिक गलियारों में सवाल उठने लगे. प्रियंका गांधी ने भी सिर्फ इतना ही कहा कि "ये हमारे बच्चे हैं, सरकार को बात सुननी चाहिए." हालांकि, मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्यसभा में और देर शाम राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर सरकार पर निशाना साधकर भरपाई करने की कोशिश जरूर की.
आपको बता दें संसद और सड़कों पर मचे इस प्रचंड बवाल के बीच दिल्ली में NDA संसदीय दल की बेहद खास बैठक हुई, जिसे 'मंगल मिलन' नाम दिया गया. इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीट पेपर लीक और छात्रों के गुस्से पर सीधे और कड़े शब्दों में अपनी बात रखी. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बैठक की इनसाइड डिटेल देते हुए बताया कि पीएम मोदी ने लगभग 5 मिनट तक पेपर लीक के गंभीर मुद्दे पर बात की. पीएम मोदी ने साफ-साफ कहा कि केंद्र सरकार इस मुश्किल घड़ी में पूरी मजबूती से देश के छात्रों के साथ खड़ी है. पीएम ने बताया, "जैसे ही पेपर लीक की खबर आई, सरकार ने तुरंत एक्शन लेते हुए 13 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा. छात्रों का साल खराब न हो, इसलिए बिना देरी के री-नीटपरीक्षा कराकर तुरंत नतीजे घोषित किए गए." पीएम ने ऐलान किया कि देश के सबसे बड़े और शीर्ष वकीलों की मदद लेकर इन पेपर लीक माफियाओं को ऐसी सख्त से सख्त और मिसाली सजा दिलाई जाएगी कि भविष्य में कोई भी युवाओं के करियर के साथ खिलवाड़ करने की हिम्मत न कर सके.
देखा जाए तो दिल्ली के दिल में लगी यह सियासी आग अब इतनी आसानी से बुझने वाली नहीं है! एक तरफ नीट धांधली के खिलाफ न्याय की गुहार लगाते, लहूलुहान होते छात्र और सड़कों पर पुलिसिया बैरिकेड्स से भिड़ती डिंपल यादव-अखिलेश यादव की सपा ब्रिगेड, तो दूसरी तरफ संसद के भीतर मेज थपथपाता विपक्ष और माफियाओं की रूह कंपा देने वाली सजा का ऐलान करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी! जंतर-मंतर पर बिछा यह बारूद और संसद के गलियारों में मचा यह ऐतिहासिक गदर यह साफ़ बता रहा है कि बात अब सिर्फ एक परीक्षा की नहीं, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के हक और हुकूमत की साख बन चुकी है. अब देखना यह होगा कि प्रधानमंत्री के इस कड़े हंटर के बाद नीट के गुनहगार सलाखों के पीछे कितनी जल्दी पहुंचते हैं और सड़कों पर भड़की यह ज्वाला दिल्ली के तख्त को कितना हिलाती है!
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