पेपर लीक पर मोदी का मेगा एक्शन! फास्ट ट्रैक कोर्ट, नया कानून और बड़ा प्रशासनिक फेरबदल
देश में इस वक्त पेपर लीक के मुद्दे को लेकर जो सियासी और सामाजिक भूचाल आया है, उसने दिल्ली की सत्ता के गलियारों में हड़कंप मचा दिया है! नीट पेपर धांधली और प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों के खिलाफ लाखों छात्रों का गुस्सा सड़कों पर ऐसा फूटा कि सरकार के पसीने छूट गए. जंतर-मंतर से शुरू हुई यह चिंगारी अब पूरे देश में आग की तरह फैल चुकी है. विपक्ष का हमलावर रुख, सड़कों पर छात्रों का उग्र प्रदर्शन और बीजेपी के अपने ही वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी का तीखा संदेश...इन सबने केंद्र सरकार को ऐसा घेरा कि मोदी सरकार को रातों-रात डैमेज कंट्रोल के लिए फुल एक्शन मोड में आना पड़ा!
दरअसल, जब देश के युवाओं का आक्रोश सातवें आसमान पर पहुंचा, तो खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मोर्चा संभाला. गुरुवार की सुबह से लेकर देर रात तक, केंद्र सरकार ने ऐसे फैसले लिए जिससे साफ हो गया कि सरकार किसी भी कीमत पर इस आग को बुझाना चाहती है. पीएम मोदी ने युवाओं का भरोसा जीतने के लिए साफ शब्दों में कहा, "देश के युवाओं का हित और उनका भविष्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. पेपर लीक के गुनहगारों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा." सरकार ने इस मुद्दे को दबाने के लिए एक साथ कई बड़े कदम उठाए। जी हां शिक्षा विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए विनीत जोशी को हटाकर पंचायती राज विभाग भेज दिया गया और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी नरेश गंगवार को नया शिक्षा सचिव बनाया गया.
यह कदम उठाकर सरकार ने छात्रों को कड़ा सियासी संदेश देने की कोशिश की है. इतना ही नहीं 'सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम, 2024' को और ज़्यादा खूंखार बनाने की तैयारी है. नए संशोधनों के तहत व्यक्तिगत मामलों में सजा को 3-5 साल से बढ़ाकर 5 से 10 साल किया जा रहा है. जुर्माना भी 10 लाख से बढ़ाकर सीधे 1 करोड़ तक किया जा सकता है. वहीं संगठित गिरोहों के लिए तो शिकंजा और सख्त होगा. साथ ही मामलों में सालों-साल की देरी खत्म करने के लिए दिल्ली, बॉम्बे, कलकत्ता और मध्य प्रदेश हाई कोर्ट्स के अधिकार क्षेत्र में विशेष फ़ास्ट-ट्रैक अदालतें बनाने का ऐलान किया गया है, जहाँ हर रोज़ सुनवाई होगी. आपको बता दें सरकार ने बैकफुट पर आते हुए वांगचुक की तीन मुख्य मांगें मान लीं हैं।
जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों और 20 जुलाई के संसद मार्च में शामिल लोगों पर कोई पुलिस केस दर्ज नहीं होगा.
संसद के मॉनसून सत्र में पेपर लीक और परीक्षा सुधारों पर विस्तृत चर्चा होगी.
नीट पेपर लीक के तनाव में आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने पर सरकार सकारात्मक विचार करेगी.
दरअसल, सरकार के इस बैकफुट पर आने की एक बड़ी वजह पार्टी के भीतर से ही उठी आवाज भी है. बीजेपी के मार्गदर्शक मंडल के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज पर गहरा दुख जताया. उन्होंने साफ कहा कि युवाओं और खासकर महिला छात्रों पर बल प्रयोग देखना बेहद पीड़ादायक है. उनकी चिंताएं बिल्कुल वास्तविक हैं और सरकार को इन्हें सहानुभूति से हल करना चाहिए. उधर विपक्ष भी शांत बैठने के मूड में नहीं है. राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव से लेकर पूरा विपक्ष एक सुर में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ा हुआ है. विपक्ष का कहना है कि नए कानून और संशोधन तो ठीक हैं, लेकिन असली बात यह है कि इन्हें लागू कैसे किया जाएगा और नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मंत्री इस्तीफा कब देंगे? दूसरी तरफ इन सबके बीच पीएम मोदी ने देर रात वीडियो संदेश जारी कर छात्रों का दिल जीतने की कोशिश की और कहा कि अधिकारियों ने देर रात तक काम करके नए कड़े कानून का ड्राफ्ट उन्हें सौंप दिया है. मॉनसून सत्र के दूसरे हफ्ते में सरकार इस 'परीक्षा संशोधन बिल' को संसद से पास कराने की पूरी ताकत झोंकेगी.
ये था मोदी का संदेश, लेकिन इन तमाम बड़ी कार्रवाइयों, फैसलों और कड़े कानूनों के वादों के बीच देश का सबसे बड़ा सवाल अभी भी हवा में तैर रहा है कि क्या डैमेज कंट्रोल में जुटी मोदी सरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेगी? हालांकि सोनम वांगचुक ने साफ कर दिया है कि सरकार ने तत्काल इस्तीफे पर कोई लिखित या पक्का आश्वासन नहीं दिया है, लेकिन जिस तरह से पीएम मोदी खुद फ्रंटफुट पर आए हैं और कैबिनेट की बैठकों में धड़ाधड़ फैसले हो रहे हैं, उससे हर किसी की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या राजनीतिक जवाबदेही तय करने के लिए सरकार कोई और बड़ा और कड़ा फैसला लेने वाली है या नहीं!
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