NEET Protest: दिल्ली से पटना तक हंगामा, लाठीचार्ज और पत्थरबाजी
देश की सियासत में इस वक्त ऐसा तूफान उठा है, जिसकी गूंज संसद की दीवारों से लेकर देश की सड़कों तक सुनाई दे रही है...! एक परीक्षा का विवाद अब सिर्फ छात्रों की नाराजगी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह मुद्दा सत्ता और विपक्ष के बीच सबसे बड़े राजनीतिक टकराव में बदलता नजर आ रहा है। जी हां दिल्ली के जंतर-मंतर से सुलगी यह विरोध की चिंगारी अब ज्वाला बनकर पूरे देश में फैल चुकी है। मंगलवार को जब राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव जैसे दिग्गज नेता सीधे प्रधानमंत्री आवास घेरने पहुंचे, तो पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। फिर क्या था? इस एक कार्रवाई ने पूरे देश के सियासी बारूद में आग लगा दी! इसके बाद जो हुआ, उसकी तस्वीरें देखकर पूरा देश सन्न है। पटना में गोलियों की रफ्तार से पत्थर चले, हैदराबाद में लाठियां चटकीं, रायपुर में वाटर कैनन से बौछारें हुईं और मुंबई में पुलिस ने आंदोलन दबाने के लिए डिजिटल हंटर चला दिया। आइए आपको बताते हैं देश के कोने-कोने में मचे इस गदर और महासंग्राम की एक-एक रिपोर्ट!
दरअसल, इस महासंग्राम का मुख्य केंद्र दिल्ली का सबसे हाई-सिक्योरिटी जोन यानी प्रधानमंत्री आवास बना। जंतर-मंतर पर डटे छात्रों को समर्थन देने और सरकार को घेरने के लिए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव अचानक पीएम आवास के बाहर धरना देने पहुंच गए। विपक्ष का आरोप था कि NEET पेपर लीक मामले में सरकार चुप बैठी है और प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिसिया बर्बरता हो रही है। माहौल बिगड़ता देख दिल्ली पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया और राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत तमाम बड़े नेताओं को मौके पर ही हिरासत में ले लिया। हालांकि कुछ देर बाद उन्हें रिहा कर दिया गया, लेकिन तब तक इस खबर ने पूरे देश के कार्यकर्ताओं में उबाल पैदा कर दिया था। कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया, तो बीजेपी ने इसे सस्ता पब्लिसिटी स्टंट और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ बताया।
लेकिन देखते ही देखते ये विवाद पूरे देश में फैल गया और देश के अलग-अलग राज्यों से छात्रों के प्रदर्शन की तस्वीरें सामने आई। देश में सबसे खौफनाक और हिंसक तस्वीरें बिहार की राजधानी पटना से सामने आईं। यहां छात्र संगठनों ने गांधी मैदान से राजभवन तक विशाल मार्च निकाला। छात्र जब डाकबंगला चौराहे पहुंचे, तो पुलिस की बैरिकेडिंग देखकर उग्र हो गए और उस पर चढ़ गए। माहौल इतना बिगड़ा कि पुलिस को हटाने के लिए CISF और CRPF की टुकड़ियों को मैदान में उतरना पड़ा। वहीं उग्र भीड़ ने बैरिकेडिंग तोड़ दी और राजभवन की तरफ बढ़ गए। इस दौरान वहां से गुजर रहे बीजेपी नेताओं की गाड़ियों पर हमला कर दिया गया, जिसमें एक बीजेपी विधायक को अपनी जान बचाकर भागना पड़ा! यहां तक कि पटना IG की एस्कॉर्ट गाड़ी में भी तोड़फोड़ की गई।
वहीं जब छात्र मुख्यमंत्री आवास और सीएम सम्राट चौधरी के बंगले के करीब पहुंचे, तो पुलिस ने आपा खो दिया। छात्रों पर ताबड़तोड़ लाठियां बरसाई गईं। उन्हें सड़क पर दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया। कई छात्र जमीन पर लेट गए, जिन्हें पुलिस घसीट-घसीटकर गाड़ियों में ठूंसती नजर आई। आपको बता दें पटना पुलिस ने इस मामले में 40 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है और 500 अज्ञात उपद्रवियों पर FIR दर्ज की है। पुलिस अब कोचिंग संस्थानों, सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स और यू-ट्यूबर्स की भूमिका की जांच कर रही है कि कहीं भीड़ जुटाने के लिए फर्जी अफवाहें और प्रायोजित प्लानिंग तो नहीं की गई थी! वहीं दिल्ली और पटना के अलावा देश का कोई भी कोना इस सियासी जंग से अछूता नहीं रहा। आपको बता दें हैदराबाद के तेलंगाना में हालात बेकाबू हो गए जब कांग्रेस MLC वेंकट बालमूर की अगुवाई में कांग्रेस कार्यकर्ता बीजेपी के प्रदेश मुख्यालय में घुसने की कोशिश करने लगे। दोनों पक्षों के बीच सीधे सड़क पर लाठी-डंडे चले और जमकर पत्थरबाजी हुई।
वहीं छत्तीसगढ़ के रायपुर में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय का घेराव किया, जिन्हें तितर-बितर करने के लिए पुलिस को तेज धार वाली वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा। दूसरी तरफ गुजरात में कांग्रेस दफ्तरों के बाहर भारी सुरक्षा बल तैनात कर बैरिकेडिंग की गई। वहीं मुंबई के गांधी भवन के बाहर प्रदर्शन कर रहे दर्जनों कांग्रेस नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। वहीं महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर निगरानी बढ़ा दी है, तो मध्य प्रदेश के इंदौर में भी छात्र परीक्षा व्यवस्था और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर सड़क पर उतर आए। दरअसल, मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में एक तरफ जहां NEET पेपर लीक को लेकर भंवरकुआं चौराहे पर सैकड़ों युवाओं ने बिना अनुमति के विशाल धरना दिया, वहीं दूसरी तरफ देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में एक अलग ही बवाल खड़ा हो गया है!
दरअसल, DAVV के एम.एड थर्ड सेमेस्टर के छात्रों ने अपनी असिस्टेंट प्रोफेसर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्रों का आरोप है कि शिक्षिका ने पूरे सत्र में इस विषय की एक भी क्लास नहीं ली! सिलेबस पूरा न होने के कारण छात्रों ने परीक्षा देने से इनकार कर दिया, लेकिन शिक्षिका ने उन पर परीक्षा देने का भारी मानसिक दबाव बनाया। जब छात्रों ने परीक्षा नहीं दी, तो उन्हें विषय में सीधे फेल कर दिया गया!
तो देखा आपने ये है देश की वर्तमान तस्वीर! नीट-यूजी पेपर लीक का यह जिन्न अब बोतल से बाहर निकलकर पूरे देश को अपनी चपेट में ले चुका है। एक तरफ जहां लाखों युवाओं का भविष्य अधर में लटका है और वे सड़कों पर पुलिस की लाठियां और आंसू गैस के गोले झेल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ देश की दो सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टियां एक-दूसरे के दफ्तरों पर पत्थरबाजी करने में व्यस्त हैं। ऐसे में सवाल है कि क्या छात्रों को इंसाफ मिल पाएगा? क्या शिक्षा मंत्री का इस्तीफा होगा, या फिर यह मुद्दा इसी तरह राजनीति की बलि चढ़ता रहेगा?
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