NEET पर PM मोदी का बड़ा ऐलान! फास्ट ट्रैक कोर्ट बनेंगे, राहुल ने घेरा सरकार

देश की सियासत और शिक्षा व्यवस्था में इस वक्त ऐसा भूचाल आया है, जिसकी तपिश सड़कों से लेकर संसद के गलियारों तक साफ महसूस की जा सकती है। एक तरफ लाखों-करोड़ों नौजवानों का भविष्य, उनकी दिन-रात की मेहनत और आंखों के सपने हैं, तो दूसरी तरफ पेपर लीक का वो दीमक, जिसने पूरे सिस्टम की जड़ों को हिलाकर रख दिया है। NEET-UG परीक्षा में हुई धांधली और लीक के दावों ने ऐसा बवंडर खड़ा किया है कि अब बात सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह देश के युवाओं के स्वाभिमान और हक की लड़ाई बन चुकी है। वहीं दिल्ली की सड़कों पर उतरे छात्रों का आक्रोश, पुलिस की लाठियों की गूंज और विपक्ष के तीखे हमलों के बीच आखिरकार देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मौन तोड़ते हुए एक बहुत बड़ा ऐलान कर दिया है। जी हां पीएम मोदी ने साफ कर दिया है कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी परीक्षा माफिया को बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों को आनन-फानन में सलाखों के पीछे भेजने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन होगा। लेकिन सवाल ये उठ रहे हैं कि क्या पीएम मोदी का यह ऐलान छात्रों का गुस्सा शांत कर पाया? तो आपको बता दें....बिल्कुल नहीं! दरअसल, पीएम के इस दांव के आते ही राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार की पूरी घेराबंदी कर दी है और इसे 'खोखली बात' करार दे दिया है। तो चलिए, आज इस पूरे महासंग्राम के पीछे की पूरी कहानी जानते हैं कि आखिर संसद से लेकर सड़क तक क्या-क्या तबाही मची है!

देशभर में जारी छात्रों के हिंसक प्रदर्शन और बढ़ते सियासी दबाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर आकर एक बहुत बड़ा और सख्त बयान जारी किया। पीएम ने 5 बड़े संदेश दिए...

देश के युवाओं का हित और उनका भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है.

पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को जल्द से जल्द कठोर सजा दिलाई जाएगी.

ऐसे मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स का गठन किया जाएगा.

संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दे दिए गए हैं.

युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा.

वहीं पीएम मोदी का बयान सामने आने के महज़ कुछ ही मिनटों बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया और प्रेस कॉन्फ्रेंस के ज़रिए प्रधानमंत्री पर करारा हमला बोला। राहुल गांधी ने पीएम मोदी के दावों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि युवाओं के भविष्य को सबसे ज्यादा नुकसान किसी और ने नहीं, बल्कि खुद इस सरकार ने पहुंचाया है। राहुल गांधी ने सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने देश की पूरी एजुकेशन सिस्टम पर परीक्षा माफियाओं और अपने चेहतों का कब्जा होने दिया, उसे पूरी तरह सड़ने दिया और इसके जिम्मेदार लोगों को संरक्षण दिया। वहीं राहुल ने छात्रों की तरफ से सरकार के सामने 3 सीधी शर्तें और मांगें रख दीं। 

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत पद से बर्खास्त किया जाए।

सरकार और प्रशासन देश के सभी पीड़ित छात्रों से बिना शर्त माफी मांगे।

प्रदर्शनकारी छात्रों पर बर्बरता से लाठीचार्ज और हिंसा करने वाले पुलिसकर्मियों पर सख्त एक्शन हो।

आपको बता दें बात सिर्फ राहुल गांधी तक नहीं रुकी। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी सरकार को जमकर घेरा। प्रियंका ने कहा कि यह टीवी पर बयानबाजी का नहीं, बल्कि असली नेतृत्व दिखाने का समय है। उधर राज्यसभा में माहौल तब और गरमा गया जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पीएम के बयान को सीधा भड़काऊ और खोखला करार दे दिया। खड़गे ने कहा कि जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक विपक्ष सरकार से किसी भी टेबल टॉक के लिए तैयार नहीं है। 

वहीं एक तरफ विपक्ष का तीखा हमला था, तो दूसरी तरफ NDA शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय मंत्रियों ने प्रधानमंत्री के इस फैसले को ऐतिहासिक और क्रांतिकारी बताया। 

उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह निर्णय देश के करोड़ों मेहनती छात्रों के भविष्य की रक्षा की दिशा में एक दूरदर्शी कदम है। इससे परीक्षा माफियाओं पर लगाम लगेगी और सरकारी परीक्षाओं की पारदर्शिता वापस लौटेगी।

दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि फास्ट ट्रैक कोर्ट बनने से हर परिश्रमी छात्र के साथ न्याय सुनिश्चित होगा। अब मेहनत करने वाले बच्चों के अधिकार कोई छीन नहीं पाएगा।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम अरुण साव ने साफ़ किया कि मोदी सरकार में युवाओं के भविष्य से समझौता ज़ीरो-टॉलरेंस नीति पर चलेगा।

वहीं राजस्थान की डिप्टी सीएम दीया कुमारी ने कहा कि यह फैसला उन माफियाओं के मुंह पर तमाचा है जो युवाओं के सपनों का सौदा करते हैं।

इसके अलावा केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, अन्नपूर्णा देवी और सीआर पाटिल ने याद दिलाया कि केंद्र सरकार ने इससे पहले पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट, 2024 लागू करके ऐतिहासिक कदम उठाया था, और अब फास्ट ट्रैक कोर्ट्स उस कानून को ज़मीनी स्तर पर तेज़ी से लागू करेंगे।

फिलहाल दिल्ली समेत देश के अलग-अलग कोनों में माहौल पूरी तरह से तनावपूर्ण बना हुआ है। छात्र संगठन और लाखों अभ्यर्थी सड़कों पर डटे हुए हैं। एक तरफ जहां सरकार यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि वह फास्ट ट्रैक कोर्ट और कड़े कानूनों के जरिए पेपर लीक का नामोनिशान मिटा देगी, वहीं छात्र और पूरा विपक्ष इस बात पर अड़ा है कि जब तक शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय नहीं होती और बड़े चेहरों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह लड़ाई थमने वाली नहीं है। आपको बता दें सीबीआई पहले ही पटना, गोधरा, हज़ारीबाग और राजस्थान समेत कई जगहों से दर्जनों सॉल्वर गैंग के मास्टरमाइंड्स और बिचौलियों को गिरफ्तार कर चुकी है। देश की सर्वोच्च अदालत इस पूरे मामले पर लगातार सुनवाई कर रही है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अगर परीक्षा की पवित्रता में कोई भी कमी आई है, तो उस पर सख्त से सख्त एक्शन होगा। दूसरी तरफ बजट सत्र के दौरान भी विपक्ष इस मुद्दे को लेकर दोनों सदनों को ठप्प करने की रणनीति बना रहा है। विपक्ष की एकमात्र मांग शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा और नीट परीक्षा के पूरे ढर्रे को बदलना है।

कुल मिलाकर NEET-UG पेपर लीक का यह मामला अब सिर्फ एक परीक्षा में गड़बड़ी का केस नहीं रहा, बल्कि यह देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य, उनकी मेहनत और भारत के लोकतंत्र की साख का सीधा सवाल बन चुका है। एक तरफ पीएम मोदी का फास्ट ट्रैक कोर्ट वाला मास्टरस्ट्रोक है, तो दूसरी तरफ शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और पुलिस बर्बरता पर जवाब मांगता एकजुट विपक्ष और सड़कों पर डटा युवा! अब देखना यह होगा कि क्या सरकार के इस कदम से छात्रों का टूट चुका भरोसा वापस जुड़ पाएगा या फिर संसद से लेकर सड़क तक उठ रहा यह सियासी तूफान सरकार को घुटने टेकने पर मजबूर कर देगा? 

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