दिल्ली में नेहा बोरा के संबोधन पर बवाल, लगे ‘बाहर जाओ’ के नारे

दिल्ली में गुरुवार को अभिनेता प्रकाश राज की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जमकर हंगामा हुआ। प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेहा बोरा और अभिजीत दिपके भी मौजूद थे। नेहा बोरा ने अपने संबोधन की शुरुआत राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की प्रसिद्ध रचना ‘रश्मिरथी’ की पंक्तियों से की, लेकिन जैसे ही उन्होंने SIR और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे आंदोलन का जिक्र किया, वहां मौजूद कुछ लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। हंगामा इतना बढ़ गया कि नेहा बोरा को अपना संबोधन बीच में ही रोकना पड़ा।

‘जंजीर बढ़ाकर साध मुझे…’ कविता से की शुरुआत

नेहा बोरा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत रामधारी सिंह दिनकर की रचना ‘रश्मिरथी’ की पंक्तियों से की। उन्होंने कहा, “एक हिंदी की कविता है-जंजीर बढ़ाकर साध मुझे, हां-हां दुर्योधन बांध मुझे।”

इन पंक्तियों का संदर्भ महाभारत के उस प्रसंग से जुड़ा है, जब भगवान श्रीकृष्ण पांडवों की ओर से शांति प्रस्ताव लेकर हस्तिनापुर की सभा में पहुंचे थे। कथा के अनुसार, दुर्योधन ने शांति प्रस्ताव स्वीकार करने के बजाय श्रीकृष्ण को बंदी बनाने की कोशिश की थी। इसी प्रसंग में श्रीकृष्ण ने अपना विराट स्वरूप दिखाया था। नेहा बोरा ने कविता के जरिए अपने आंदोलन के संदेश को सामने रखने की कोशिश की।

SIR और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ आंदोलन का किया जिक्र

नेहा बोरा ने कहा कि SIR और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ उनका आंदोलन केवल किसी एक व्यक्ति या राजनीतिक दल के लिए नहीं, बल्कि देशभर में वोट देने के अधिकार से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने इसे पार्टी का आंदोलन मानने से इनकार करते हुए कहा कि यह लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई है।

नेहा बोरा ने सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत का जिक्र करते हुए दावा किया कि यह कार्रवाई केवल कुछ नेताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि वोटिंग के अधिकार के लिए आवाज उठाने वाले लोगों को प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि नेताओं को हिरासत में लेने से आंदोलन को रोका नहीं जा सकता।

‘बाहर जाओ’ के नारे, नेहा बोरा को रोकना पड़ा भाषण

नेहा बोरा अपना पक्ष रख ही रही थीं कि दर्शकों की ओर से हंगामा शुरू हो गया। कुछ लोग ‘बाहर जाओ, बाहर जाओ’ के नारे लगाने लगे। नेहा ने कई बार लोगों को समझाने की कोशिश की, लेकिन विरोध जारी रहा। स्थिति बिगड़ने पर उन्हें अपना संबोधन रोकना पड़ा।

हंगामा बढ़ने पर नेहा बोरा ने प्रेस क्लब के पदाधिकारियों से अनुरोध किया कि कार्यक्रम में बाधा डाल रहे लोगों को बाहर किया जाए। अभिजीत दिपके ने भी हस्तक्षेप करते हुए ऐसे लोगों को बाहर करने की मांग की। इस दौरान काफी देर तक शोर-शराबा होता रहा।

अभिजीत दिपके ने संभाला माइक

कार्यक्रम में हंगामा जारी रहने के बाद अभिजीत दिपके ने माइक संभाला और लोगों को समझाने की कोशिश की। हालांकि, विरोध के चलते नेहा बोरा को अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस समाप्त करनी पड़ी। इसके बाद दिपके ने कार्यक्रम को संबोधित किया।
फिलहाल इस घटना ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अभिव्यक्ति, राजनीतिक विरोध और कार्यक्रम में व्यवधान को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हंगामा करने वाले लोगों की पहचान और विरोध के पीछे की वजह को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

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