नेपाल में बाढ़ का खौफनाक मंजर! शव रखने की जगह नहीं, DNA से होगी पहचान
नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। आपदा प्रभावित इलाकों में बड़ी संख्या में शव बरामद किए गए हैं। अस्पतालों और मुर्दाघरों में शव रखने की जगह नहीं बचने के कारण कई अज्ञात शवों को दफनाना पड़ा है। हालांकि, शवों को दफनाने से पहले उनके DNA सैंपल सुरक्षित किए गए हैं, ताकि भविष्य में परिजनों के DNA से मिलान कर उनकी पहचान की जा सके।
बाढ़ के बाद कई अस्पतालों और अस्थायी शवगृहों के बाहर बड़ी संख्या में लोग अपने लापता परिजनों की तलाश में कई दिनों से इंतजार कर रहे हैं। नेपाल के आपदाग्रस्त चितवन जिले में मृतकों के अंतिम संस्कार की व्यवस्था से जुड़ी एक सुविधा की निगरानी कर रहे इंस्पेक्टर अनिल थापा के मुताबिक, बरामद शव तेजी से सड़ रहे थे। अस्पतालों और शव रखने की जगहों पर क्षमता खत्म होने के कारण कई शवों को दफनाना पड़ा।
उन्होंने बताया कि शवों को दफनाने से पहले DNA सैंपल लिए गए हैं। अगर भविष्य में कोई परिवार अपने लापता सदस्य की तलाश में आता है, तो उसके DNA से इन सैंपलों का मिलान कर पहचान की कोशिश की जा सकेगी। इंस्पेक्टर थापा के अनुसार, बरामद किए गए आधे से अधिक शवों की पहचान करना बेहद मुश्किल है। कई शवों के चेहरे बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिससे पहचान की प्रक्रिया और चुनौतीपूर्ण हो गई है।
चितवन एक्सपो सेंटर लापता लोगों के परिजनों के लिए एक अहम केंद्र बन गया है। यहां एक हॉल के बाहर सैकड़ों लोग दिन-रात अपने परिजनों की तलाश में जमा हैं। हॉल में एक स्क्रीन पर बरामद शवों की तस्वीरें और उनके साथ मिले सामान की जानकारी दिखाई जा रही है। परिजन इन तस्वीरों और सामान के जरिए अपनों की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं। भीड़ में कई लोग बैग और अन्य सामान लेकर पहुंचे हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वे दूर-दराज के इलाकों से अपने लापता रिश्तेदारों की जानकारी लेने आए हैं।
कुछ परिवारों ने बताया कि वे एक दिन पहले ही चितवन पहुंच गए थे, लेकिन इसके बावजूद उन्हें हॉल के अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली। प्रशासन की ओर से पहचान प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। एक पुराने एक मंजिला मकान को शवों के लिए अस्थायी स्टोरेज सुविधा में बदला गया है। यहां उन शवों को रखा जा रहा है, जिनकी अभी तक पहचान नहीं हो सकी है।
अस्थायी शव सुविधा के बाहर तीन तंबू लगाए गए हैं। इनमें नेपाल रेड क्रॉस का हेल्प डेस्क और पुलिस रजिस्ट्रेशन सेंटर भी शामिल है। शवों के सड़ने के कारण आसपास तेज दुर्गंध फैल रही है। इससे राहत पाने के लिए हेल्प डेस्क के पास लगातार अगरबत्ती जलाई जा रही है।
नेपाल की लापता लोगों की सूची में 592 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। इनमें पर्वतारोहण के लिए नेपाल पहुंचे पर्यटक और कैलाश पर्वत की यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्री भी शामिल हैं।
बताया गया है कि लापता विदेशी नागरिक भारत, अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा समेत कई देशों से नेपाल पहुंचे थे।
नेपाल पुलिस ने सोशल मीडिया के जरिए लापता लोगों के परिजनों से DNA प्रोफाइलिंग में सहयोग करने की अपील की है। पुलिस ने परिजनों से काठमांडू स्थित नेपाल पुलिस अस्पताल की पैथोलॉजी लैब या नजदीकी जिला पुलिस कार्यालय में खून का ताजा नमूना और पासपोर्ट साइज की दो तस्वीरें उपलब्ध कराने को कहा है। इन DNA सैंपलों का बाद में अज्ञात शवों से लिए गए DNA सैंपलों के साथ मिलान किया जाएगा। इसका उद्देश्य अज्ञात शवों की पहचान कर उन्हें उनके परिवारों तक पहुंचाना है।
नेपाल में बाढ़ के बाद पैदा हुए इन हालातों ने राहत और बचाव के साथ-साथ लापता लोगों की पहचान और शवों के प्रबंधन को भी बड़ी चुनौती बना दिया है। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां DNA प्रोफाइलिंग के जरिए अधिक से अधिक अज्ञात शवों की पहचान करने की कोशिश में जुटी हैं।
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