अंग्रेज़ी नववर्ष के साथ अपना हिंदी नववर्ष भी पहचानिए
जब पूरी दुनिया 1 जनवरी को नया साल मनाती है, तब भारत में एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है जो हिंदी (हिंदू) कैलेंडर के अनुसार चैत्र मास में नए साल की शुरुआत करता है। सवाल यह है कि हिंदू नव वर्ष जनवरी में नहीं, बल्कि चैत्र में क्यों होता है? इसके पीछे धार्मिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक कारण छिपे हैं।
हिंदू कैलेंडर और चैत्र मास का महत्व
हिंदू पंचांग एक चंद्र-सौर कैलेंडर है, जिसमें महीने चंद्रमा की गति और वर्ष सूर्य की स्थिति पर आधारित होते हैं।
इस पंचांग के अनुसार:
- चैत्र वर्ष का पहला महीना होता है
- चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नया साल शुरू होता है
- यह समय आमतौर पर मार्च–अप्रैल के बीच आता है
इसी दिन से विक्रम संवत का नया वर्ष प्रारंभ माना जाता है।
प्रकृति से जुड़ा है हिंदू नव वर्ष
चैत्र का समय केवल कैलेंडर का बदलाव नहीं, बल्कि प्रकृति के नए चक्र की शुरुआत भी है:
- पेड़ों पर नई पत्तियाँ आती हैं
- फसल कटाई के बाद खेत खाली होते हैं
- मौसम न ठंडा रहता है, न ज्यादा गर्म
- जीवन में नई ऊर्जा और ताजगी दिखाई देती है
इसीलिए हमारे पूर्वजों ने नया साल ऐसे समय से जोड़ा, जब प्रकृति भी “नया आरंभ” करती है।
धार्मिक मान्यताएँ क्या कहती हैं?
हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार:
- चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी
- इसी दिन से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होती है
- यह दिन शुभ कार्यों, पूजा-पाठ और नए संकल्प के लिए उत्तम माना जाता है
इसलिए इसे केवल नया साल नहीं, बल्कि आध्यात्मिक नव आरंभ भी माना जाता है।
भारत के अलग-अलग राज्यों में कैसे मनाया जाता है?
भारत में हिंदू नव वर्ष अलग-अलग नामों से मनाया जाता है:
- गुड़ी पड़वा – महाराष्ट्र
- उगादी – आंध्र प्रदेश और कर्नाटक
- चेती चंद – सिंधी समाज
- नव संवत्सर / हिंदू नव वर्ष – उत्तर भारत
नाम अलग हो सकते हैं, लेकिन तिथि और भाव एक ही होता है।
हिंदी कैलेंडर के अनुसार नया साल चैत्र में इसलिए होता है, क्योंकि:
- यही वर्ष का पहला महीना है
- प्रकृति में नया जीवन शुरू होता है
- धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताएँ इसी समय से जुड़ी हैं
इसलिए हिंदू नव वर्ष केवल तारीख का बदलाव नहीं, बल्कि जीवन को नए सिरे से शुरू करने का अवसर है।


No Previous Comments found.