जौनपुर की सुलोचना मौर्य को डॉक्टरेट की मानद उपाधि,नई दिल्ली में हुआ ऐतिहासिक सम्मान
नई दिल्ली - बुनियादी शिक्षा और नारी सशक्तिकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली उत्तर प्रदेश के जनपद जौनपुर निवासी सुलोचना मौर्य को देश की प्रतिष्ठित संस्था पंडित दीनदयाल उपाध्याय हिंदी विद्यापीठ विश्वविद्यालय द्वारा डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। यह गरिमामय सम्मान नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय हिंदी संगोष्ठी के दौरान प्रदान किया गया। समारोह में विद्यापीठ के कुलपति डॉ. इंदु भूषण मिश्रा एवं मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ. अरविंद कुमार ने उन्हें मानद उपाधि और स्मृति चिन्ह भेंट किया।
पिछले एक दशक से सुलोचना मौर्य उत्तर प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं और बालिकाओं के उत्थान तथा बुनियादी शिक्षा के लिए “सब पढ़े, सब बढ़े” अभियान को समर्पित हैं। उन्होंने महिलाओं के अधिकारों को संवैधानिक पहचान दिलाने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया है। वे भारत के पारितंत्र व स्वतंत्र इतिहास में पहली सरकारी मान्यता प्राप्त एकमात्र महिला कार्मिक संगठन की संस्थापिका हैं, जिसे बीते वर्ष योगी सरकार द्वारा मान्यता मिली। उनके नेतृत्व में प्रदेश व देशभर में सैकड़ों संगोष्ठियां, स्कूल चलो अभियान रैलियां, प्राथमिक विद्यालयों में राष्ट्रीय विषयों पर लेखन प्रतियोगिताएं, पर्यावरण संरक्षण हेतु जल संचयन जागरूकता, मोटा अनाज के उपयोग पर स्वास्थ्य अभियान, सौर ऊर्जा के प्रति जन-जागरूकता तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए प्रत्येक जनपद में कार्यशालाएं आयोजित की गईं—जिनसे लाखों महिलाएं सशक्त हुई हैं। महिला शिक्षकों व कार्मिकों के लिए मासिक तीन दिन पीरियड लीव की मांग को लेकर उन्होंने संगठित संघर्ष किया। इस मांग के समर्थन में देशभर की महिला कार्मिकों ने विगत वर्ष पौने दो लाख से अधिक ट्वीट किए,वहीं सैकड़ों जनप्रतिनिधियों ने राज्य व केंद्र सरकार को पत्र भेजकर इसे मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री तक पहुंचाया। सुलोचना मौर्य ने स्वीप कार्यक्रमों के माध्यम से मतदाता जागरूकता बढ़ाई, वंचित वर्ग के अनाथ बच्चों की शिक्षा में आर्थिक सहयोग दिया और महिलाओं व बालिकाओं के उत्पीड़न के मामलों में थाने से न्यायालय तक न्याय दिलाने की लड़ाई लड़ी। वे समय-समय पर आनंदीबेन पटेल से शिष्टाचार भेंट कर प्रदेश की महिलाओं के कल्याण से जुड़े मुद्दे उठाती रही हैं। विद्यापीठ ने 25 नवंबर 2025 को उन्हें “विद्या वाचस्पति सारस्वत सम्मान” प्रदान करने का निर्णय लिया था, जो अब डॉक्टरेट की मानद उपाधि के रूप में परिणत हुआ। समारोह में मुख्य वक्ता शिक्षण विधि विशेषज्ञ व वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रितु दुबे तिवारी, राष्ट्रीय पर्यावरण वर्ल्ड रिकॉर्ड धारी डॉ. विश्वनाथ पाणिग्रही तथा इस्पात मंत्रालय के पूर्व सदस्य कुलवंत सिंह उपस्थित रहे। सम्मान स्वीकार करते हुए सुलोचना मौर्य ने कहा, “यह सम्मान मेरा नहीं, उन लाखों महिलाओं और लड़कियों का है जो निरंतर संघर्ष कर रही हैं। हमारा लक्ष्य सशक्त भारत का निर्माण है, जहां हर बेटी अपनी क्षमताओं को पूर्ण रूप से विकसित कर सके।” नई दिल्ली में आयोजित यह राष्ट्रीय हिंदी संगोष्ठी शिक्षा और नारी सशक्तिकरण के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई, जो सुलोचना मौर्य के परिश्रम, संघर्ष और समर्पण से आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।
रिपोर्टर - लखन यादव

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