दीक्षारम्भ–2026 का गरिमामय समापन, पद्मश्री डॉ. अश्विनी भिड़े देशपांडे के शास्त्रीय गायन ने बांधा समां
लखनऊ, 30 जुलाई 2026। भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ में आयोजित "दीक्षारम्भ–2026 कार्यक्रम का समापन दिवस सांस्कृतिक गरिमा, शास्त्रीय परंपरा एवं प्रेरणादायी वातावरण के मध्य सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर पद्मश्री से सम्मानित सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका डॉ. अश्विनी भिड़े देशपांडे ने विश्वविद्यालय के कलामंडपम सभागार में अपनी उत्कृष्ट शास्त्रीय गायन प्रस्तुति से उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह, सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका डॉ. अश्विनी भिड़े देशपांडे तथा स्पिक मैके के प्रतिनिधि डॉ. हेमचंद्र पालीवाल द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।
अपने गायन की शुरुआत डॉ. अश्विनी भिड़े देशपांडे ने राग तोड़ी से की, जिसके पश्चात उन्होंने राग मेघ मल्हार में "मेघ श्याम घनश्याम" की भावपूर्ण प्रस्तुति देकर वातावरण को संगीतमय बना दिया। कार्यक्रम के अगले चरण में उन्होंने बनारस घराने की प्रसिद्ध ठुमरी "सुंदर सारी मोरी, मइके में मैल भई, का लेके जइबे गवनवा हो रामा" प्रस्तुत की, जिसने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। उनकी प्रस्तुति में हारमोनियम पर डॉ. विनय मिश्रा, तबला पर विनोद लेले तथा तानपुरा पर अपूर्वा तिवारी ने प्रभावशाली संगत प्रदान की।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्रो. सृष्टि माथुर (विभागाध्यक्ष, गायन), डॉ. मनोज कुमार मिश्र (विभागाध्यक्ष, तालवाद्य) एवं ज्ञानेन्द्र दत्त बाजपेयी (विभागाध्यक्ष, नृत्य) सहित शिक्षकगण, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की उपस्थिति रही।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय में ऐसे प्रतिष्ठित कलाकारों का आगमन विद्यार्थियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायी होता है। उन्होंने कहा कि महान कलाकारों को प्रत्यक्ष सुनने और उनसे सीखने का अवसर विद्यार्थियों के जीवन की अमूल्य धरोहर बन जाता है तथा उनके समग्र व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव एस. पी. सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, आत्मविश्वास तथा व्यावसायिक दक्षता को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से निरंतर ऐसे शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करता है। उन्होंने बताया कि "दीक्षारम्भ" कार्यक्रम विद्यार्थियों के शैक्षणिक जीवन की सशक्त शुरुआत है, जो उन्हें अपने लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु उचित मार्गदर्शन एवं प्रेरणा प्रदान करता है।
समापन दिवस पर विश्वविद्यालय में आयोजित चार दिवसीय कथक नृत्य कार्यशाला का भी सफल समापन हुआ। कार्यशाला के चतुर्थ एवं अंतिम दिवस पर प्रख्यात कथक गुरु जयंत कस्तुवार ने विद्यार्थियों को कथक नृत्य में अभिनय, उपज, गत, नायिका भाव तथा अभिव्यक्ति के विविध आयामों का गहन अभ्यास कराया। इस प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को भारतीय शास्त्रीय नृत्य की सूक्ष्मताओं को निकटता से समझने एवं आत्मसात करने का विशेष अवसर प्राप्त हुआ।
सांस्कृतिक उत्कृष्टता, शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य की समृद्ध परंपरा तथा प्रेरणादायी वातावरण से परिपूर्ण दीक्षारम्भ–2026 का समापन समारोह विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव सिद्ध हुआ।
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