स्वच्छ राजनीति स्वच्छ भारत श्रेष्ठ भारत का करें एक संकल्प.

स्वच्छ  राजनीति स्वच्छ भारत श्रेष्ठ भारत का करें एक संकल्प.

लेखिका उषाबेन अनिल कुमार जोषी, पालनपुर गुजरात

भारतिय संस्कृति आदि अनादि काल से  अनेकता मे एकताओँ से गौरवान्वित हे. राष्ट्र का गौरव अस्मिता बचाने, बढाने देश मे अनेक  अवतारी स्री पुरुषों ने यह पावन धरा पर अवतरण किया हे. मां भोम/ राष्ट्र के लिए सेकडों  महानायकों, दृष्टाओं, चिंतनकारो और अनगिनत आबाल,वृद्ध, महिलाओं ने परदेशी आक्रान्ताओं की चुँगाल से मां भारती को मुक्त करने हेतु राष्ट्रयज्ञ मे अपने प्राणों की आहुति देकर  राष्ट्र गौरव की रक्षा की हे.अतः जिस समाज मे समस्त राज्य/ राजनीति को प्रतिष्ठा एवं सम्मान  की द्रष्टि से देखा जायेगा वही समाज/ राष्ट्र सही मायनें मे प्रगति की ऊँचाई या सर करेगा. राष्ट्र की कलगी मे चार चाँद निखर आऐंगे और संपूर्ण विश्व भारत को " विश्व गुरु" कहने लाईन मे खडे होंगे.                          

देश की साँप्रत परिस्थितियां बहुत चिंतित करनेवाली होती जा रही है  भूमाफिया, ड्रग सप्लायर,गुँडे, ,जेहादियों, आतंकीयो,वामपंथियों, देश के गद्दारो ने लवजिहाद, लेंडजिहाद, धर्मांतरण जैसी गतिविधियों से युवाओं, को लोभ, लालच से भटकाने मे कामयाब होते जा रहे हें और पश्चिमी संस्कृति का अँधा अनुकरण देश की प्रगति मेअवरोध पैदा करते हें ये गहरी चिंता का विषय हे एसी परिस्थितियों मे जनता देश के नेताओं पे आस लगाती हे. देश का शिक्षक, नेता, अधिकारी गण सब राष्ट्र नायक कहलाते हें,... तो...आज हमें, हमारा नेता कैसा होना चाहिए या हमें कैसा नेता चुनना हे वही सवाल आपसे करना हे.वर्तमान मे, अनेक दुष्प्रभाव ,लोभ, लालच जनमानस को भटकाकर अपनी ओर खींच रहा हे,वहाँ संस्कार संरक्षण रूपी यक्ष प्रश्न हम सभी को व्यथित व चिंतित कर रहा हे ऐसे मे हमारा दायित्व दोहरा हो जाता हे.                                     

देश का नेतृत्व, सभीओर से प्रतिभावान, द्रढनिशचयी,सही निर्णय लेने मे सक्षम, निडर, साहसी, राष्ट्र प्रति निष्ठा वान,सेवा, समर्पण/ स्वच्छ छबि वाला हो ये सभी की मांग होती हे, और ऐसा नैतृत्व ही  देश के गौरव को और ऊंचाईया देने मे सक्षम हे,जीसके रीहदय मे राष्ट्र के प्रति श्रद्धा प्रेम हो.  स्वच्छ नेता स्वच्छ राजनीति के लिए हम सभी..को  आज से ही द्रढ संकल्प करना हे कि... अवसर आने पर देश /जनता के प्रति वफादार नेता चुनने की मुहिम मे  आसपास के सभी को जोडना हे. अपने लिए,देश के लिए स्वाभिमान हो वही लक्ष्य को सिद्ध कर सकता हे.यही प्रेरक शक्ति हमारे सैनिकों की देश प्रेम और राष्ट्र रक्षा की अग्नि जलाने मे सामर्थ्यवान होती हे उनकी निष्ठा, त्याग, मजबूत मनोबल और बलिदान की भावनाएं शत्रुओँ को उखाड़ फेंकती हे,उनका तेज और पुरुषार्थ देख शत्रु भी कांप उठता हे, हमारा नेता भी ऐसा ही होना चाहिए, जो समय आने पर किसी भी विपरीत परिस्थितियों को संभालने पर सक्षम हो ऐसे नैतृत्व को चुनने के लिए हमें एक विचार होना हे वैचारिक समझदारी devlopment करनी हे, राष्ट्र भावना साँझा करनी हे .आत्मधर्म को व्यवहार धर्म मे बदलना हे. व्यवहार और द्रढनिशचय से हर पहलुओं मे समाधान मिलता हे।        

  हमें एक अच्छा राजनीतिज्ञ/ कुशल वहीवटकर्ता चाहिए .तो हमें जातिवाद, प्रान्तवाद,भाषावाद, सगावाद (भाईभतिजावाज )ऊँच, नीच,लोभ, लालच से निकलकर उपर उठना  हे, हमेँ निश्चय करना हे कि, ग्राम पंचायत, नगरपालिका, तालुका पंचायत ,विधानसभा हो या लोकसभा का चुनाव हो हमें  ,देश/ जनता के प्रति निष्ठा वाला सेवा समर्पण देनेवाला स्वच्छ लोकसेवक चुनना हे. स्वच्छ राजनीति श्रैष्ठ राजनीति के लिए स्वच्छता अभियान जरूरी हे  राष्ट्र के लिए अनेक सहयोग कर सकते हे आजका युवा सबकुछ अच्छा कर सकता हे,उन्हें प्रेरणा देनी हे .आपको अपने किँमती समय का दान करके सही नैतृत्व को चुनना हे, हमें चुप/ मौन नहीं रहना हे, अन्यथा अनर्थमूलक,असामाजिक तत्वों का हि विकास होगा और गलत नेताओं की आड मे गुनाहित प्रवृत्तिया,निर्भिक होके साम,दाम,दंड, भेद  के षड़यंत्र के कुचक्र मे वश कर भोली जनता को लूटते फिरेंगे. दो करोड़ से लेके दश करोड़ मे चुनाव टीकट लेनेवाले अपनी ही तिजोरियां भरलेंगे,इतना हि नहीं, सत्ता के नशे एवं स्वार्थ मे  देश की गरीमा नीचा करने देशद्रोहीगिरोह से मिलने मे ,रावन का कद भी छोटा दिखाऐगे. हम अपना घर किराये पर देतें हे तो,पुरी सिनाक करतें हे, फिर यहाँ तो देश का सुकान सोपना हे. बहुत सोच समझ के श्रेष्ठ व्यक्ति को अपना सुकानी बनाना हे, अगर आप सोते रहे,...फिर. रोते रहो.!!!!   ऋग्वेद मे कहा हे "आ देवानाम भवः केतुरग्रे" . श्रेष्ठ व्यक्ति ही. जनता का नेता बने. यदि कहीं आपको लगता है कि जनता आपको भी समर्थन करती हे, तो आप भी.. इस यज्ञ मे यजमान बन सकते हो.!!                                        

यदि हमें सही अर्थ मे राष्ट्र का पुनरुत्थान करना हे तो हमें, देश के लिए सर्वस्व न्योछावर करनेवाले हमारे युगावतारी अवतरणों की ओर आकर्षित होना, नमन करना होगा., श्री अरविंद, स्वामी चिन्मयानंद जी, स्वामी विवेकानंद, सुभाष बाबु,दुर्गा भाभीजी, रानी लक्ष्मीबाई, भगीनी निवेदिता, हेडगेवार जी,सेकडों, वीर, विराँगनाओ, और उनके बोल पर मर मिटनेवाले वीर सपूतों ने मां भारती केगौरव के लिए अपने प्राणों की आहुति दी. श्री अरविंद ने  ICS होते हुए भी ब्रिटिश सीवील सेवा नहीं स्वीकार की,"it's mother call, , मां ने बुलाया हे" .कहते बंगभंग विरोधी आंदोलन मे नैतृत्व लिया. "वंदेमातरम" रचना कर, बंकिम बाबु ने हजारों राष्ट्रवादियों मे आझादी के प्रान पुरे.सरदार वल्लभभाई ने बारडोली सत्याग्रह मे ,अपनी ही नीजी प्रेस खोल दी. 562 राजाओं को एक किया, सबने राजपाट को छोडा!!!.           

मेरे प्यारे भारतीयों, हम सब मिलके संकल्प करें. कि हम भी एक सच्चे राष्ट्रवादी नेता को देश का सुकान  सोपकर, उनकी सही विचार धारा के साथ सहयोग करें. हमें भी मां भारती ने प्रेरणा की हे कि.,हम भी मां भारती को विश्व गुरु बनाने मे अपना सहयोग करें, अपनी कलम से "फुल नहीं, पत्तियाँ सही." अर्पण करें. राष्ट्र कल्याण मे कर्ता नहीं तो, निमित्त तो बन सकते हे . राष्ट्र कल्याण की, हम सभी देश वासियों की अन्दरूनी भावना एक दिन अवश्यमेव रुपक मे आएगी.. उत्तिष्ठत जागृत प्राप्य वरान्निबोधत. उठो, ध्येय प्राप्त ना हो, लगे रहो. भगवान महाकाल, मां जगदम्बे से,नमन,प्रार्थना करें, भारत श्रेष्ठ हो,विश्व गुरु हो।

Leave a Reply



comments

Loading.....
  • No Previous Comments found.