निशिकांत दुबे का राहुल गांधी पर हमला, कहा- AI और सट्टा लॉबी के जरिए 'रिजीम चेंज' की रच रहे साजिश
झारखंड के दुमका जिले में भारतीय जनता पार्टी के सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर अत्यंत गंभीर आरोप लगाए हैं। बीजेपी सांसद ने दावा किया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्रिप्टोकरेंसी, बिटकॉइन और ऑनलाइन सट्टेबाजी से जुड़े कई अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क दुनिया भर के विभिन्न देशों में लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकारों को अपने प्रभाव में लेने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि ये विदेशी नेटवर्क भारत में 'रिजीम चेंज' (सत्ता परिवर्तन) की साजिश रच रहे हैं और इसके लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी कथित तौर पर इन ताकतों के हित में काम कर रहे हैं। दुबे ने मांग की है कि राहुल गांधी की विदेशी यात्राओं और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से उनके संबंधों की उच्च स्तर पर गहन जांच होनी चाहिए।
अमेरिकी नेताओं, जॉर्ज सोरोस फाउंडेशन और विदेशी नेटवर्क का उठाया गंभीर मुद्दा
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने नेविल रॉय सिंघम, अमेरिकी सांसद इल्हान उमर, सांसद रो खन्ना और चर्चित सोरोस फाउंडेशन जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय नामों का जिक्र किया। उन्होंने सवालिया लहजे में पूछा कि इन तमाम विदेशी नेटवर्कों का भारत की आंतरिक राजनीतिक गतिविधियों के साथ आखिर क्या संबंध है। इसके अलावा, उन्होंने राहुल गांधी की हालिया वियतनाम समेत अन्य विदेशी यात्राओं पर भी कड़े सवाल उठाए और अपने दावों की पुष्टि के लिए बीते 22 सितंबर के एक अमेरिकी कांग्रेस के दस्तावेज का हवाला दिया। सांसद का कहना है कि इन विदेशी ताकतों का मुख्य उद्देश्य भारत की राजनीतिक स्थिरता को कमजोर करना है।
राष्ट्रीय सुरक्षा और लोकतांत्रिक संप्रभुता के लिए बताया बड़ा खतरा
डॉ. निशिकांत दुबे ने इस पूरे घटनाक्रम को देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा करार दिया है। उनके अनुसार, मुख्य चिंता का विषय यह है कि क्या कुछ शक्तिशाली अंतरराष्ट्रीय वित्तीय और तकनीकी हित भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश के घरेलू राजनीतिक आंदोलनों को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि इस तरह के विदेशी नेटवर्कों और वित्तीय लेनदेन की बात साबित होती है, तो यह सीधे तौर पर भारत की राजनीतिक संप्रभुता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की अखंडता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। बीजेपी सांसद ने मांग की है कि विदेशी फंडिंग और राजनीतिक अभियानों के बीच छिपे संबंधों की पारदर्शी जांच होनी चाहिए और लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को अस्थिर करने के किसी भी प्रयास को पूरी सख्ती के साथ रोका जाना चाहिए।

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