14 अप्रैल को इस्तीफा देंगे नीतीश कुमार, नीतीश कुमार का 'एग्जिट प्लान' तैयार
बिहार की राजनीति में आज वो होने जा रहा है जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी! दो दशक, आठ शपथ और अनगिनत पलटियों के बाद, आखिरकार नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने का मन बना लिया है। जी हां, तारीखें तय हो चुकी हैं, स्क्रिप्ट लिखी जा चुकी है और अब बस क्लाइमेक्स का इंतज़ार है। नीतीश कुमार अब पटना के सुल्तान नहीं, बल्कि दिल्ली के सांसद कहलाएंगे। लेकिन असली धमाका तो पटना में होने वाला है, जहाँ पहली बार बीजेपी का कोई नेता मुख्यमंत्री की गद्दी पर बैठने जा रहा है। कौन होगा वो चेहरा? क्या नीतीश के बेटे निशांत कुमार की एंट्री से बिहार की सत्ता में नया मोड़ आएगा? क्या सम्राट चौधरी ही बनेंगे बिहार के नए सम्राट? आइए जानते हैं बिहार की सत्ता के उस बंद कमरे का राज...
बिहार की राजनीति में 2005 से शुरू हुआ एक लंबा अध्याय अब आखिरी पन्नों पर है। नीतीश कुमार ने दिल्ली की पारी शुरू करने के लिए अपना बोरिया-बिस्तर समेट लिया है। यह केवल एक मुख्यमंत्री का इस्तीफा नहीं, बल्कि बिहार के इतिहास का सबसे बड़ा पावर ट्रांसफर है। बिहार में सत्ता परिवर्तन की पूरी स्क्रिप्ट किसी सस्पेंस फिल्म जैसी है। सूत्रों के मुताबिक, पूरी क्रोनोलॉजी कुछ इस तरह रहने वाली है।
10 अप्रैल को नीतीश कुमार दिल्ली में राज्यसभा सांसद पद की शपथ लेंगे। इसी दिन दिल्ली में बीजेपी के दिग्गज नेताओं की महा-बैठक होगी, जिसमें पीएम मोदी और अमित शाह बिहार के नए भविष्य पर मुहर लगाएंगे।
11 अप्रैल को शपथ लेने के बाद नीतीश कुमार पटना लौटेंगे।
14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती पर नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे। इसी दिन एनडीए विधायक दल की बैठक में नए नेता के नाम का औपचारिक ऐलान होगा।
15 अप्रैल को बिहार में नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह हो सकता है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद शिरकत कर सकते हैं।
आपको बता दें मुख्यमंत्री की रेस में सबसे आगे सम्राट चौधरी का नाम है। वही सम्राट चौधरी, जिन्होंने कभी नीतीश कुमार को गद्दी से हटाने के लिए सिर पर पगड़ी बांधकर कसम खाई थी। आज वही सम्राट, नीतीश के लव-कुश समीकरण के जरिए बीजेपी को सत्ता के शिखर पर ले जाने वाले हैं। नीतीश ने अपनी समृद्धि यात्रा के दौरान बार-बार सम्राट के कंधे पर हाथ रखकर जनता को संकेत दे दिया था कि 'अब यही संभालेंगे।' लेकिन इस बार नीतीश कुमार ने सिर्फ सत्ता नहीं छोड़ी, बल्कि अपने राजनीतिक वारिस का भी फैसला कर दिया है। 8 मार्च को उनके बेटे निशांत कुमार का जेडीयू में शामिल होना कोई इत्तेफाक नहीं था। बल्कि कहा जा रहा है कि नीतीश की विरासत दो हिस्सों में बंटेगी। सुशासन का राजनैतिक हिस्सा बीजेपी के पास जाएगा, जबकि जेडीयू की कमान और पार्टी पर नियंत्रण निशांत कुमार के पास होगा। चर्चा तो यहाँ तक है कि निशांत कुमार को नई सरकार में डिप्टी सीएम बनाकर उन्हें भविष्य के लिए तैयार किया जाएगा।
वहीं दिल्ली में होने वाली बैठक में बीजेपी के तमाम दिग्गज संजय सरावगी, विजय सिन्हा, नित्यानंद राय और मंगल पांडेय शामिल होंगे। बीजेपी इस बार कोई रिस्क नहीं लेना चाहती। वह नीतीश कुमार की 'सुशासन' वाली छवि को पूरी तरह अपने नाम करना चाहती है। जेडीयू नेता विजय चौधरी ने भी साफ कर दिया है कि अब बिहार की कमान बीजेपी के हाथों में होगी।
जाहिर है बिहार की राजनीति में अब खरमास खत्म होते ही एक नया सवेरा होने वाला है। नीतीश कुमार ने अपनी पारी खेल ली है और अब वे 7, सर्कुलर रोड के बंगले से बिहार का मार्गदर्शन करेंगे। लेकिन सवाल अभी भी वही है कि क्या बीजेपी का मुख्यमंत्री बिहार की जनता की उम्मीदों पर खरा उतरेगा? क्या निशांत कुमार अपने पिता की राजनैतिक विरासत को संभाल पाएंगे? ये 10 से 15 अप्रैल के पांच दिन बिहार के अगले पांच साल तय करने वाले हैं। इतिहास गवाह है कि बिहार की राजनीति में जो दिखता है, वो होता नहीं और जो होता है, वो कोई देख नहीं पाता। लेकिन इस बार सम्राट चौधरी की पगड़ी खुलती दिख रही है और बिहार को अपना नया 'सम्राट' मिलने वाला है।


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