जांच का दायरा बढ़ा: महर्षि संस्थान की जमीन बेचने वालों पर ED का शिकंजा, कई गिरफ्तार
नोएडा : SRM फाउंडेशन ऑफ इंडिया (महर्षि महेश योगी संस्थान) की जमीनों की अवैध बिक्री के मामले में अब जांच का दायरा और बढ़ गया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा एसआईटी (SIT) गठन के आदेश के बाद, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के तहत बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। ताजा जानकारी के अनुसार, ED ने इस फर्जीवाड़े से जुड़े कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बढ़ीं मुश्किलें
संस्थान के श्रीकांत ओझा द्वारा दायर अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव की निगरानी में SIT जांच का आदेश दिया था। अब ED की एंट्री ने इस फर्जीवाड़े में शामिल भू-माफियाओं और फर्जी अधिकारियों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। जांच एजेंसी यह पता लगा रही है कि करोड़ों रुपये की जमीनों को बेचकर मिलने वाले धन को कहां और कैसे ठिकाने लगाया गया।
मुख्य सचिव और SIT करेगी फैक्ट फाइंडिंग
जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की पीठ ने स्पष्ट किया था कि रजिस्ट्रार ऑफ सोसाइटीज की मदद से उन संपत्तियों की पहचान की जाए जिन्हें बिना अनुमति के बेचा गया। कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को भी रद्द कर दिया था जिसने पुलिस की जांच रिपोर्ट पर रोक लगाई थी। अब SIT और ED दोनों एजेंसियां मिलकर इस बड़े भूमि घोटाले की परतों को खोल रही हैं।
महर्षि की विरासत को खुर्द-बुर्द करने का आरोप
अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में मुकदमे लंबित होने के बावजूद संपत्तियों की अवैध बिक्री जारी रहना गंभीर चिंता का विषय है। महर्षि महेश योगी ने आध्यात्मिक उत्थान के लिए जो आधारशिला रखी थी, उसे कुछ लोग निजी स्वार्थ के लिए खत्म कर रहे हैं।
तीन महीने में सौंपी जाएगी रिपोर्ट
जहाँ SIT को तीन महीने के भीतर अपनी फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट देनी है, वहीं ED की गिरफ्तारियों ने यह संकेत दे दिया है कि इस मामले में कई सफेदपोश चेहरे बेनकाब होने वाले हैं। जांच अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे सभी आरोपियों पर कड़ी नजर रखें और फर्जी दस्तावेजों के जरिए हुए हर ट्रांजैक्शन की गहराई से पड़ताल करें।
रिपोर्टर : लखन

No Previous Comments found.